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Friday, 3 July 2015

SARVMANTHAN



Review- सर्व मंथन (2015)
94 Pages/260 Panels (Avg. 3 Panels per page).
Genre-Comedy,Ac
tion
Main character(s)- कालदूत,महारावण,शुक्राल,तिरंगा,अडिग,युगम!
सर्व मंथन इस सर्वनायक श्रृंखला का पांचवा खंड और इस पूरी विस्तृत श्रृंखला का सांतवा पड़ाव है!

Short Synopsis-

>प्रस्तावना भाग 1- प्रकृति की पुत्री (पेज 3-11)
धनञ्जय और प्रलयंका एक खोज पर निकले हैं!

>प्रस्तावना भाग 2- अधर्म के देवता (पेज 12-14)
एक गुफा जिसमे एक देवी और कोट वाले 3 देवता..मसीहा जी को Green Hulk बना दिए हैं!

>प्रस्तावना 3 -स्तंभित काल (पेज 15-23)
सभी आयामों के केंद्र में एक आयाम है..जहाँ महारावण और कालदूत की भिडंत हो रही है!

>प्रथम अध्याय आरम्भ- प्रलय से पूर्व भाग 2 (पेज 24-31)
यहाँ नागपाशा और गैंग के साथ नागराज और ध्रुव बुगाकू से भिड़े हुए हैं!

>द्वितीय अध्याय आरम्भ-शुक्रहारा का अंतिम वंशज (पेज 32-43)
इस भाग में शुक्राल के खानदान को दिखाया गया है!

>तृतीय अध्याय आरम्भ-प्रथम विजय (पेज 44-50)
महारावण भागकर एक नए आयाम में पहुँच जाता है...जहाँ योध्दा उसको पकड़ लेता है! दूसरी तरफ महात्मा कालदूत कॉमिक इतिहास की अपनी इस प्रथम विजय पर प्रफुल्लित हैं..और इसकी ख़ुशी में सागर-मंथन करने की घोषणा कर देते हैं!

>चतुर्थ अध्याय आरम्भ- पुराने जख्म (पेज 51-63)
इस भाग में तिरंगा की उम्र के 16-18 साल के बीच के 2 सालो को दिखाया गया है...कि उसने तिरंगा बनने से पहले तब क्या-क्या गुले-गुलशन किये थे!

>पंचम अध्याय आरम्भ- रक्त स्नान (पेज 64-70)
बोर्डेलो और एंथोनी भिड़े हुए हैं...ड्राकुला ने बेबी को वैम्पायर बना दिया है..अध्याय खत्म!

>षष्ठम अध्याय आरम्भ- समुद्र मंथन (पेज 71-79)
इस भाग में सभी विलेन और विस्तृत ब्रह्माण्ड रक्षक मंथन शुरू कर चुके हैं!

>सप्तम अध्याय आरम्भ- शत्रु शक्ति (पेज 80-95)
युगम क्षेत्र में आखिरकार मिथ्याकार वाला हिस्सा खत्म होता है!

>परिशिष्ट (पेज 96)
मिथ्याकार जो कि ***** का शिल्पी था..उसकी मौत से ***** की इमारतों को पोलियो हो चुका है...खड्खडाती हुईं अगले भाग में गिर जायेंगी!

पंचम खंड समाप्त

Positive Facts-

1- RC ने पेज-4 पर बताया है कि "Nature's Daughter" को परमाणु ने रक्तबीज में खोजा था! यानी यह सीरीज वर्तमान पृथ्वी/आयाम की ही है! फलस्वरूप parallel सीरीज का झगडा ही ख़त्म हो गया! यह बहुत बड़ी राहत की बात है!

2-आप अगर कालदूत से महारावण को आपस में हँसते हंसाते मजाकिया लहजे में लड़ते देखना पसंद है..तो आपको निराशा नहीं होगी! बहुत ही हल्की –फुल्की तरह से बिना किसी “बड़े” खून-खराबे के एक उत्तम लड़ाई दिखाई गई है...छोटे-छोटे बच्चों को कॉमिक्स पढ़ते हुए जो अति हिंसात्मक चित्र देखकर डर लग जाता था और वो अपनी माओं के आँचल में छुप जाते थे...इस अध्याय में ऐसी कोई शिकायत नहीं दिखती! फिर भी इसको हमेशा कालदूत और महारावण के बीच का खूनी महासंग्राम कहकर प्रचारित किया जाता रहेगा! यही अच्छे लेखन की खास पहचान है!

3-कुछ पुराने चावलों -बुगाकू,फुन्कारु,जगोता को दोबारा से ध्रुव और नागराज से भिड़ते देखकर आनंद लें! यह पूछना व्यर्थ है कि हारे हुए खिलाड़ी पर दांव लगाना कितनी अक्लमंदी है! मनोरंजक पल हैं यह!

4-आपको ऐसी लम्बी-लम्बी लड़ाइयाँ पसंद हो जिनका कोई फैसला ही नहीं होता...या तो खिलाड़ी फैसला होने से पहले ही मैदान छोड़ देते हैं...या हाथ उठाकर खड़े हो जाते हैं..तो यह सीरीज आपके जैसे हिंसा विरोधी और फिक्सिंग समर्थक पाठकों के लिए ही लिखी जा रही है! इस सीरीज को अवश्य खरीदें!

5-यदि आप तिरंगा प्रेमी हैं और उसजैसे देशभक्त हीरो का खूनी रूप देखना पसंद है.. तो यह कॉमिक्स आपको खुश कर देगी! पूरी तरह से डोगा स्टाइल का अध्याय नए तिरंगा प्रेमियों को पसंद आ भी सकता है और हार्डकोर पुराने पाठको को नहीं भी! Your Choice! जो आदमी खून और हिंसा से परहेज़ करता दिखाया गया हो..वही कसाई के रूप में दिख जाए...मज़ा आ जाता है! इस भाग को हमेशा याद किया जाएगा!

