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Thursday, 15 October 2015

BRAHMAND YODDHA

Review- ब्रहमांड योद्धा (2015)
Containing Spoilers (जिनको रिव्यु देखना नहीं पसंद हैं..वो कृपया अपना समय इसको पढ़कर नष्ट ना करें!)
24 Pages/70 Panels (Avg.  3  Panels per page).
Genre-Action-Adventure,Sci-Fi
Main character(s)- ध्रुव,परमाणु,कारा!

Short Synopsis -

आखिरी सीरीज का तीसरा भाग आपके हाथो में है! कहानी का सार यह है कि पहले ही पेज में पूर्वसार ठोका गया है! (जैसे पिछले 2 पार्ट्स में 10 बातें दिखाई थी..कि पाठक भूल गए) इसके बाद कॉमिक्स के 23 में से 17 पेज परमाणु,ध्रुव,कारा दिखाए गए हैं! जो यहाँ से वहां भटक रहे हैं....अटैक होता है..एक्शन होता है..फिर अटैक होता है..फिर एक्शन होता है...फिर अटैक होता है..फिर नागराज की सर्प रस्सी आ जाती है! बच्चों,बजाओ तालियाँ! बाकी पेजों में कुछ खास नहीं है..डोगा-स्टील-गगन-तिरंगा-विनाशदूत शक्ल दिखाकर कल्टी मार गए!

कहानी कैसी है?
पहले ध्यान दीजिए कि अब हो गए हैं कहानी के 72 पेज! और अब तक पाठको की झोली में सिर्फ एक चीज़ गिरी है....जिसका नाम है-
कॉस्मिक इम्बैलेंस
कॉस्मिक इम्बैलेंस
कॉस्मिक इम्बैलेंस
आदरणीय लेखक साहब पहले पार्ट में ही आपके तुच्छ पाठकों को पता चल गया...कि आपके द्वारा रचित महान खोज “कॉस्मिक इम्बैलेंस” की वज़ह से सारे ग्रहों के वासी यहाँ से वहां हो रहे हैं....अब कितनी बार इस शब्द को दोहराते रहेंगे सर ???... हर दूसरे पन्ने पर यही शब्द वापस याद दिलाया जाता है...लेकिन आप आगे की बात लिखते ही नहीं...बस कॉस्मिक इम्बैलेंस  हो जाता है...और परमाणु कहीं दूसरे शहर पहुंचा दिया जाता है..वहां नई जाति के परग्रही दिखाकर फिर से कॉस्मिक इम्बैलेंस हो जाता है...फिर परमाणु नई जगह पहुँच जाता है! अरे आगे भी तो बढिए ना सर...एक छोटा सा..बस थोडा सा….हाँ!
एक परग्रही अहिंसावादी है...दूसरा हिंसक है...किसी के मियां-बीवी हैं..किसी का पूरा गाँव बाराती बना हुआ है...हमें इन सबका बायोडाटा क्यूँ रटवा रहे हैं सर...हम क्या इनके राशन कार्ड बनायेंगे यह सब जानकार! हमें पुराने लेखक यह सब सालों पहले बता चुके कि हर ग्रह पर अलग अलग तरह के जीव रहते हैं! उनकी भाषा :+रुB;’;=-=,झ/रु+--= आपको तक समझ आ नहीं रही...पर हमें समझाने में लगे हुए हैं! रुक जाइये सर...पाठक मर जायेंगे..इतनी हाई लेवल लैंग्वेज पढ़कर!

आदरणीय लेखक जी ने एक ही सिंगल लाइन हर हीरो पर फिट करी जा रही है..गगन तिरंगा और विनाशदूत कहानी में हैं..पर वही सब कर रहे हैं..जो डोगा-स्टील और भेड़िया-शक्ति ने किया था! देख मेरे भाई.... मैंने वार किया...पर असर नहीं हुआ..हाँ यार दूसरा वार कर..तीसरा कर..चौथा कर! असर होने तक करता रह! एक्शन की भी ओवरडोज़ कर दी...इन हीरोज़ का पिछली 2 कॉमिक्स में एक्शन झाड़कर मन नहीं भरा तो इस तीसरे में भी वही सब दिखा दिया!

आदरणीय लेखक जी की चमत्कारिक लेखनी देखिये...परमाणु और ध्रुव पहली कॉमिक्स में SATI पर ही होश आये....तब दोनों ने सबकुछ देखा..पर नहीं दिखा...तब परमाणु को महसूस नहीं हुआ..कि उसके अन्दर की ऊर्जा वहीँ आस-पास है...यह तो आप सब जानते ही हैं कि परमाणु की सभी शक्तियां हज़ार गुणा amplify कर गई हैं...तो जो ऊर्जा पहले उसके अन्दर थी..उसका आभास वहीँ मौजूद मशीन से चल जाना चाहिए थे..हमें तो यही लगा था कि SATI में कुछ मिला ही नहीं..पहले शायद लेखक यह कह सकते थे..कि वो मशीन कहीं अन्दर जाकर छुपी होगी..जो नज़र नहीं आई...लेकिन पेज-22 पर साफ़ दिख रहा है कि वो मशीन बिल्डिंग के बाहरी हिस्से में बिलकुल साफ़-साफ़ खुली पड़ी है! लेखक परमाणु से  पूरी दुनिया का चक्कर कटवाकर पाठको की जेब से पैसे निकाल चुके...तो अब U-Turn मारकर वापस दोनों को SATI ले आये...कि भैया असल रसगुल्ला तो यहीं छुपा था..आओ चाशनी समेत गप्प कर लो! परमाणु अन्दर घुसा पर लेखक सोचे अरे, पाठकों को इतना घुमाया है तो इतनी जल्दी कैसे सब सही कर दूँ...वो हरी मौत को भी कहानी में ठूंस देता हूँ..2-3 पार्ट्स और खींच लूँगा! जो सीरीज परमाणु-ध्रुव की 2 इन 1 बोलकर शुरू करी थी..उसको बदलकर मिनी सर्वनायक जैसी ही बना दी है!
ध्रुव के एक्शन सीन में दिखाई गई गप्प पढ़कर पाठक अपना माथा पीट सकते हैं!  मैक्ट्रायम ग्रह के जो मैक्ट्रीयम्स कोम्बटर्स परमाणु को मारने आते हैं...उनके अन्दर उड़ने की शक्ति भी मौजूद थी...इसके लिए पेज 8-12 को देखा जा सकता है..जिसमे कई मैक्ट्रीयम्स उड़ते हुए नज़र आयेंगे...लेकिन ध्रुव उन्हें एक संकरी सी पहाड़ के बीच इसलिए फंसा देता है..क्यूंकि उन्होंने बजाय उड़कर पीछा करने के ज़मीन पर कदम रखे थे! पहले तो यही बचकाना लगता है कि जिन मशीनों के अन्दर यह कमांड है कि वो किसी भी हाल में उत्तरजीवी को खत्म करें..वो अपना मशीनी दिमाग लगाकर एक दूसरे निहत्थे आम आदमी के पीछे क्यूँ भागेंगे..और ऐसा करेंगे भी तो सिर्फ एक-दो... ना कि पूरी फ़ौज! एक चींटी जैसा ध्रुव भीमकाय मैक्ट्रीयम्स का ध्यान अपनी तरफ कैसे लाया...यह दिखाया भी नहीं गया...वो सपाट पहाड़ियों के बीच में अपनी स्टार लाइन कितनी दूरी तक फंसा सकता था...और कहाँ पर..यह भी नहीं दिखाया गया! सिर्फ बाद में नौटंकी झाडी गई..कि वाह ध्रुव क्या दिमाग पाया है! अरे कारा ....ख़ाक दिमाग पाया है....ध्रुव को बर्बाद कर दिया इस सीरीज में! सिर्फ कह दिया..कि ऐसा ऐसा हो गया है! घोर निराशाजनक!
आदरणीय लेखक जी आज के समय में उच्च कोटि के व्यापारिक लेखक हैं...नए लेखकों को इनसे सीखना चाहिए कि कैसे 1 लाइन के प्लाट पर 10 पार्ट्स की सीरीज ठोकी जा सकती है! पुराने लेखकों ने गलती कर दी...90-120 पेज में पूरी मल्टीस्टारर कहानी लिख डालते थे...अगर आपकी तरह उनके अन्दर व्यापारिक सोच होती तो वो भी एक लाइन पर सीरीज लिखकर काफी पैसा उगाह सकते थे, पर उनके अन्दर आपकी तरह दूरदर्शिता नहीं थी!  पहले यही कहानी जहाँ 40 रुपये देकर 120 पेज में पूरी हो जाती...आज 240 पेज, डेढ़ साल का इन्तेज़ार और 400 रूपए देने के बाद भी गारंटी नहीं देती..कि आखिर में समाप्त लिखा दिख ही जाए! सर आपको साहित्य अवार्ड दिया जाना चाहिए! (जिसको वापस कर देना बाद में)!

आर्टवर्क- टोटल पिछले 2 भाग जैसा! नाम हमेशा की तरह धीरज जी का है..लेकिन काम किसका है..यह बस भगवान् जाने! इतने अलग-अलग चेहरे ध्रुव के बनाए हुए हैं..कि कोई नहीं कहेगा कि यह इतने अनुभवी आर्टिस्ट का काम है!

टिप्पणी-
ब्रह्माण्ड योद्धा में कहानी रत्ती भर भी आगे नहीं बढ़ी है..कहानी खींचकर बस और एक पार्ट बढ़ा दिया है!
रिव्यु जारी रहेगा विश्व रक्षक में...
पाठकों से अनुरोध - अगला भाग “विश्व रक्षक” भारी संख्या में खरीदें, RC और रचनाकारों  को मालामाल बनाएं!

Ratings :
Story...★★☆☆☆☆☆☆☆☆
Art......★★★★☆☆☆☆☆☆
Entertainment……★★☆☆☆☆☆☆☆☆

#Dheerajverma,#Nitinmishra,#BrahmandYoddha,#Rajcomics,#scd,#parmanu


Wednesday, 26 August 2015

HIBERNATION



Review- हाइबरनेशन (2015)
62 Pages/209 Panels (Avg. 3 ½ Panels per page).
Genre-Action, Sci-Fi,Suspence-Thriller  
Main character(s)-  इंस्पेक्टर स्टील,श्वेता,अनीस,नताशा,रोबो,ध्रुव,ब्लैक कैट!

Short Synopsis-

राजनगर रक्षक का आनंद ले चुके पाठको को अब उसका दूसरा भाग हाइबरनेशन मिल गया है! "राजनगर रक्षक" एक ऐसी कहानी थी जिसमे क्या हो रहा है..कौन क्या कर रहा है..इसका अंदाजा लगना नामुमकिन हो गया था! इसलिए हमें उम्मीद थी कि शायद दूसरे भाग में कम से कम हाइबरनेशन के बारे में लेखिका कुछ अहम् खुलासे कर सकती हैं! (आखिर नाम हाइबरनेशन जो रखा हुआ है!) परन्तु इस भाग में भी कहानी ज्यादा कुछ खुलती प्रतीत नहीं होती है! यानी हम पाठको से यही कह सकते हैं कि भाइयों अभी दिल्ली दूर है!
अगला पड़ाव राजनगर रीबूट नाम से आने वाला है...और हमारी यही उम्मीद है कि उसके बाद भी पार्ट्स हो सकते हैं! मतलब कहानी अभी काफी सफ़र तय करने वाली है...जो अगले साल के उत्तरार्ध तक चलने की पूरी सम्भावना है!

अब तक 120 पेज की कहानी हो चुकी है! और इतने पेजों में मुख्य बातें जो खुली हैं वो इस प्रकार हैं-
@राजनगर तबाह होकर हाइबरनेशन बन गया है! (क्यूँ,कैसें,कब,कहाँ जैसे सवाल अनुत्तरित ही हैं!)
@स्टील हीरो से विलेन बन गया है और ध्रुव उसके चंगुल में आ गया है!
@रोबो और दूसरे विलेन अपनी-अपनी महत्वकांशाओ में डूबे हुए हैं!
बाकी जो बातें हैं..वो साइड-स्टोरी की तरह चल रही हैं! उनमे कुछ खोला या जोड़ा नहीं जा रहा!
कहानी वहीँ से शुरू होती है जहाँ रुकी थी...मैकेनिक और स्टील के बीच द्वन्द पूरा होता है! फिर ध्रुव और श्वेता पर एक हमला...फिर कहानी कुछ नए और काफी सारे पुराने अलग-अलग किस्सों को दिखाते हुए आगे बढती जाती है...कभी आप Past में होते हैं कभी Present में...एक-एक बात को तो यहाँ पर नहीं बताया जा सकता...मोटे तौर पर यह कह सकते हैं कि कहानी का सारा सस्पेंस “अमर जवान ज्योति” की तरह शान से धधक रहा है!

किरदारों पर नज़र-

ध्रुव- हाइबरनेशन में ध्रुव का रोल बहुत कम है...10-12 पेजों में वो नज़र आता है! यहाँ भी वो एक्शन और confusion से भरा हुआ दिख रहा है!
अनीस रजा- अनीस का रोल अहम् है..लेकिन उतना ही है जितना कहानी में जरूरतों को पूरा कर सके! मैकेनिक को हराने के अलावा वो फिलहाल अपहृत हो चुका है!
श्वेता/चंडिका- श्वेता का रोल अनीस रजा के बराबर ही है...बाकी अंत में चंडिका के रूप में थोड़ी कूदफांद कर लेती है!
रोबो- कुर्सी पर बैठे रोबो का रोल इतना है कि वो इशारों में बता जाते हैं कि भाइयों मुझसे लेखको को अति प्रेम है..मेरे बिना कोई कहानी बन ही नहीं सकती! बोलो जय माता दी! मतलब आपको पिछली कई सीरीज की तरह से इस सीरीज में भी रोबो को देखना ही पड़ेगा!
नताशा- लेखिका ने गदगद कर दिया हमें...जब हम नताशा को इस कॉमिक्स में देखते हैं! शानदार और जबरदस्त रोल है नताशा का! मैं तेरी दुश्मन..दुश्मन तू मेरा..मैं नागिन तू सपेरा! हम आगे भी नताशा को ऐसे ही देखने के बड़े उत्सुक हैं! (y)
सलमा खान- सलमा का रोल फिलहाल मुहं दिखाई तक ही रहा है...ज्यादा नहीं है..पर उसको वापस देखना अच्छा लगता है!
स्टील- हाइबरनेशन पूरी तरह से स्टील के कंधो पर टिकी हुई है...और हमें लगता है कि उसके कंधे काफी मजबूत हैं..जो इस कहानी को उठा सकने में सक्षम हैं! स्टील एक्शन,इमोशन,नेगेटिव,पॉजिटिव, फ़र्ज़ की मशीन,कानून का दुश्मन हर तरह के सतरंगी रंग दिखा रहा है! उसको देखना अद्भुत लग रहा है!

कहानी के मजबूत पक्ष-

शुरुआत के 35 पेज भूल जाइए....36 नंबर के पेज से कहानी असल मुद्दे पर वापस आती है... वही से कहानी को मजबूती मिलनी शुरू होती है! इंस्पेक्टर स्टील यहाँ पर 2 शख्सियत से जूझ रहा है! कभी वो शांत नज़र आता है..कभी उग्र हो जाता है! यहाँ पर रोबो और वंडर वुमन के बीच अच्छे पन्ने हैं..और अंत में octopussy vs Steel के बीच जो दिखाया जाता है..वो शानदार मनोरंजन करता है! यह सिर्फ स्टील के fans को महसूस होने वाली बातें हैं! जो पाठक स्टील को नहीं जानते उनके बारे में हम यही कहेंगे कि स्टील को भी जानने की कोशिश करें..तभी इस कहानी का आनंद मिल पायेगा!
हाइबरनेशन में वो सब है जो राजनगर रक्षक में नहीं था...साथ ही इसमें वो सब नहीं भी है..जो राजनगर रक्षक में था! जैसे वो परग्रही एलियन इस भाग में गायब है! ऐसे में कहा जा सकता है कि आगे का इंतज़ार करने के लिए कहानी का एक विस्तृत आधार बन चुका है!

कॉमिक्स क्यूँ पढ़ें-
1-स्टील और मैकेनिक सालों बाद नज़र आते हैं...हाँ उनके बीच की लड़ाई वैसी नहीं हो पाई जैसी उम्मीद करी जाती है..पर ठीक ठाक थी!
2- श्वेता का ध्रुव से बहस करना और उसके लिए अपना प्रेम दिखाना द्रवित कर देता है! भाई-बहन के बीच ऐसे पल आते रहने चाहिए जहाँ वो अपने दिल की बातें जुबान पर ले आते हैं!
3- लेखिका बधाई की पात्र हैं कि उन्होंने पाठकों को नताशा और ध्रुव के बीच जो असल सच्चाई है..उसको दिखाने का साहस किया है! अनुपम जी ऐसी बातों को हमेशा टालते रहे हैं..लेकिन नए लेखक इसपर विचार देते जा रहे हैं! पेज-21 इस कॉमिक्स में एक नगीने की तरह चमक लाया है! जिससे कई अपराधी प्रवृति के व्यक्तियों के समर्थक पाठको को निराशा होने वाली है!
4- पेज-26 से लेकर 33 तक काफी अच्छे और उत्साहित करने वाले पन्ने हैं...नताशा को एक बार फिर से उसके असली रूप से लेखिका ने परिचित करवाया है! जो उसकी पहचान और किस्मत है! इन पन्नो से अति आनंद मिलता है!
1-     पेज 36-41 पहली बार स्टील के अन्दर छुपे जज्बातों को बाहर लाने का काम करते हैं! ऐसी नयी बातें दिखाई जाती रहे तो कहानी अच्छी लगती है!
2-     अंत के पन्ने एक्शन और इमोशन के बीच लिखे गए हैं! इसलिए उनका काफी महत्व रहता है!