6-वैदिक काल के गुरुकुलो में पढ़े भारतीय राजाओं को अरबी/फ़ारसी बोलते देखना चाहें तो इससे बढ़कर भाषाई आविष्कार दुनिया में किसी और जगह नहीं मिलेगा! ऐसी क्रान्ति इसी सीरीज में देखी जा सकती है! RC को बधाई!

7-आयामों को कैसे चुटकी बजाकर खोला जाता है..यह सीखना चाहें तो इस कॉमिक्स को जरूर पढ़ें,शायद RC के पाठकों में से कोई आगे चलकर महान वैज्ञानिक बन सके!

इस जबरदस्त कॉमिक्स को हमारी तरफ से 100/10...आनंद की बात है कि कहानी में एक भी त्रुटी खोजने से नहीं मिली....आर्टवर्क की सुन्दरता को देखकर तो DC /Marvel वाले भी दोयम दर्जे के लगने लगे हैं! हमारा मन बहुत प्रफुल्लित है! कुल मिलाकर सर्व मंथन बहुत ही जबरदस्त कॉमिक्स है! ऐसी कॉमिक्स कालजयी रचना से कम नहीं है! इसको ना खरीदा तो आपने कॉमिक जीवन में बहुत बड़ी चूक कर दी! आपने हाथ जोड़कर विनती है कि इस कॉमिक्स को RC Online Store से बिना discount लिए खरीदें और आनंद के सागर में मनोरंजन का मंथन करें!

END OF PART-1
विशेष-जो पाठक हमेशा छोटे-छोटे Positive Review की डिमांड करते हैं...उनके लिए हमारी समीक्षा यहीं पर समाप्त होती है! पढने के लिए बहुत-बहुत शुक्रिया! अब आप यह पोस्ट पढना समाप्त करके किसी अन्य Positive पोस्ट पर प्रस्थान करिए!
सर्वनायक श्रृंखला के लिए हमने रिव्यु को 2 भागों में बाँट दिया है! ऊपर का भाग उन पाठको के लिए था जो 100% Positive और छोटे रिव्यु पसंद करते हैं और अब आगे इस पोस्ट को नहीं पढेंगे! wink emoticon आगे का भाग उन पाठको के लिए जो 50-50 Positive/Negative और बिना लम्बाई की चिंता के समीक्षा पढ़ते हैं!
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PART 2 STARTS-

दोस्तों,कॉमिक्स में हमें हर कोने के बारे में जो कहना होता है वो कहना जरूरी है....सबको कहानी को देखने/सोचने/परखने का अलग तरीका होता है....ऊपर तक पढ़कर आप लोगों ने सर्व मंथन की एक हल्की सी रूपरेखा समझ ली है! आगे रिव्यु अपनी ज़िम्मेदारी पर तभी पढ़ें जब आपको SPOILERS के साथ-साथ Length से परेशानी ना हो!

Suitable Suspect Facts-
1-कहानी को शुरू हुए 5 पार्ट्स बीत चुके हैं...कई लम्बी लड़ाइयाँ लड़ी जा चुकी हैं...लेकिन Probot अभी तक यही गा रहा है कि गर्भ गृह सिर्फ 2 दिन यानी 48 घंटे तक ही विश्व आबादी को संभाल सकता है! भाई..पृथ्वी के ऊपर तो समय अपनी नार्मल स्पीड से ही चल रहा है.....48 घंटे तो तब थे जब पाषाण राक्षस धरती पर पहली बार गिरे थे...उससे पहले का एक दिन सभी को गर्भ ग्रह में डालने में लग गया था.....अब तक इतने में आधा समय बीत जाना चाहिए था! मगर Probot शायद कहानी के अंत तक 2 दिन/48 घंटे ही बताता रहेगा! Numeric Table में 48 से पहले भी संख्याएँ होती हैं! कहानी को उल्टी गिनती पर कब लाया जाएगा?

B- पिछले भाग सर्व संग्राम के पेज 45 पर मैडम फॉक्स के बारे में बताया गया था कि उसने "कुछ महीने" पहले मुंबई पर अटैक किया था (अंगारे)....लेकिन इस भाग में प्रोबोट कहता है कि परमाणु को कुछ वर्षो पहले Nature's Daughter का पता चला था जब रक्तबीज कॉमिक्स के बाद वो वापस लौट रहा था! लेखक जी पहले बता चुके हैं कि रक्तबीज और अंगारे "Back to Back " stories थी...एक के बाद दूसरी तुरंत घटित हुई थी...तो फिर आप एक ही कहानी में महीनों और सालों का अलग-अलग Time Difference क्यूँ दिखा रहे हैं??

2- मसीहा इस कहानी में क्यूँ है अभी तक नहीं पता चला! उसके पुरानी कहानियों के अनुसार वो पागलखाने में था....तो अब उसके पास दंड से लेकर परग्रहियों तक से डील बनाने के बीच का हिस्सा क्यूँ गायब है? RC मसीहा पर ज्यादा ध्यान दे और कृपया जिन जगहों पर लोगों को भेजते हैं...उस जगह का नाम भी लिख दिया करें! अगर सर्वशक्तिमान वाले डोरिस,चीफ दिखाने ही थे तो बता भी दिया होता कि यह कौन सी कॉमिक्स में पहले आये हैं...और अभी कहाँ बैठे हैं!

3- पेज-15 पर कालदूत का पहला संवाद देखिये...कि कालदूत के तीनो रूपों का जो फेविकोल का मजबूत जोड़ है..उसको कोई पाप शक्ति अलग नहीं कर सकती! RC और बुढ्ढा दोनों भूल गए कि प्रलय में उसकी धुनाई करते हुए विषाला ने उसके तीनो बंजारे शरीरो को अलग कर दिया था....तब क्या विषाला पाप शक्ति नहीं थी?