तो आपके पास यह 7 वजहें हैं जो हाइबरनेशन को अच्छा बनाती हैं!

कहानी के कमजोर पक्ष-

कहानी वैसे उस स्टेज में नहीं है कि बहुत ज्यादा तार्किक और अतार्किक देखा जा सके! कुछ छोटी बातें जरूर नज़र आती हैं..जिन्हें दूर किया जाता तो कहानी बेहतर हो जाती! यह 2 भाग का आधार 120 पन्नो की जगह कुछ कांट-छांट करके कम भी किया जा सकता था...यहाँ पर एडिटिंग का पक्ष कॉमिक्स की एक बड़ी टेक्निकल रूप से कमजोर कड़ी है!

1-     पेज 3 पर मैकेनिक स्टील के ऊपर कुछ डिवाइस फेंकता है..जिनको स्टील अपने शरीर में प्रवाहित होते 440V के करंट से नष्ट कर देता है...लेकिन तुरंत ही मैकेनिक अपना दूसरा Accelerator Device उसी 440V current के होते हुए स्टील के बाजू पर चिपका देता है..जिसको स्टील हटा नहीं पाता!
यहाँ पर 2 बातें आती हैं- पहली - Accelerator Device करंट द्वारा नष्ट हो जाना चाहिए था क्यूंकि मैकेनिक को पहले से नहीं पता था कि स्टील की बॉडी में ऐसा 440V का कोई फंक्शन है..जिसको ध्यान में रखकर वो अपने device को इतना हाई वोल्टेज झेलने लायक बनाकर आता!
पर चलिए हो सकता है संयोग से उसका Device करंट झेल गया...लेकिन जो Accelerator Device निर्जीव ट्रक और कार को अनियंत्रित कर देता है..क्यूंकि इन सबके अन्दर मैकेनिकल/इलेक्टिकल पॉवर होती हैं....वही चीज़ स्टील के सभी अंगों को कैसे अनियंत्रित कर गई...जबकि स्टील का हर बॉडी पार्ट कंप्यूटराइज्ड है..उसमे दिमाग द्वारा कमांड्स और इंस्ट्रक्शन देने पर ही वो चलते हैं! कुछ ही देर बाद अनीस रजा स्टील के ऊपर ड्रोन द्वारा ड्रिलिंग करके उसके कंप्यूटराइज्ड सिस्टम को रिबूट कर देता है! अगर आप यह दिखाते कि किसी नए Device के कारण स्टील का दिमाग अनियंत्रित हो गया..जिसकी वज़ह से उसके हाथ-पैरों पर से कण्ट्रोल हट गया..वो ज्यादा सहमती लायक होता..बजाय यह दिखाने के कि दिमाग नियंत्रित है...लेकिन शरीर नहीं! अनीस रजा ने जहाँ तक हमारी जानकारी है....स्टील को इस तरह से बनाया था कि अमर का दिमाग स्टील का हर बॉडी पार्ट को कण्ट्रोल करता है! राजनगर रक्षक में भी आपने दिखाया था कि स्टील अपना एक हाथ शरीर से अलग करके गुंडों पर गोलीबारी करता है! यानी कमांड देना दिमाग से जुडी चीज़ है! अगर मैकेनिक एक डिवाइस से स्टील के पूरे शरीर को नचा सकता तो यह काम वो पहले सदियों पहले कर चुका होता या तब जब उसको स्टील के अन्दर के पूरे कंप्यूटराइज्ड सिस्टम के कोड्स का पता होता जो नामुमकिन है!
एक्शन सीन में जीत-हार दिखाने वाले पहलु पर थोडा और अधिक ध्यान दें!

2-     यह पॉइंट सुशांत जी के लिए है! पेज 5 पर रजनी मेहरा को अत्यधिक दुबली-पतली बनाया गया है! यह कहानी क्यूंकि 5 साल आगे की है..इसलिए रजनी मेहरा बालचरित से भी ज्यादा बुढिया हो जायेंगी..पर आप उन्हें बढती उम्र के साथ जवान करते जा रहे हैं! कृपया उन्हें उसी तरह बनाएं..जैसी अनुपम जी ने उन्हें बनाया है! चेहरे पर झुर्रियां और बालों में कुछ सफेदी दिखने से रजनी मेहरा आपके ऊपर केस नहीं ठोक देंगी!

3-     पेज 6 पर कमिश्नर राजन मेहरा जो पुलिस के उच्च अधिकारी है...उनके घर में मेटालिका द्वारा भयंकर उत्पात,तोड़-फोड़ करने के बाद भी वहां पुलिस का एक हवलदार तक नहीं दिखाया गया...यह तो बहुत ही संगीन त्रुटी है! बालचरित में जहाँ अनुपम जी दिखाते हैं कि कमिश्नर राजन मेहरा का करोडो का बंगला किसी अभेद्य दुर्ग जैसा है...5 साल आगे की कहानी में आप दिखाते हैं कि नहीं...वो बंगला तो सुनसान जगह पर मौजूद है...विलेन आराम से घुस जाता है! आधे घंटे लड़ाई चलती है..पर बाहरी दुनिया से कोई तांकझाक प्रेमी  पडोसी तक अपना सुपर हीरो जिंदा है कि लुढ़क गया..देखने तक नहीं आता! अब इसको क्या कहें?

4-     बहुत दुखद था यह देखना कि Women Empowerment के नाम पर आपने महान खलनायक फरसा को नताशा जैसी एक लड़की के हाथो सिर्फ 3-4 लातें खाकर बेहोश दिखा दिया! लातें तो उसको स्टील ने भी किसी ज़माने में 50 भारी-भरकम मारी थी..मगर वो तब तो बेहोश नहीं हुआ? हमें यह बात समझ नहीं आती कि 2 लोगों के लड़ने के बीच हार-जीत आप किस तरह से दिखाना चाहते हैं! इसी पेज पर हैमर भी आता है..और अपने बड़े हथौड़े से नताशा की पीठ पर इतना जोरदार वार करता है कि उसकी पीठ की पसलियाँ और रीढ़ की हड्डी में दरार आ जानी चाहिए थी...मगर वो लगभग तुरंत ही अपने पैरो पर खड़ी दिखाई दे जाती है!
मतलब ???
फरसा इतना कमजोर है कि नताशा के 4 वार में ज़मीन सूंघ जाए और नताशा इतनी हट्टी-कट्टी है कि हैमर को झेल जाए!
आपको यह बात सोचनी चाहिए कि आपके दिखाए जा रहे एक्शन सीन बहुत ज्यादा कमजोर हैं और इन बातों पर ध्यान देना लेखिका के साथ संपादको का भी दायित्व है!

5-     पेज 57 में आपने एक बड़ी गलत चीज़ दिखाई है कि ब्लैक कैट को टॉप मोस्ट क्रिमिनल्स में से एक बताया है! अब आप अनुपम सिन्हा जी की कॉमिक्स के तथ्य बदलना शुरू कर रहे हैं! “हत्यारा कौन” कॉमिक्स के अन्दर साफ़-साफ़ बताया गया है कि अपने पुराने गुनाहों के लिए ब्लैक कैट को जेल भेजा जा चुका था...और उसके बाद वो सर्कस कॉमिक्स में वापस आकर एक नई जिंदगी शुरू कर चुकी है! आपने इस कॉमिक्स में भी साफ़-साफ़ बताया है कि सभी ड्रोन अगर  क्रिमिनल पर अटैक करते हैं...वो उसके DNA को मैच करते हैं...ऐसे में अगर ब्लैक कैट का DNA उनके पास है..तो वो आसानी से उसके तार ऋचा से जोड़ सकते हैं! यानी ऋचा की identity को खतरा उत्पन्न हो जाता है! कुल मिलाकर आपने अपनी ही बातों को काट दिया है...अगर आप यह दिखा रहा हैं कि ब्लैक कैट क्रिमिनल है..तो आपको यह दिखाना चाहिए कि ऋचा का ब्लैक कैट वाला राज़ भी सबके ऊपर खुला हुआ है! असल में आपने ब्लैक कैट को क्रिमिनल लिस्ट में बताकर ही गलती कर दी है! इसको अगर हो सके तो किसी तरह अगले भागो में सुधारने की कोशिश करें! कोई ऐसा justification देकर जो अनुपम जी की कॉमिक्स से मिलता हुआ लगे! अपनी theories को पुरानी कहानियों पर मत लादिये!

संवाद-

कॉमिक्स डायलॉग्स के मामले में बहुत उन्नत है! भर-भर के पेनल्स में संवाद डाले गए हैं...पढने में मज़ा आ जाता है जब इतना सारा material मिलता है! स्टील के लड़ाई वाले भागों में कुछ भारी-भरकम एक्शन दृश्य लिखे गए हैं...लेकिन बाकी कहानी सपाट और संतुलित नज़र आती है! संवादों की कुशलता इस कॉमिक्स का एक उल्लेखनीय पहलु है!

कॉमिक्स का एक अन्य कमजोर पक्ष भी है तो वो इसका आर्टवर्क है! राजनगर रक्षक में जहाँ सुशांत जी का अकेला चित्रांकन था...इसमें रवि आनंद के अलावा कई inkers को जोड़ा गया है..परिणाम यह निकला कि कुछ पन्ने अच्छे बन गए...और ज्यादातर पन्ने औसत से भी निम्न दर्जे के नज़र आते हैं!
पेज 1-4 ठीक ठाक!
पेज 5-8 अति निम्न!
पेज 9-13 औसत!
पेज 14-30 अति निम्न!
पेज 31 ठीक ठाक!
पेज 32-34 औसत!
पेज 35-41 ठीक ठाक!
पेज 42-46 अति निम्न!
पेज 47-53 ठीक ठाक!
पेज 54-62 अति निम्न!

हमें नहीं पता कि कौन से पेज में किस इंकर ने अपनी प्रतिभा का जलवा बिखेरा है! सिर्फ विनोद कुमार जी की इंकिंग हम पहचान सकते हैं...और ठीक ठाक लगने वाला आर्टवर्क उन्ही में है! बाकी inkers को तो बहुत ज्यादा मेहनत करने की जरूरत है...क्यूंकि अगर सुपर कमांडो ध्रुव की सीरीज में इतना खराब आर्टवर्क वो बना रहे हैं..तो हम यही कहेंगे कि राज कॉमिक्स में काम का स्तर दिनों दिन गिरता जा रहा है!
रंग संयोजन का पक्ष भी औसत दर्जे का है! कोई कमाल का इफ़ेक्ट या रंगों रोंगन नज़र नहीं आता...जिसको यहाँ लिखा जा सके!

हाइबरनेशन निसंदेह इस सेट की सबसे अग्रणी कॉमिक्स है! लेकिन इसमें भी पूर्ण मनोरंजन मिल नहीं पाता! कहानी में सबकुछ अबूझ पहेली बना हुआ है..और आर्टवर्क माशाअल्लाह है! हमारा यही कहना है कि सीरीज का एक पार्ट होने के अलावा फिलहाल यह ज्यादा प्रासंगिक नहीं दिखती! बेशक आपको यह लेनी चाहिए क्यूंकि स्टील की कॉमिक्स सालों में एक बार नसीब होती है! बाकी बातें अगले भाग में!


Ratings :
Story...★★★★★★☆☆☆☆
Art......★★★★☆☆☆☆☆☆
Entertainment……★★★★★☆☆☆☆☆

#SushantPanda,#Nitinmishra,#Hibernation,#Rajcomics,#scd,#InsSteel,#Stutimishra



PARKAALO KI DHARTI


Review- परकालों की धरती (2015)
25 Pages/65 Panels (Approx. 2 ½ Panels per page).
Genre-Sci-Fi,Action-Adventure
Main character(s)- ध्रुव,परमाणु.भेड़िया,शक्ति,डोगा,इंस्पेक्टर स्टील!

Short Synopsis-
आखिरी सीरीज का दूसरा भाग आपके हाथो में है! कहानी का सार यह है कि किसी अज्ञात घटना की वज़ह से पूरे ब्रह्माण्ड के हर ग्रह से प्राणियों का ट्रान्सफर यहाँ से वहां हो रहा है! अब हमारे जो सुपर हीरो कहीं और पहुँच गए हैं..वो वहां के एलियंस से लड़ रहे हैं और जो एलियंस धरती पर आ गए हैं..उनसे पिछले भाग में ध्रुव और परमाणु लड़ चुके ही हैं! इतनी सी काम की बात अब तक दिखाई गई है! बाकी सिर्फ एक्शन चल रहा है!
कहानी की रफ़्तार बहुत सुस्त है...पहला पेज पूर्वसार लिखने के लिए अर्पित किया गया है! दूसरे पेज से 9वे पेज तक भेड़िया-शक्ति कहीं किसी ग्रह पर एक्शन में लिप्त हैं! उसके बाद परमाणु-ध्रुव यहीं एक्शन से त्रस्त हैं! और अंत के 4 पन्नो में डोगा-स्टील एक्शन में व्यस्त हैं! कहानी में सभी हीरो कहीं न कहीं अस्त-व्यस्त हैं!
1-    आपने अगर पहले कभी भेड़िया को गदा घुमाते ना देखा हो!
2-    अगर आपने पहले कभी परमाणु को उल्कायें गिरने से रोकते ना देखा हो!
3-    आपने पहले स्टील और डोगा को गोलीबारी करते ना देखा हो!
तो यह कॉमिक्स आपके लिए ही बनाई गई है!

कहानी कैसी है?
इसमें कोई कहानी है भी फिलहाल अभी नज़र नहीं आ रहा! अगर एक्शन सीन को कहानी कहते हैं तो हाँ इसमें बहुत सारी कहानी है! एक्शन में कहानी खोजना अभी मुमकिन नहीं दिख रहा! तो लेखक जब कहानी के दर्शन करवाएंगे तो कुछ कहना ठीक होगा! तब तक शुद्ध हिंसा का आनंद प्राप्त करें और दूसरो को भी दें!

हिंसा से अलग वैज्ञानिक दृष्टिकोण पर एक  अद्भुत नज़ारा इस कॉमिक्स में दिखाया गया है! परमाणु जिसकी सभी शक्तियां amplify हो चुकी हैं! (कितनी?.. यह मत पूछना)  वो उल्काओं को लेकर सूर्य के पास पहुंचकर भी वापस धरती पर बिना तंदूरी चिकन बने लौट आता है....लेकिन बेचारा सिर्फ बेहोश हुआ है! अद्भुत पराक्रम था यह! हमने यही पढ़ा था कि उसकी एस्बेस्टस की पोशाक आम हालातों में लगने वाली आग से उसका बचाव कर सकती है...लेकिन लेखक ने यहाँ एक तरफ लिखा है कि परमाणु को 100 सूर्य के बराबर गर्मी लग रही थी..लेकिन दूसरी तरफ उसकी पोशाक उसको बचाए हुई भी है! अब हम यह प्रश्न करेंगे कि AMPLIFY तो सिर्फ उसकी परमाणु शक्तियां हुई हैं....लेकिन एस्बेस्टस की पोशाक तो उसकी परमाणु शक्ति के अंडर नहीं आती...तो क्या उसकी पोशाक भी 100 सूर्यों की गर्मी झेलने लायक हो गई है? वो पोशाक उसकी आँखें,नाक और मुहं की आम खाल की रक्षा नहीं कर सकती थी...पर उसका तो लगता है एक रोयां तक नहीं उखड़ा! लेखक की कल्पना रुपी कलम से हुई विज्ञान के कागज़ की इस हत्या को सलाम!

आर्टवर्क-

धीरज जी ने जैसा आर्ट पिछले भाग में दिया था..वही यहाँ भी जारी है! फर्क सिर्फ इतना है कि यहाँ उनका पसंदीदा हीरो भेड़िया दिखाया गया है इसलिए उसके जो शुरू के 8 पेज हैं...वो अच्छे बने हैं! अच्छे से मतलब बहुत अच्छे भी नहीं लेकिन पुराने भेड़िया जैसे बना दिए हैं! इंकिंग नहीं है इसलिए परफेक्ट नहीं हैं! कवर बहुत शानदार बना है! उसपर कलरिंग अच्छी है! भेड़िया का एंट्री वाला फुल पेज बढ़िया है! शक्ति जब Backpose में एंट्री करती है...वो पेज भी अच्छा है! पेज 10 से वापस परमाणु-ध्रुव आ जाते हैं तो काम ढुलक जाता है! मतलब आप परमाणु की पीली ड्रेस पर देखिये...कितने काले रंग से पेंसिल मार्क्स मारे गए हैं..कि लगता है कि ड्रेस ही चिर्र्र्रर्र्र होकर कटी-फटी है! चलिए भेड़िया तो आधा नंगा घूमता है...और बालों से उसपर फर्क नहीं पड़ता..लेकिन ध्रुव और परमाणु पर ऐसे स्ट्रोक्स बहुत बुरे लगते हैं! अंत में पेज 22-25 के 4 पेज में डोगा(जिसको धीरज जी ने कभी अच्छा नहीं बनाया) और स्टील के चेहरे दिखाकर कहानी अल्पविराम हो जाती है! भक्त रंजन जी ने थोड़ी कोशिश करी है..रंगों से आर्ट में जान डालने की...खासकर सूर्य और उल्काओं वाले सीन! ओवरआल आर्टवर्क एवरेज है!