4- RC ने अब तक यह भी नहीं दिखाया गया कि इतिहास ने कलंका के सभी मरे हुए लोगों को आखिर जिंदा करके क्या कहा.. और कैसे उनको आयामों में भेज दिया?....आपने कलंका में इतिहास को घुसते हुए दिखाया था..लेकिन उसको अधूरा छोड़ कर आगे बढ़ गए.........RC इसको विस्तार से आगे वर्णन करना चाहें तो कृपया जरूर करें!

5-शुक्रहारा जाति का अस्तित्व जिस समय काल में दिखाया गया है वो युगों पुराना है....लेकिन उसमे मौजूद राजा-महाराजों की भाषा पर गौर करें तो वो सभी अरबी/फ़ारसी इस्तेमाल कर रहे हैं...जिसका उस वक़्त नामो-निशान भी मौजूद नहीं था! शुक्रसाल वाले पन्नो में देखिये शैतान,निस्तानाबूद,यलगार,बददुआएं,औलाद,मुकद्दर,कमबख्त जैसे शब्द इस्तेमाल किया जाना भारी चूक को दर्शाता है! आधुनिक युग के हीरो पौराणिक संवाद बोल रहे हैं...और पुराने ज़माने वाले आधुनिक बन गए हैं...सब गड़बड़झाला मचा हुआ है! RC इस त्रुटी पर आगे ध्यान दे,क्यूंकि यह point कई कॉमिक fans द्वारा पहले भी उठाया जा चुका है! आपके लिए भाषाई विविधता का महत्व होना जरूरी है!

6-पाषण राक्षसों ने हर युग में आक्रमण किया था...लेकिन अब तक 450 पन्नो के बाद भी तीनो युगों में किस प्रजाति को कितना नुक्सान पहुंचा है...एक जगह भी नहीं दिखाया गया! वर्तमान,भूत और भविष्य में क्या हो रहा है...कुछ नहीं पता चल पा रहा! कहानी का बैलेंस तीनो कालों में बनाइये!

7-RC के हिसाब से सतयुग के देवताओं और दानवो के साथ कलयुग के मानवो की तुलना करने में कोई अंतर है या नहीं? हास्य स्तिथि में समुद्र मंथन देखिये कैसे हो रहा है....50 फुट के अडिग पर कालदूत ने कुंडली मार दी है...और दोनों तरफ से 8-10 सूरमा (महिलाओं सहित) समुद्र को बिलो रहे हैं! इन्हें कौन बताएगा कि असल समुद्र मंथन में "मद्राचल पर्वत" के नीचे आधार बनकर स्वयं विष्णु जी 1 लाख योजन चौड़ी पीठ वाले कच्छप के रूप में आये थे.......कोई भी मंथनी बिना किसी आधार के मंथन करे ऐसा मुमकिन नहीं है....50 फुट के अडिग में से सिर्फ उसकी 25 फुट की टांगें ही पानी की सतह पर चक्करघिन्नी बनी रहेंगी...ऐसे मंथन पानी में जाल डालकर दुनिया भर के मछुआरे रोज करते हैं और इससे कोई महाशक्ति तो क्या...व्हेल मछली और ऑक्टोपस भी ऊपर नहीं आने वाला था...लेकिन क्यूंकि यह महारचना बन रही है इसलिए...कुछ बड़ा वाला मालपानी ऊपर आते दिखाया जरूर जाएगा जबकि कॉमिक्स में अडिग के नीचे भी किसी आधार का होना जरूरी है! लेकिन ऐसा नहीं हुआ जो भारी चूक है! यह बात तो बांकेलाल की बेसिर पैर कॉमेडी कॉमिक्स जैसी लग रही है!
पाठको को एक और चीज़ याद दिला दें....शेषनाग नाम की एक कॉमिक्स आई थी जिसमे शेषनाग का कालदूत से अच्छा याराना दिखाया गया था....लेकिन जब समुद्र मंथन करने की बात आई तो कालदूत शेषनाग को बुलाने की जगह खुद ही रस्सी बन जाते हैं....RC जब हर किसी को ठूंस ही रही है...तो शेषनाग के साथ यह परायापन क्यूँ? और कमाल की बात यह है कि पृथ्वी का संतुलन बनाए रखने वाले हमारे शेषनाग इस पूरी कहानी में कहीं भी नज़र नहीं आ रहे हैं...जबकि गर्भ गृह बिना उनकी जानकारी में आये बन ही नहीं सकता था!

8-दूसरी तरफ इतने सारे गैर-पराशक्ति युक्त मानव हिन्द महासागर के बीच गहरे पानी में सतह के 3 फीट पर कैसे संतुलन बनाकर मंथन कर रहे हैं...इसको कैसे क्रियान्वित किया गया? जिस प्रसंग पर कहानी को विस्तार की जरूरत पड़ती है..वहां जल्दबाजी में निपटा दिया गया है!

9- सर्वनायक की अब तक आ चुकी कॉमिक्स में एकमात्र चीज़ जो दिखाई दे रही है वो यह है कि कहानी अपनी जगह से आगे बढ़ना ही नहीं चाहती! आपने अब तक एक भी पूरा अध्याय नहीं देखा है! हर छोटी-छोटी लड़ाई में सिर्फ एक्शन scene थोड़े और आगे बढ़ा दिए जाते हैं...लेकिन असल कहानी आगे नहीं जाती...Example लीजिये...इरी की गुफा में चल रही लड़ाई का...जो सिर्फ चल रही है...कभी कोई कभी कोई आ रहा है...लेकिन उसका समय और महत्व बताया ही नहीं जा रहा! 4 लात-घूंसे आपने पहले खंड में देखे...4 इस खंड में और 4 आगे देख लेंगे....लेकिन कहानी वहीँ पर रुकी है! ऐसे ही ध्रुव-नागराज वाला देखिये..मसीहा वाला देखिये! पिछले भागो वाला भविष्य का हिस्सा देखिये...और वो हिस्से भी देखिये जो अब याद भी नहीं आ रहे!

10-मौत का मैराथन इसलिए बरबाद रही..क्यूंकि उसमे सर्वनायक के इन छूटे हुए हिस्सों को कवर करना था..मगर वहां तो एक नई कहानी चल पड़ी है...कि WAR formation के लिए 40-50 साल के बुड्ढे भागा- दौड़ी करके खुद को काबिल छांटने में लगे हैं!

11-आयामों का प्रसंग-
आयामों के बारे में हम लोग फुंकार,हेड्रोन और नागायण में इतना पढ़ चुके हैं..कि अब यह कांसेप्ट बेगाना नहीं लगता है....लेकिन सर्व नायक में यह कांसेप्ट भी अजीबोगरीब तरह से चल रहा है! अनुपम जी ने आज तक आयाम के बारे में यही दिखाया है कि कोई भी आयाम खोलना बड़ी जटिल समस्या होती है...उसके लिए सही और योजनाबद्ध तरीको की जरूरत पड़ती है! हर आयाम ऐसा नहीं है कि जहाँ मर्ज़ी चाहे वहीँ से खुल जाता है...ऐसा तो है नहीं...कोई आदमी अपनी खटिया पर लेटा हो..और उसके नीचे आयाम द्वार खोल डालें...उसके कुछ स्पेशल पॉइंट्स होते हैं..जिन्हें पहले पता किया जाता है! नागायण देखिये...कैसे ध्रुव और नागराज को एक-एक आयाम पार करने में कितनी मशक्क़त करनी पड़ी थी....हेड्रोन देखिये...Collider जैसी महा शक्तिशाली मशीन लगी थी! कोई भी आयाम द्वार हमेशा खुला नहीं रहता है...जब तक उसको खोलने वाली शक्ति बनी रहती है..द्वार नज़र आता है..वरना बंद!
अब सर्वनायक देखिये..."आयाम द्वार" कैसे खुल रहे हैं...
@द्वापर युग के महारावण को आयामों की जानकारी का होना ही पहले आश्चर्यचकित कर देता है... मरने के बाद जिंदा होने तक उसके पास इतनी शक्तियां हैं...कि वो आयामों की ख़ाक ऐसे छान रहा है...जैसे अपने महलों में एक कमरे से दूजे कमरे में भाग रहा हो!
ऐसा आयाम जो सभी कालों और आयामों का केंद्र है....एक बात बताइये...जब ऐसी कोई स्तंभित जगह होगी भी...तो वहां तो लाखो-करोडो आयाम/समय द्वार जुड़े हुए दिखने चाहिए....यह बात तो सामरी ही कहता हुआ दिखाया गया है....लेकिन आर्टवर्क में RC ने सिर्फ 2 ही आयाम द्वार दिखाए है...बाकी क्यूँ नहीं? क्यूंकि कलियुग में सिर्फ एक आयाम नहीं हो सकता..कलियुग एक पूरा काल है...और इस काल के अनगिनत आयाम हैं! जैसा की हम लोगों ने HEDRON सीरीज में देखा भी था....ऐसे अनगिनत आयामों में अनगिनत ऐसे आयाम भी होंगे जो बिल्कुल निर्जन होते हैं...महारावण को योध्दा वाले आयाम में 1 सेकंड में फेंक देना एक loophole है! लिखा गया है कि उसको भेजा आयाम में है...लेकिन दिख वो किसी अन्य समयधारा में रहा है जहाँ योध्दा मौजूद है! या तो RC को आयामद्वार की जगह उसी काल का अलग “समयद्वार” लिखना चाहिए था...आप लोग आयामद्वार,समय द्वार के साथ कालद्वार भी सब एक ही नाम से पुकार रहे हैं! इसको सही करने की जरूरत है!
@आयामों के द्वार भी हमेशा खुले दिखाए जा रहे हैं..जिनका Diameter कुछ 2-3 meter की खिड़की जैसा होता है...उनके सामने कालदूत किसी फुटबॉल पोस्ट के गोलची की तरह खड़ा है! इसके बाद गौर फरमाइए.... महारावण की हालत इतनी खराब है कि वो लड़ाई तक लड़ने लायक नहीं है...लेकिन इस खस्ता हालत में भी एक नया आयाम खोलकर उसके पार ऐसे भाग जाता है कि मिल्खा सिंह भी शरमा जाये!! क्या बात है!
दूसरी तरफ गुरुदेव भी ऐसा ही कुछ काम कर रहे हैं...2 सुपर हीरो और 10 विलेन की लड़ाई से उत्पन्न उस ऊर्जा को बीकर में भरकर अपने अड्डे पर ही आयाम खोलकर दिखा देते हैं! और आयाम के दूसरी तरफ क्या है? त्रिफना...Wow...गुरुदेव को पहले से पता था...कि यहाँ पर आयाम द्वारा खोलूँगा...तो इसके 4 हाथ पार त्रिफना उडती मिलेगी....कमाल तो इससे भी आगे है कि त्रिफना तो नागराज या फिर कालदूत में से किसी एक के पास थी...वो भी इसी असली आयाम में...तो आखिर अपने ही आयाम में जाने के लिए गुरुदेव आयामद्वार कैसे बना रहा है?....यह कहानी तो इसी पृथ्वी की है ना....और वो भी सिर्फ इतनी ऊर्जा से जिससे किसी शहर की एक दिन की बिजली भी ना जल पाए! यह तालियाँ बजाने लायक काम था...नोबेल प्राइज पर गुरुदेव का दावा पक्का है!
सर्वमंथन पढने के बाद ही पाठको को पता चलता है कि इस दुनिया ने सबसे आसान काम अगर कोई है तो वो "आयाम" खोलना ही होता है!