एक चीज़ और कि इस बार कॉमिक्स में पेनल संख्या और कम हो गई है...पिछले भाग में जहाँ 87 पेनल थे..इस भाग में सिर्फ 65 रह गए हैं! 25 में से 4 फुल पेज और कई 2 पेनल पेज इसका कारण रहे हैं! कुल मिलाकर एक छोटी कहानी जो पढने में 12-15 मिनट लेती है!

टिप्पणी- अब आपके पास इस कहानी के 50 पन्ने हो चुके हैं! कहानी में अभी प्रस्तावना ही चल रही है! इधर के इंसान दूसरे ग्रहों पर और वहां के एलियन धरती पर आ गए हैं! इतनी सी बात बताने के लिए 2 जनरल कॉमिक्स निकाल दी गई! अब वक़्त है कि लेखक कहानी को रफ़्तार दें! आगे के 25 पन्नो का इंतज़ार करिए जिसमे डोगा और स्टील मारधाड़ करते दिखेंगे!

Ratings :
Story...★★★☆☆☆☆☆☆☆
Art......★★★★★☆☆☆☆☆
Entertainment……★★★★☆☆☆☆☆☆

#Dheerajverma,#Nitinmishra,#Parkalokidharti,#Rajcomics,#scd,#parmanu,#Doga,
#Steel,#Shakti


Friday, 3 July 2015

SARVMANTHAN



Review- सर्व मंथन (2015)
94 Pages/260 Panels (Avg. 3 Panels per page).
Genre-Comedy,Ac
tion
Main character(s)- कालदूत,महारावण,शुक्राल,तिरंगा,अडिग,युगम!
सर्व मंथन इस सर्वनायक श्रृंखला का पांचवा खंड और इस पूरी विस्तृत श्रृंखला का सांतवा पड़ाव है!

Short Synopsis-

>प्रस्तावना भाग 1- प्रकृति की पुत्री (पेज 3-11)
धनञ्जय और प्रलयंका एक खोज पर निकले हैं!

>प्रस्तावना भाग 2- अधर्म के देवता (पेज 12-14)
एक गुफा जिसमे एक देवी और कोट वाले 3 देवता..मसीहा जी को Green Hulk बना दिए हैं!

>प्रस्तावना 3 -स्तंभित काल (पेज 15-23)
सभी आयामों के केंद्र में एक आयाम है..जहाँ महारावण और कालदूत की भिडंत हो रही है!

>प्रथम अध्याय आरम्भ- प्रलय से पूर्व भाग 2 (पेज 24-31)
यहाँ नागपाशा और गैंग के साथ नागराज और ध्रुव बुगाकू से भिड़े हुए हैं!

>द्वितीय अध्याय आरम्भ-शुक्रहारा का अंतिम वंशज (पेज 32-43)
इस भाग में शुक्राल के खानदान को दिखाया गया है!

>तृतीय अध्याय आरम्भ-प्रथम विजय (पेज 44-50)
महारावण भागकर एक नए आयाम में पहुँच जाता है...जहाँ योध्दा उसको पकड़ लेता है! दूसरी तरफ महात्मा कालदूत कॉमिक इतिहास की अपनी इस प्रथम विजय पर प्रफुल्लित हैं..और इसकी ख़ुशी में सागर-मंथन करने की घोषणा कर देते हैं!

>चतुर्थ अध्याय आरम्भ- पुराने जख्म (पेज 51-63)
इस भाग में तिरंगा की उम्र के 16-18 साल के बीच के 2 सालो को दिखाया गया है...कि उसने तिरंगा बनने से पहले तब क्या-क्या गुले-गुलशन किये थे!

>पंचम अध्याय आरम्भ- रक्त स्नान (पेज 64-70)
बोर्डेलो और एंथोनी भिड़े हुए हैं...ड्राकुला ने बेबी को वैम्पायर बना दिया है..अध्याय खत्म!

>षष्ठम अध्याय आरम्भ- समुद्र मंथन (पेज 71-79)
इस भाग में सभी विलेन और विस्तृत ब्रह्माण्ड रक्षक मंथन शुरू कर चुके हैं!

>सप्तम अध्याय आरम्भ- शत्रु शक्ति (पेज 80-95)
युगम क्षेत्र में आखिरकार मिथ्याकार वाला हिस्सा खत्म होता है!

>परिशिष्ट (पेज 96)
मिथ्याकार जो कि ***** का शिल्पी था..उसकी मौत से ***** की इमारतों को पोलियो हो चुका है...खड्खडाती हुईं अगले भाग में गिर जायेंगी!

पंचम खंड समाप्त

Positive Facts-

1- RC ने पेज-4 पर बताया है कि "Nature's Daughter" को परमाणु ने रक्तबीज में खोजा था! यानी यह सीरीज वर्तमान पृथ्वी/आयाम की ही है! फलस्वरूप parallel सीरीज का झगडा ही ख़त्म हो गया! यह बहुत बड़ी राहत की बात है!

2-आप अगर कालदूत से महारावण को आपस में हँसते हंसाते मजाकिया लहजे में लड़ते देखना पसंद है..तो आपको निराशा नहीं होगी! बहुत ही हल्की –फुल्की तरह से बिना किसी “बड़े” खून-खराबे के एक उत्तम लड़ाई दिखाई गई है...छोटे-छोटे बच्चों को कॉमिक्स पढ़ते हुए जो अति हिंसात्मक चित्र देखकर डर लग जाता था और वो अपनी माओं के आँचल में छुप जाते थे...इस अध्याय में ऐसी कोई शिकायत नहीं दिखती! फिर भी इसको हमेशा कालदूत और महारावण के बीच का खूनी महासंग्राम कहकर प्रचारित किया जाता रहेगा! यही अच्छे लेखन की खास पहचान है!

3-कुछ पुराने चावलों -बुगाकू,फुन्कारु,जगोता को दोबारा से ध्रुव और नागराज से भिड़ते देखकर आनंद लें! यह पूछना व्यर्थ है कि हारे हुए खिलाड़ी पर दांव लगाना कितनी अक्लमंदी है! मनोरंजक पल हैं यह!

4-आपको ऐसी लम्बी-लम्बी लड़ाइयाँ पसंद हो जिनका कोई फैसला ही नहीं होता...या तो खिलाड़ी फैसला होने से पहले ही मैदान छोड़ देते हैं...या हाथ उठाकर खड़े हो जाते हैं..तो यह सीरीज आपके जैसे हिंसा विरोधी और फिक्सिंग समर्थक पाठकों के लिए ही लिखी जा रही है! इस सीरीज को अवश्य खरीदें!

5-यदि आप तिरंगा प्रेमी हैं और उसजैसे देशभक्त हीरो का खूनी रूप देखना पसंद है.. तो यह कॉमिक्स आपको खुश कर देगी! पूरी तरह से डोगा स्टाइल का अध्याय नए तिरंगा प्रेमियों को पसंद आ भी सकता है और हार्डकोर पुराने पाठको को नहीं भी! Your Choice! जो आदमी खून और हिंसा से परहेज़ करता दिखाया गया हो..वही कसाई के रूप में दिख जाए...मज़ा आ जाता है! इस भाग को हमेशा याद किया जाएगा!

6-वैदिक काल के गुरुकुलो में पढ़े भारतीय राजाओं को अरबी/फ़ारसी बोलते देखना चाहें तो इससे बढ़कर भाषाई आविष्कार दुनिया में किसी और जगह नहीं मिलेगा! ऐसी क्रान्ति इसी सीरीज में देखी जा सकती है! RC को बधाई!

7-आयामों को कैसे चुटकी बजाकर खोला जाता है..यह सीखना चाहें तो इस कॉमिक्स को जरूर पढ़ें,शायद RC के पाठकों में से कोई आगे चलकर महान वैज्ञानिक बन सके!

इस जबरदस्त कॉमिक्स को हमारी तरफ से 100/10...आनंद की बात है कि कहानी में एक भी त्रुटी खोजने से नहीं मिली....आर्टवर्क की सुन्दरता को देखकर तो DC /Marvel वाले भी दोयम दर्जे के लगने लगे हैं! हमारा मन बहुत प्रफुल्लित है! कुल मिलाकर सर्व मंथन बहुत ही जबरदस्त कॉमिक्स है! ऐसी कॉमिक्स कालजयी रचना से कम नहीं है! इसको ना खरीदा तो आपने कॉमिक जीवन में बहुत बड़ी चूक कर दी! आपने हाथ जोड़कर विनती है कि इस कॉमिक्स को RC Online Store से बिना discount लिए खरीदें और आनंद के सागर में मनोरंजन का मंथन करें!