12- यह देखना बिल्कुल अच्छा नहीं लगा कि तिलिस्म्देव के बाद एकाएक तिरंगा भी अधूरी लड़ाई छोड़ गया है....और आगे शायद सर्व संधि में देवता और असुर दोस्ती करने वाले हैं....यह पूरी प्रतियोगिता ही एकाएक गप्प सी बनती जा रही है....आप पहले 5 Steps की लड़ाई रखते हैं और आधे में ही एक को Quit करवा देते हैं....RC ने पहले इतनी बड़ी Hype बनाई गई कि Hero vs Hero होगा...लोगों को शानदार कुश्ती देखने को मिलेगी...जिसमे कोई एक जीतेगा और दूसरा हारेगा....लेकिन अब सभी पीठ दिखाकर भाग रहे हैं! क्या हीरो और क्या Side Characters....अब तक एक परमाणु और प्रचंडा के अलावा कोई लड़ाई तठस्त रूप से नहीं दिखाई गई है! क्या यह पलटी मारना नहीं कहलायेगा? आगे डोगा vs योध्दा में भी कोई जीतेगा या यही Quit दिखने वाला है?

13-मानवीय पहलुओं को मज़रंदाज़ करना-
हर कहानी के पीछे एक वज़ह होती है...लेकिन सर्वनायक जिस वज़ह से लड़ी जा रही है...उसके पीछे वर्तमान, भूतकाल और भविष्य काल के कम से कम 10-15 अरब लोगों के कष्टों को भी दर्शाना चाहिए था...पूरी कॉमिक्स सिर्फ लम्बी लड़ाइयाँ दिखाने तक सीमित है....गर्भ गृह में संसार भर के अलग संस्कृति के लोग आपस में कैसे जूझ रहे हैं,डर और अवसाद के माहौल में बूढ़े बच्चे और महिलाएं कैसे गुजर रहे हैं...क्या यह सब दिखाना जरूरी नहीं हैं? लेकिन कहानी का मानवीय पक्ष गायब है! किसी श्रृंखला को चाहे जितना विस्तृत बना लीजिये....अगर उनके content में पूर्णता नहीं लायेंगे तो उसका कुछ नहीं हो सकता! हम लोग अनेको ऐसे विषय पढ़ते/देखते आ रहे हैं जिनमे विश्व सभ्यता पर खतरा आता है...लेकिन उन सभी में एक बात common होती है.- ज़िन्दगी के बचने के आशा...आम लोगों की कहानी में मौजूदगी...जो सर्वनायक में तीन काल और 4 युगों तक कहानी फैलाने के बाद भी पूरी तरह से नदारद है!

14- प्रलय से पूर्व वाले भाग में जितने 15-20 विलेन हैं...सबके सब कहीं ना कहीं या तो बंद थे...या धरती से ही गायब हो चुके थे...आपने उन सभी को बिना किसी बैकग्राउंड story के एक साथ लाकर खड़ा कर दिया है....सबसे बड़ा loophole पूरी कहानी में यही है....शाकूरा,विषंधर,वामन,ध्वनिराज,चुम्बा वगैरह सभी अलग timelines पर 2-3 जगह दिख रहे हैं.....यह कहानी तो आपने इतनी लम्बी खींच दी है कि इस ट्रैक की वापसी में ही 2 ग्रन्थ दिखाने जरूरी हैं!
आपने बताया था कि विसर्पी इसलिए भाग रही थी..क्यूंकि नागद्वीप पर कोई मुसीबत आई थी...लेकिन आपने वो मुसीबत नहीं दिखाई...आपने सर्व संग्राम में "सपेरा" को दिखाया था...मगर क्या सिर्फ बीन बजाने तक ही सीमित था वो?...इस भाग में तो विसर्पी और सपेरा किसी काम के थे नहीं! और एक बड़ा loophole यह है कि इस भाग में सपेरा बीन भी बजाता रहा...और नागराज उसकी बीन पर नाचता हुआ भी सबसे खूब अच्छी तरह से लड़ता रहा! RC वालों ने इस पूरी कॉमिक्स को सिर्फ COMEDY बनाकर रख दिया है! Action सीन में भी पाठक ठहाके लगाते नज़र आयेंगे! यह थी इस कहानी की मजबूतियों की असलियत को बयान करती हकीकत!

संवाद- जिस किरदार को देखें...उसकी कोई पुरानी कॉमिक्स उठाइए...आधे से ज्यादा संवाद कहीं ना कहीं से मिलते-जुलते होंगे...क्यूंकि सारे एक्शन सीन repeated हैं....जो कुछ नया लिखा गया है...सभी में हंसी-मजाक चलता है! आपको पता नहीं चलेगा कि सीरियस कहानी चल रही है या हास्य! आपके दिमाग का एक हिस्सा कहेगा...यार तीन काल और 4 युग वाली कहानी में कोई कैसे हँस सकता है पर.....

आर्टवर्क-
सुशांत पंडा जी का काम ठीक ठाक है.. लेकिन इस भाग में आर्ट सर्व संग्राम और सर्व संहार जैसा नज़र नहीं आ रहा है...और ना कलर! सर्व मंथन में आपको आर्ट में कहीं भी एकरूपता नहीं दिखेगी..इसकी वज़ह 4 अलग inkers का होना लगता है....विनोद कुमार और ईश्वर आर्ट्स का काम बेहतर है...जितने पन्ने अच्छे बने हैं उन्ही दोनों के हैं....लेकिन नए Inkers को सर्वनायक पर काम दिया जाना बहुत गलत फैसला साबित हुआ है..जो आर्टवर्क बर्बाद कर देता है!
पेज 3-14 अच्छे हैं! महारावण और कालदूत वाले पन्ने average हैं! पेज 25-33 तक पेज बहुत खराब इंकिंग हुई है...झेलने पड़े! 34-36 ठीक ठाक हैं! 37-43 तो वीभत्स आर्ट हैं...बच्चे जैसा काम! पेज 45 ठीक है...लेकिन 46 -58 तक सिर्फ खानापूर्ति हुई है....59-60 ठीक है...लेकिन 61-67 तक वापस इंकिंग का बंटाधार है! 68-69 ठीक है...70 बेकार....71 ठीक है...लेकिन 72 -90 वापस भयानक इंकिंग हुई है! 91-96 तक वापस आर्ट डूब जाता है!

RC अगर सुन रही है..तो कृपया 90 वाली कॉमिक को 100-110 रुपये कर दीजिये....लेकिन पूरी कॉमिक्स में विनोद कुमार जी से इंकिंग कराइए! नए आर्टिस्ट्स से सुशांत जी की आर्ट का भाजी-पाला मत करवाएं! उन आर्टिस्ट को विनोद जी से tution लेने भेज दीजिये! और इस सीरीज के 2 साल बाद आने वाले हिस्सों पर try करिए!
1- सर्वदमन में प्रलयंका ने जो पोशाक पहनी थी और धनंजय के साथ चली गई थी...इस कॉमिक्स में उसकी पोशाक को बदल डाला गया है....सुशांत जी आपने ऐसा क्यूँ किया?...धीरज जी ने प्रलयंका का जो makeover किया था...आपको उसी को आगे बढ़ाना चाहिए...आप तो 1990 वाली पुरानी प्रलयंका बना दिए....RC आगे से कृपया उसकी पोशाक को बदल कर धीरज जी वाले स्टाइल में बनाइये!
2-नागाधीश कॉमिक्स के हिसाब से नागराज के शरीर पर जो हरे रंग की सर्पो वाली खाल है...वो भी उसकी सर्पशक्ति का ही एक हिस्सा है...लेकिन सर्व मंथन में जब भोकाल प्रतिरूप के साथ नागराज प्रतिरूप की सभी शक्तियां आपस में बदल जाती हैं...तब होना यह चाहिए था कि नागराज की हरे रंग की खाल भी भोकाल के पास पहुँच जाती! और नागराज खुद साधारण इंसानी खाल वाले रूप में आ जाता! हमें यह एक वाजिब चीज़ नहीं लगी!

colorists का काम average है...बहुत ज्यादा effects नहीं मिलेंगे! अन्य आर्टिस्ट्स द्वारा बीच-बीच में जो पेज बनाये गए हैं...वही कुछ आँखों को ठंडक दे पाए हैं! सौंदर्य प्रेमी पाठको के लिए सुशांत जी ने प्रथम अध्याय में कुछ देखने लायक पन्ने बनाये हैं!
पूरी कॉमिक्स में एक ही दर्शनीय scene है....योध्दा द्वारा महारावण को Headlock देना! जिसको हेमंत कुमार जी ने बनाया है!

टिप्पणी-
करीब डेढ़-2 साल का लम्बा वक़्त और सीरीज कटी पतंग की तरह हो चुकी है! हमारे यही विचार थे कि सर्वनायक चाहे जैसी भी चल रही हो...लेकिन इसको कम से कम "मौत का मैराथन" के आने तक का मौका मिलना चाहिए...क्यूंकि RC ऐसा ही मानती है कि खुद की सोच और कहानी को समझाने के लिए उनके पास मौके बेहिसाब होने चाहिए! बेहिसाब मौके, बेहिसाब ग्रंथो के बेहिसाब पन्नो के साथ मुद्रा भी लाते हैं! इस चीज़ पर सोचना बेफिजूल है कि 2 लातें बारह घूंसों की लड़ाई 4 पन्नो में देखना सही है...या 40 पन्नो में! आप एक ही single आईडिया पर 5 साल काम करते जाएँ...लोग चाहें पसंद करें या ना करें...बेशक करिए लेकिन इस आईडिया को कम से कम मजबूती से पेश करें...ना कि सिर्फ इसलिए क्यूंकि आपके अनुसार महा सीरीज सिर्फ तभी बन सकती हैं जब उनमे कुम्भ के मेले जैसी भीड़ जुटाई जायेगी! अब यह आपको सोचना है कि करीने से सजे फूलों के बाग़ को देखने में अधिक आनंद है...या कैक्टस के काँटों के जंगल को! (RC यह कैक्टस सिर्फ उदाहरण था...कहीं इसकी आड़ में परमाणु के दुश्मन कैक्टस को भी मत घुसा देना कहानी में..कहानी वैसे ही कम कांटेदार नहीं है) wink emoticon
“हमेशा अच्छा ही होगा” वाली सोच में डूबे रहने वाले पाठक अपनी विचारधारा रचनात्मक और जिज्ञासु बनाइये! यह हिन्दुस्तान है जनाब....यहाँ विचारों को रखने पर Censorship नहीं होती है!
RC से एक बात हम कहना चाहेंगे कि आपका अति विश्वास कहानी के लिए घातक बनता जा रहा है...अब भी समय है ....सर्वनायक पर अन्य सीनियर writers का भी सहयोग लिया जाए....जैसा कि युगांधर में तरुण कुमार वाही जी थे...और वो अब तक इस सीरीज का सबसे मजबूत आधार था......क्यूंकि इस अजीबोगारीब सी कथा के अंत में अगर किसी जगह पर एक भी किस्सा गायब रहा...तो ऐसा अधूरा खेल दोबारा शायद ही कोई खेलना चाहे!