END OF PART-1
विशेष-जो पाठक हमेशा छोटे-छोटे Positive Review की डिमांड करते हैं...उनके लिए हमारी समीक्षा यहीं पर समाप्त होती है! पढने के लिए बहुत-बहुत शुक्रिया! अब आप यह पोस्ट पढना समाप्त करके किसी अन्य Positive पोस्ट पर प्रस्थान करिए!
सर्वनायक श्रृंखला के लिए हमने रिव्यु को 2 भागों में बाँट दिया है! ऊपर का भाग उन पाठको के लिए था जो 100% Positive और छोटे रिव्यु पसंद करते हैं और अब आगे इस पोस्ट को नहीं पढेंगे! wink emoticon आगे का भाग उन पाठको के लिए जो 50-50 Positive/Negative और बिना लम्बाई की चिंता के समीक्षा पढ़ते हैं!
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PART 2 STARTS-

दोस्तों,कॉमिक्स में हमें हर कोने के बारे में जो कहना होता है वो कहना जरूरी है....सबको कहानी को देखने/सोचने/परखने का अलग तरीका होता है....ऊपर तक पढ़कर आप लोगों ने सर्व मंथन की एक हल्की सी रूपरेखा समझ ली है! आगे रिव्यु अपनी ज़िम्मेदारी पर तभी पढ़ें जब आपको SPOILERS के साथ-साथ Length से परेशानी ना हो!

Suitable Suspect Facts-
1-कहानी को शुरू हुए 5 पार्ट्स बीत चुके हैं...कई लम्बी लड़ाइयाँ लड़ी जा चुकी हैं...लेकिन Probot अभी तक यही गा रहा है कि गर्भ गृह सिर्फ 2 दिन यानी 48 घंटे तक ही विश्व आबादी को संभाल सकता है! भाई..पृथ्वी के ऊपर तो समय अपनी नार्मल स्पीड से ही चल रहा है.....48 घंटे तो तब थे जब पाषाण राक्षस धरती पर पहली बार गिरे थे...उससे पहले का एक दिन सभी को गर्भ ग्रह में डालने में लग गया था.....अब तक इतने में आधा समय बीत जाना चाहिए था! मगर Probot शायद कहानी के अंत तक 2 दिन/48 घंटे ही बताता रहेगा! Numeric Table में 48 से पहले भी संख्याएँ होती हैं! कहानी को उल्टी गिनती पर कब लाया जाएगा?

B- पिछले भाग सर्व संग्राम के पेज 45 पर मैडम फॉक्स के बारे में बताया गया था कि उसने "कुछ महीने" पहले मुंबई पर अटैक किया था (अंगारे)....लेकिन इस भाग में प्रोबोट कहता है कि परमाणु को कुछ वर्षो पहले Nature's Daughter का पता चला था जब रक्तबीज कॉमिक्स के बाद वो वापस लौट रहा था! लेखक जी पहले बता चुके हैं कि रक्तबीज और अंगारे "Back to Back " stories थी...एक के बाद दूसरी तुरंत घटित हुई थी...तो फिर आप एक ही कहानी में महीनों और सालों का अलग-अलग Time Difference क्यूँ दिखा रहे हैं??

2- मसीहा इस कहानी में क्यूँ है अभी तक नहीं पता चला! उसके पुरानी कहानियों के अनुसार वो पागलखाने में था....तो अब उसके पास दंड से लेकर परग्रहियों तक से डील बनाने के बीच का हिस्सा क्यूँ गायब है? RC मसीहा पर ज्यादा ध्यान दे और कृपया जिन जगहों पर लोगों को भेजते हैं...उस जगह का नाम भी लिख दिया करें! अगर सर्वशक्तिमान वाले डोरिस,चीफ दिखाने ही थे तो बता भी दिया होता कि यह कौन सी कॉमिक्स में पहले आये हैं...और अभी कहाँ बैठे हैं!

3- पेज-15 पर कालदूत का पहला संवाद देखिये...कि कालदूत के तीनो रूपों का जो फेविकोल का मजबूत जोड़ है..उसको कोई पाप शक्ति अलग नहीं कर सकती! RC और बुढ्ढा दोनों भूल गए कि प्रलय में उसकी धुनाई करते हुए विषाला ने उसके तीनो बंजारे शरीरो को अलग कर दिया था....तब क्या विषाला पाप शक्ति नहीं थी?

4- RC ने अब तक यह भी नहीं दिखाया गया कि इतिहास ने कलंका के सभी मरे हुए लोगों को आखिर जिंदा करके क्या कहा.. और कैसे उनको आयामों में भेज दिया?....आपने कलंका में इतिहास को घुसते हुए दिखाया था..लेकिन उसको अधूरा छोड़ कर आगे बढ़ गए.........RC इसको विस्तार से आगे वर्णन करना चाहें तो कृपया जरूर करें!

5-शुक्रहारा जाति का अस्तित्व जिस समय काल में दिखाया गया है वो युगों पुराना है....लेकिन उसमे मौजूद राजा-महाराजों की भाषा पर गौर करें तो वो सभी अरबी/फ़ारसी इस्तेमाल कर रहे हैं...जिसका उस वक़्त नामो-निशान भी मौजूद नहीं था! शुक्रसाल वाले पन्नो में देखिये शैतान,निस्तानाबूद,यलगार,बददुआएं,औलाद,मुकद्दर,कमबख्त जैसे शब्द इस्तेमाल किया जाना भारी चूक को दर्शाता है! आधुनिक युग के हीरो पौराणिक संवाद बोल रहे हैं...और पुराने ज़माने वाले आधुनिक बन गए हैं...सब गड़बड़झाला मचा हुआ है! RC इस त्रुटी पर आगे ध्यान दे,क्यूंकि यह point कई कॉमिक fans द्वारा पहले भी उठाया जा चुका है! आपके लिए भाषाई विविधता का महत्व होना जरूरी है!

6-पाषण राक्षसों ने हर युग में आक्रमण किया था...लेकिन अब तक 450 पन्नो के बाद भी तीनो युगों में किस प्रजाति को कितना नुक्सान पहुंचा है...एक जगह भी नहीं दिखाया गया! वर्तमान,भूत और भविष्य में क्या हो रहा है...कुछ नहीं पता चल पा रहा! कहानी का बैलेंस तीनो कालों में बनाइये!

7-RC के हिसाब से सतयुग के देवताओं और दानवो के साथ कलयुग के मानवो की तुलना करने में कोई अंतर है या नहीं? हास्य स्तिथि में समुद्र मंथन देखिये कैसे हो रहा है....50 फुट के अडिग पर कालदूत ने कुंडली मार दी है...और दोनों तरफ से 8-10 सूरमा (महिलाओं सहित) समुद्र को बिलो रहे हैं! इन्हें कौन बताएगा कि असल समुद्र मंथन में "मद्राचल पर्वत" के नीचे आधार बनकर स्वयं विष्णु जी 1 लाख योजन चौड़ी पीठ वाले कच्छप के रूप में आये थे.......कोई भी मंथनी बिना किसी आधार के मंथन करे ऐसा मुमकिन नहीं है....50 फुट के अडिग में से सिर्फ उसकी 25 फुट की टांगें ही पानी की सतह पर चक्करघिन्नी बनी रहेंगी...ऐसे मंथन पानी में जाल डालकर दुनिया भर के मछुआरे रोज करते हैं और इससे कोई महाशक्ति तो क्या...व्हेल मछली और ऑक्टोपस भी ऊपर नहीं आने वाला था...लेकिन क्यूंकि यह महारचना बन रही है इसलिए...कुछ बड़ा वाला मालपानी ऊपर आते दिखाया जरूर जाएगा जबकि कॉमिक्स में अडिग के नीचे भी किसी आधार का होना जरूरी है! लेकिन ऐसा नहीं हुआ जो भारी चूक है! यह बात तो बांकेलाल की बेसिर पैर कॉमेडी कॉमिक्स जैसी लग रही है!
पाठको को एक और चीज़ याद दिला दें....शेषनाग नाम की एक कॉमिक्स आई थी जिसमे शेषनाग का कालदूत से अच्छा याराना दिखाया गया था....लेकिन जब समुद्र मंथन करने की बात आई तो कालदूत शेषनाग को बुलाने की जगह खुद ही रस्सी बन जाते हैं....RC जब हर किसी को ठूंस ही रही है...तो शेषनाग के साथ यह परायापन क्यूँ? और कमाल की बात यह है कि पृथ्वी का संतुलन बनाए रखने वाले हमारे शेषनाग इस पूरी कहानी में कहीं भी नज़र नहीं आ रहे हैं...जबकि गर्भ गृह बिना उनकी जानकारी में आये बन ही नहीं सकता था!

8-दूसरी तरफ इतने सारे गैर-पराशक्ति युक्त मानव हिन्द महासागर के बीच गहरे पानी में सतह के 3 फीट पर कैसे संतुलन बनाकर मंथन कर रहे हैं...इसको कैसे क्रियान्वित किया गया? जिस प्रसंग पर कहानी को विस्तार की जरूरत पड़ती है..वहां जल्दबाजी में निपटा दिया गया है!

9- सर्वनायक की अब तक आ चुकी कॉमिक्स में एकमात्र चीज़ जो दिखाई दे रही है वो यह है कि कहानी अपनी जगह से आगे बढ़ना ही नहीं चाहती! आपने अब तक एक भी पूरा अध्याय नहीं देखा है! हर छोटी-छोटी लड़ाई में सिर्फ एक्शन scene थोड़े और आगे बढ़ा दिए जाते हैं...लेकिन असल कहानी आगे नहीं जाती...Example लीजिये...इरी की गुफा में चल रही लड़ाई का...जो सिर्फ चल रही है...कभी कोई कभी कोई आ रहा है...लेकिन उसका समय और महत्व बताया ही नहीं जा रहा! 4 लात-घूंसे आपने पहले खंड में देखे...4 इस खंड में और 4 आगे देख लेंगे....लेकिन कहानी वहीँ पर रुकी है! ऐसे ही ध्रुव-नागराज वाला देखिये..मसीहा वाला देखिये! पिछले भागो वाला भविष्य का हिस्सा देखिये...और वो हिस्से भी देखिये जो अब याद भी नहीं आ रहे!

10-मौत का मैराथन इसलिए बरबाद रही..क्यूंकि उसमे सर्वनायक के इन छूटे हुए हिस्सों को कवर करना था..मगर वहां तो एक नई कहानी चल पड़ी है...कि WAR formation के लिए 40-50 साल के बुड्ढे भागा- दौड़ी करके खुद को काबिल छांटने में लगे हैं!

11-आयामों का प्रसंग-
आयामों के बारे में हम लोग फुंकार,हेड्रोन और नागायण में इतना पढ़ चुके हैं..कि अब यह कांसेप्ट बेगाना नहीं लगता है....लेकिन सर्व नायक में यह कांसेप्ट भी अजीबोगरीब तरह से चल रहा है! अनुपम जी ने आज तक आयाम के बारे में यही दिखाया है कि कोई भी आयाम खोलना बड़ी जटिल समस्या होती है...उसके लिए सही और योजनाबद्ध तरीको की जरूरत पड़ती है! हर आयाम ऐसा नहीं है कि जहाँ मर्ज़ी चाहे वहीँ से खुल जाता है...ऐसा तो है नहीं...कोई आदमी अपनी खटिया पर लेटा हो..और उसके नीचे आयाम द्वार खोल डालें...उसके कुछ स्पेशल पॉइंट्स होते हैं..जिन्हें पहले पता किया जाता है! नागायण देखिये...कैसे ध्रुव और नागराज को एक-एक आयाम पार करने में कितनी मशक्क़त करनी पड़ी थी....हेड्रोन देखिये...Collider जैसी महा शक्तिशाली मशीन लगी थी! कोई भी आयाम द्वार हमेशा खुला नहीं रहता है...जब तक उसको खोलने वाली शक्ति बनी रहती है..द्वार नज़र आता है..वरना बंद!
अब सर्वनायक देखिये..."आयाम द्वार" कैसे खुल रहे हैं...
@द्वापर युग के महारावण को आयामों की जानकारी का होना ही पहले आश्चर्यचकित कर देता है... मरने के बाद जिंदा होने तक उसके पास इतनी शक्तियां हैं...कि वो आयामों की ख़ाक ऐसे छान रहा है...जैसे अपने महलों में एक कमरे से दूजे कमरे में भाग रहा हो!
ऐसा आयाम जो सभी कालों और आयामों का केंद्र है....एक बात बताइये...जब ऐसी कोई स्तंभित जगह होगी भी...तो वहां तो लाखो-करोडो आयाम/समय द्वार जुड़े हुए दिखने चाहिए....यह बात तो सामरी ही कहता हुआ दिखाया गया है....लेकिन आर्टवर्क में RC ने सिर्फ 2 ही आयाम द्वार दिखाए है...बाकी क्यूँ नहीं? क्यूंकि कलियुग में सिर्फ एक आयाम नहीं हो सकता..कलियुग एक पूरा काल है...और इस काल के अनगिनत आयाम हैं! जैसा की हम लोगों ने HEDRON सीरीज में देखा भी था....ऐसे अनगिनत आयामों में अनगिनत ऐसे आयाम भी होंगे जो बिल्कुल निर्जन होते हैं...महारावण को योध्दा वाले आयाम में 1 सेकंड में फेंक देना एक loophole है! लिखा गया है कि उसको भेजा आयाम में है...लेकिन दिख वो किसी अन्य समयधारा में रहा है जहाँ योध्दा मौजूद है! या तो RC को आयामद्वार की जगह उसी काल का अलग “समयद्वार” लिखना चाहिए था...आप लोग आयामद्वार,समय द्वार के साथ कालद्वार भी सब एक ही नाम से पुकार रहे हैं! इसको सही करने की जरूरत है!
@आयामों के द्वार भी हमेशा खुले दिखाए जा रहे हैं..जिनका Diameter कुछ 2-3 meter की खिड़की जैसा होता है...उनके सामने कालदूत किसी फुटबॉल पोस्ट के गोलची की तरह खड़ा है! इसके बाद गौर फरमाइए.... महारावण की हालत इतनी खराब है कि वो लड़ाई तक लड़ने लायक नहीं है...लेकिन इस खस्ता हालत में भी एक नया आयाम खोलकर उसके पार ऐसे भाग जाता है कि मिल्खा सिंह भी शरमा जाये!! क्या बात है!
दूसरी तरफ गुरुदेव भी ऐसा ही कुछ काम कर रहे हैं...2 सुपर हीरो और 10 विलेन की लड़ाई से उत्पन्न उस ऊर्जा को बीकर में भरकर अपने अड्डे पर ही आयाम खोलकर दिखा देते हैं! और आयाम के दूसरी तरफ क्या है? त्रिफना...Wow...गुरुदेव को पहले से पता था...कि यहाँ पर आयाम द्वारा खोलूँगा...तो इसके 4 हाथ पार त्रिफना उडती मिलेगी....कमाल तो इससे भी आगे है कि त्रिफना तो नागराज या फिर कालदूत में से किसी एक के पास थी...वो भी इसी असली आयाम में...तो आखिर अपने ही आयाम में जाने के लिए गुरुदेव आयामद्वार कैसे बना रहा है?....यह कहानी तो इसी पृथ्वी की है ना....और वो भी सिर्फ इतनी ऊर्जा से जिससे किसी शहर की एक दिन की बिजली भी ना जल पाए! यह तालियाँ बजाने लायक काम था...नोबेल प्राइज पर गुरुदेव का दावा पक्का है!
सर्वमंथन पढने के बाद ही पाठको को पता चलता है कि इस दुनिया ने सबसे आसान काम अगर कोई है तो वो "आयाम" खोलना ही होता है!

12- यह देखना बिल्कुल अच्छा नहीं लगा कि तिलिस्म्देव के बाद एकाएक तिरंगा भी अधूरी लड़ाई छोड़ गया है....और आगे शायद सर्व संधि में देवता और असुर दोस्ती करने वाले हैं....यह पूरी प्रतियोगिता ही एकाएक गप्प सी बनती जा रही है....आप पहले 5 Steps की लड़ाई रखते हैं और आधे में ही एक को Quit करवा देते हैं....RC ने पहले इतनी बड़ी Hype बनाई गई कि Hero vs Hero होगा...लोगों को शानदार कुश्ती देखने को मिलेगी...जिसमे कोई एक जीतेगा और दूसरा हारेगा....लेकिन अब सभी पीठ दिखाकर भाग रहे हैं! क्या हीरो और क्या Side Characters....अब तक एक परमाणु और प्रचंडा के अलावा कोई लड़ाई तठस्त रूप से नहीं दिखाई गई है! क्या यह पलटी मारना नहीं कहलायेगा? आगे डोगा vs योध्दा में भी कोई जीतेगा या यही Quit दिखने वाला है?

13-मानवीय पहलुओं को मज़रंदाज़ करना-
हर कहानी के पीछे एक वज़ह होती है...लेकिन सर्वनायक जिस वज़ह से लड़ी जा रही है...उसके पीछे वर्तमान, भूतकाल और भविष्य काल के कम से कम 10-15 अरब लोगों के कष्टों को भी दर्शाना चाहिए था...पूरी कॉमिक्स सिर्फ लम्बी लड़ाइयाँ दिखाने तक सीमित है....गर्भ गृह में संसार भर के अलग संस्कृति के लोग आपस में कैसे जूझ रहे हैं,डर और अवसाद के माहौल में बूढ़े बच्चे और महिलाएं कैसे गुजर रहे हैं...क्या यह सब दिखाना जरूरी नहीं हैं? लेकिन कहानी का मानवीय पक्ष गायब है! किसी श्रृंखला को चाहे जितना विस्तृत बना लीजिये....अगर उनके content में पूर्णता नहीं लायेंगे तो उसका कुछ नहीं हो सकता! हम लोग अनेको ऐसे विषय पढ़ते/देखते आ रहे हैं जिनमे विश्व सभ्यता पर खतरा आता है...लेकिन उन सभी में एक बात common होती है.- ज़िन्दगी के बचने के आशा...आम लोगों की कहानी में मौजूदगी...जो सर्वनायक में तीन काल और 4 युगों तक कहानी फैलाने के बाद भी पूरी तरह से नदारद है!