अल्लाह हाफ़िज़!!!

Ratings :
Story...★★★☆☆☆☆☆☆☆
Art......★★★★★★☆☆☆☆
Entertainment……★★★★☆☆☆☆☆☆

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Saturday, 31 January 2015

SARVSANHAAR (2014)


Review-सर्वसंहार (2014)
Genre-Sci-Fi-Action,Mythology,Comedy
Main character(s)- तिरंगा,शुक्राल,गगन,विनाशदूत,महामानव,युगम,ध्रुविष्य
‪#‎Creative_team‬
Writer-नितिन मिश्रा
Penciller-सुशांत पंडा
Inker-विनोद कुमार
Colorists-शादाब सिद्दीकी,बसंत पंडा
Calligraphers-मंदार गंगेले,नीरू

Ratings :
Story...★★★★★★★☆☆☆

Art......★★★★★★★☆☆☆
Entertainment……★★★★★★☆☆☆☆

कॉमिक्स पढ़कर उठने के बाद एक बात दिमाग में सबसे पहले आई कि राज कॉमिक्स ने सर्वनायक की शुरुआत ना जाने कौन मुहूर्त में करी थी..कि शुरू से ही इसमें सिर्फ विघ्न ही पड़ते जा रहे हैं! पहले के 2 भाग में कहानी के साथ आर्टवर्क भी दर्द दे रहा था..किसी तरह आर्टवर्क में सुधार आ रहा है तो कहानी मंल मौजूद Sub-stories दगाबाजी कर रही है! पिछले भाग में बड़ी मुश्किल से हालात संभले लग रहे थे...लेकिन ज्यादातर पाठकों ने इस भाग की कड़ी आलोचना करी है! उसमे कितनी सच्चाई है और कितने विरोधाभास हैं...चलिए देखते हैं-

>प्रस्तावना : आकाशगंगाओं के खलीफा (1-14)
यह भाग पिछले खंड में चाँद पर हो रही लड़ाई को आगे बढाता है! इसमें Action ज्यादा है! अगर आप गगन,विनाशदूत और ग्रहणों के फैन हैं..तो यह आपके लिए ही लिखा गया है! फिलहाल यह Sub-story अल्पविराम पर पहुँच गयी है! इस भाग में सबसे अच्छी चीज़ लगती है, लेखक के द्वारा पृष्ठ-10 पर लिखी गई बातें कि दिखाई जा रही यह सभी Sub-stories अत्यंत महत्वपूर्ण हैं और आगे जाकर सर्वनायक प्रतियोगिताओं का अभिन्न हिस्सा बनेंगी! अर्थात् जो पाठक यह कहते और सोचते हैं कि यह सभी कहानियां बेकार है या इन्हें पढना फिजूल है..उन्हें अपनी सोच पर दोबारा विचार करना चाहिए!

>प्रथम अध्याय : काल्किन का आगमन (15-40)
यह अध्याय तिरंगा और शुक्राल के बीच एक प्रतियोगिता को दिखाता है...जिसमे दोनों को कलयुग के अंत में जाकर भगवान् विष्णु के जन्म लेते दशम अवतार “कल्कि” की खोज करके उसको दुश्मनों से बचाना है! यहाँ पर आसानी से पता चलता है कि इन प्रतियोगितों का उद्देश्य साफ़ सुथरा और बिगड़ रहे ब्रह्माण्डीय कारको को सही करने का है! जिन पाठको की यह सोच हैं कि उन्हें WWE की कुश्ती देखनी थी...जो बिना उद्देश्य सिर्फ हार-जीत तय करे...उनके लिए ही यह कहानी खराब हो सकती है! जिन पाठको को उद्देश्यपूर्ण द्वन्द पसंद हैं..वो इस भाग का आनंद ले सकते हैं!
रही बात इस भाग के प्रसिद्ध हॉलीवुड फिल्म The Matrix से प्रेरित होने की..तो यह बात सही है कि इसका BASIC IDEA वहीँ से प्रेरित है! जो सिर्फ इतना है कि मानवो को असली दुनिया की जगह पर एक आभासीय दुनिया दिखाना..जिससे उनका शारीरिक और मानसिक विकास अवरुद्ध करके गुलाम बना लिया जाता है! लेकिन यह समानता सिर्फ बाहरी आवरण तक सीमित है....बालक ”कल्कि” की खोज,उसको पाने और वहां से निकलने का पूरा प्रकरण नया है!...सिर्फ कुछ पन्नो में निपटा दिया जाने से इसका मुख्य कहानी पर कोई प्रभाव नहीं होता है! इतनी सी समानता कोई बड़ा अपराध नहीं है! यहाँ लेखक का सरल सा उद्देश्य उस आईडिया का एक नवीन इस्तेमाल करके दिखाना है!