14- प्रलय से पूर्व वाले भाग में जितने 15-20 विलेन हैं...सबके सब कहीं ना कहीं या तो बंद थे...या धरती से ही गायब हो चुके थे...आपने उन सभी को बिना किसी बैकग्राउंड story के एक साथ लाकर खड़ा कर दिया है....सबसे बड़ा loophole पूरी कहानी में यही है....शाकूरा,विषंधर,वामन,ध्वनिराज,चुम्बा वगैरह सभी अलग timelines पर 2-3 जगह दिख रहे हैं.....यह कहानी तो आपने इतनी लम्बी खींच दी है कि इस ट्रैक की वापसी में ही 2 ग्रन्थ दिखाने जरूरी हैं!
आपने बताया था कि विसर्पी इसलिए भाग रही थी..क्यूंकि नागद्वीप पर कोई मुसीबत आई थी...लेकिन आपने वो मुसीबत नहीं दिखाई...आपने सर्व संग्राम में "सपेरा" को दिखाया था...मगर क्या सिर्फ बीन बजाने तक ही सीमित था वो?...इस भाग में तो विसर्पी और सपेरा किसी काम के थे नहीं! और एक बड़ा loophole यह है कि इस भाग में सपेरा बीन भी बजाता रहा...और नागराज उसकी बीन पर नाचता हुआ भी सबसे खूब अच्छी तरह से लड़ता रहा! RC वालों ने इस पूरी कॉमिक्स को सिर्फ COMEDY बनाकर रख दिया है! Action सीन में भी पाठक ठहाके लगाते नज़र आयेंगे! यह थी इस कहानी की मजबूतियों की असलियत को बयान करती हकीकत!

संवाद- जिस किरदार को देखें...उसकी कोई पुरानी कॉमिक्स उठाइए...आधे से ज्यादा संवाद कहीं ना कहीं से मिलते-जुलते होंगे...क्यूंकि सारे एक्शन सीन repeated हैं....जो कुछ नया लिखा गया है...सभी में हंसी-मजाक चलता है! आपको पता नहीं चलेगा कि सीरियस कहानी चल रही है या हास्य! आपके दिमाग का एक हिस्सा कहेगा...यार तीन काल और 4 युग वाली कहानी में कोई कैसे हँस सकता है पर.....

आर्टवर्क-
सुशांत पंडा जी का काम ठीक ठाक है.. लेकिन इस भाग में आर्ट सर्व संग्राम और सर्व संहार जैसा नज़र नहीं आ रहा है...और ना कलर! सर्व मंथन में आपको आर्ट में कहीं भी एकरूपता नहीं दिखेगी..इसकी वज़ह 4 अलग inkers का होना लगता है....विनोद कुमार और ईश्वर आर्ट्स का काम बेहतर है...जितने पन्ने अच्छे बने हैं उन्ही दोनों के हैं....लेकिन नए Inkers को सर्वनायक पर काम दिया जाना बहुत गलत फैसला साबित हुआ है..जो आर्टवर्क बर्बाद कर देता है!
पेज 3-14 अच्छे हैं! महारावण और कालदूत वाले पन्ने average हैं! पेज 25-33 तक पेज बहुत खराब इंकिंग हुई है...झेलने पड़े! 34-36 ठीक ठाक हैं! 37-43 तो वीभत्स आर्ट हैं...बच्चे जैसा काम! पेज 45 ठीक है...लेकिन 46 -58 तक सिर्फ खानापूर्ति हुई है....59-60 ठीक है...लेकिन 61-67 तक वापस इंकिंग का बंटाधार है! 68-69 ठीक है...70 बेकार....71 ठीक है...लेकिन 72 -90 वापस भयानक इंकिंग हुई है! 91-96 तक वापस आर्ट डूब जाता है!

RC अगर सुन रही है..तो कृपया 90 वाली कॉमिक को 100-110 रुपये कर दीजिये....लेकिन पूरी कॉमिक्स में विनोद कुमार जी से इंकिंग कराइए! नए आर्टिस्ट्स से सुशांत जी की आर्ट का भाजी-पाला मत करवाएं! उन आर्टिस्ट को विनोद जी से tution लेने भेज दीजिये! और इस सीरीज के 2 साल बाद आने वाले हिस्सों पर try करिए!
1- सर्वदमन में प्रलयंका ने जो पोशाक पहनी थी और धनंजय के साथ चली गई थी...इस कॉमिक्स में उसकी पोशाक को बदल डाला गया है....सुशांत जी आपने ऐसा क्यूँ किया?...धीरज जी ने प्रलयंका का जो makeover किया था...आपको उसी को आगे बढ़ाना चाहिए...आप तो 1990 वाली पुरानी प्रलयंका बना दिए....RC आगे से कृपया उसकी पोशाक को बदल कर धीरज जी वाले स्टाइल में बनाइये!
2-नागाधीश कॉमिक्स के हिसाब से नागराज के शरीर पर जो हरे रंग की सर्पो वाली खाल है...वो भी उसकी सर्पशक्ति का ही एक हिस्सा है...लेकिन सर्व मंथन में जब भोकाल प्रतिरूप के साथ नागराज प्रतिरूप की सभी शक्तियां आपस में बदल जाती हैं...तब होना यह चाहिए था कि नागराज की हरे रंग की खाल भी भोकाल के पास पहुँच जाती! और नागराज खुद साधारण इंसानी खाल वाले रूप में आ जाता! हमें यह एक वाजिब चीज़ नहीं लगी!

colorists का काम average है...बहुत ज्यादा effects नहीं मिलेंगे! अन्य आर्टिस्ट्स द्वारा बीच-बीच में जो पेज बनाये गए हैं...वही कुछ आँखों को ठंडक दे पाए हैं! सौंदर्य प्रेमी पाठको के लिए सुशांत जी ने प्रथम अध्याय में कुछ देखने लायक पन्ने बनाये हैं!
पूरी कॉमिक्स में एक ही दर्शनीय scene है....योध्दा द्वारा महारावण को Headlock देना! जिसको हेमंत कुमार जी ने बनाया है!

टिप्पणी-
करीब डेढ़-2 साल का लम्बा वक़्त और सीरीज कटी पतंग की तरह हो चुकी है! हमारे यही विचार थे कि सर्वनायक चाहे जैसी भी चल रही हो...लेकिन इसको कम से कम "मौत का मैराथन" के आने तक का मौका मिलना चाहिए...क्यूंकि RC ऐसा ही मानती है कि खुद की सोच और कहानी को समझाने के लिए उनके पास मौके बेहिसाब होने चाहिए! बेहिसाब मौके, बेहिसाब ग्रंथो के बेहिसाब पन्नो के साथ मुद्रा भी लाते हैं! इस चीज़ पर सोचना बेफिजूल है कि 2 लातें बारह घूंसों की लड़ाई 4 पन्नो में देखना सही है...या 40 पन्नो में! आप एक ही single आईडिया पर 5 साल काम करते जाएँ...लोग चाहें पसंद करें या ना करें...बेशक करिए लेकिन इस आईडिया को कम से कम मजबूती से पेश करें...ना कि सिर्फ इसलिए क्यूंकि आपके अनुसार महा सीरीज सिर्फ तभी बन सकती हैं जब उनमे कुम्भ के मेले जैसी भीड़ जुटाई जायेगी! अब यह आपको सोचना है कि करीने से सजे फूलों के बाग़ को देखने में अधिक आनंद है...या कैक्टस के काँटों के जंगल को! (RC यह कैक्टस सिर्फ उदाहरण था...कहीं इसकी आड़ में परमाणु के दुश्मन कैक्टस को भी मत घुसा देना कहानी में..कहानी वैसे ही कम कांटेदार नहीं है) wink emoticon
“हमेशा अच्छा ही होगा” वाली सोच में डूबे रहने वाले पाठक अपनी विचारधारा रचनात्मक और जिज्ञासु बनाइये! यह हिन्दुस्तान है जनाब....यहाँ विचारों को रखने पर Censorship नहीं होती है!
RC से एक बात हम कहना चाहेंगे कि आपका अति विश्वास कहानी के लिए घातक बनता जा रहा है...अब भी समय है ....सर्वनायक पर अन्य सीनियर writers का भी सहयोग लिया जाए....जैसा कि युगांधर में तरुण कुमार वाही जी थे...और वो अब तक इस सीरीज का सबसे मजबूत आधार था......क्यूंकि इस अजीबोगारीब सी कथा के अंत में अगर किसी जगह पर एक भी किस्सा गायब रहा...तो ऐसा अधूरा खेल दोबारा शायद ही कोई खेलना चाहे!

अल्लाह हाफ़िज़!!!

Ratings :
Story...★★★☆☆☆☆☆☆☆
Art......★★★★★★☆☆☆☆
Entertainment……★★★★☆☆☆☆☆☆

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