>द्वितीय अध्याय : डार्केस्ट ऑवर (41-56)
पिछले खंड में पाठको की शिकायत थी कि उन्हें गर्भ ग्रह में होने वाली बातों,घटनाओं और परेशानियों की जानकारी चाहिए...लीजिये यह अध्याय हाज़िर है! आनंद लें यह देखकर कि नीचे गर्भ ग्रह में किस तरह से सुपरविलेन हंगामा करने की तैयारिओं में जुटे हैं और कैसे उनको रोकने की मुहीम जारी है! चीता के साथ कई सुपर हीरोइनों व नक्षत्र को एक ज़िम्मेदार रूप और पद पर देखना सुखद लगता है! इस अध्याय में 50% Action और 50% Conversation से कुछ जटिलताओं पर से पर्दा उठाया गया है! जिनमे शामिल है- WAR की संस्थापना,उसके क्रियान्वयन में लिप्त सुरक्षा समितियां, WAR को ध्वस्त करने में लगे खलनायकों की फ़ौज का आगमन और अंत में विदूषक को कहानी में जुड़ता देखकर मज़ा आ जाता है! आगे उसकी नक्षत्र से मुठभेड़ का इंतज़ार रहेगा!
यह तो सकारात्मक पक्ष थे....नकारात्मक चीज़ यह है कि गर्भ गृह की हर तरह की सुरक्षा सिर्फ भारतीय किरदार कैसे कर रहे हैं?...वर्ल्ड लेवल की जिस सुरक्षा परिषद् को दिखाया गया है उसमें भी राजन मेहरा और इतिहास जैसे छोटे शहरो के दोयम दर्जे के पुलिस वाले भरे हुए हैं और वो भी जाने किसने उन्हें सारे अधिकार दे दिए हैं ! जब सुपरपावर अमेरिका और दूसरे पश्चिमी देशो के पास ज्यादा उच्च तकनीक मौजूद हैं तो अरबों की आबादी की रक्षा करने वाले सभी लोग अकेले भारत से ही क्यूँ लड़ाए जा रहे हैं!...मसलन आप बताते हैं कि हथियार बनाने का ज़िम्मा अनीस रजा के हाथ में है...क्या बाकी दुनिया में कोई दूसरा वैज्ञानिक या मिलिट्री वाला इस लायक नहीं था? आप सबकी टीम बनाकर भी दिखा सकते थे! दूसरी चीज़ कि Sector Aus-054 जैसे विदेशी लोगों वाले इलाके में भी चीता जैसा आदमी,जो अब पुलिस में भी नहीं है और दूसरी छोटी-मोटी क्राइम फाइटर हीरोइने कैसे इतनी ज़िम्मेदारी से भेज दी गई? इन सभी के साथ कैसे संपर्क किये गए..कैसे किसको राज़ी किया गया...आखिर इतनी सी बात को भी गुप्त रखकर लेखक क्या रहस्य बनाये रखना चाह्रते हैं? यह भगवान् ही जाने!
अरबों की जनसंख्या वाले भारत और चीन की सुरक्षा की जगह ऑस्ट्रेलिया के सेक्टर्स की सुरक्षा कर रहे मुच्चछड चीता को देखकर लगता है कि यह चीता भी कुछ ना कुछ जरूर पीता है! वो चीज़ दूध है या डीज़ल.... यह लेखक को पता होगा...पर 5-6 हीरोईंस के साथ कुलांचे मारते हुए बुढ़ाते चीता को देखकर अच्छे-अच्छे जवान सुपर हीरोज जलभुन का राख हो जायेंगे!

>तृतीय अध्याय : देवगुरु कृता (57-67)
इसमें तिरंगा और शुक्राल के मध्य “कल्कि” के लिए योग्य गुरु का चुनाव करने की एक प्रतिस्पर्धा दिखाई गई है! छोटा और ठीक ठाक भाग है...कहानी में अश्वथामा और त्रिशंकु जुड गए हैं!

>चतुर्थ अध्याय : शत्रु संधि,भाग एक (68-75)
महामानव के हाथो हरुओं की हार और गलालागीचा की वापसी दिखाने तक सीमित यह छोटा सा भाग है!

>चतुर्थ अध्याय : शत्रु संधि,भाग दो (76-81)
सुदूर भविष्य में ध्रुव वंश और देव वंश के बीच किसी अनजानी कहानी की साक्षात दिखती दुश्मनी पर है...इसमें ज्यादा दिमाग मत लगाइए..आगे के खंडो में ही पता चलेगा कि क्या मामला है!

>पंचम अध्याय : मिथ्याकार (82-90)
कवर पर जो नागराज के वेश में भोकाल और भोकाल के वेश में नागराज हैं...अंत में इसी अध्याय में दिखाए गए हैं....यहाँ फिर से तिरंगा और शुक्राल के मध्य प्रतिस्पर्धा हो रही है..जो जीता वही सिकंदर बनेगा....लेकिन अगले भाग में!

>परिशिष्ट अध्याय : जंगल का देवता (91-94)
4 पन्नो में वही पुरानी असम के जंगल में चल रही उठापटक को याद दिलाया गया है! जो आधे लोग भुला भी चुके थे..इसमें सिर्फ इतनी सी progress और हुई है कि भेडाक्ष और जुड गया है! यह भी अगले खंडो में सुलझेगा!

संवाद - पिछले भागो की तुलना में डायलॉग्स काफी सरल और हल्के शब्दों से लिखे गए हैं! उनमे गैरजरूरी मुश्किल शब्दों को शामिल करने की कोशिश नहीं हुई है! सभी Sub-Stories आसानी से समझने लायक है!

आर्टवर्क-
हमने पहले भी कहा था कि लोगों को संसाधनों पर गौर रखते हुए चीज़ें सोचनी चाहिए! RC ने इस सीरीज के आर्ट को पहले विश्वस्तरीय आर्टिस्ट्स को दिया था..लेकिन काम संतोषजनक नहीं मिल पाया! हेमंत जी NNN और अनुपम जी अपने दूसरे प्रोजेक्ट्स पर व्यस्त हैं! सुशांत जी के द्वारा पहले Multistarer एक्शन कॉमिक्स बहुत कम बनवाई गई हैं! ऐसे में उनका सर्वनायक पर पर अब तक किया गया काम प्रशंसनीय है! सर्वनायक के लिए सुशांत पंडा जी का चुनाव पाठकों की मांग पर उनके द्वारा बनाई गई “अंगारे” के शानदार काम के बाद किया गया था! पिछले भाग “सर्व संग्राम” की तरह इस भाग में भी उनका काम अच्छा है! कम से कम विनोद कुमार जी की इंकिंग के होने के बाद आर्ट में एक साफ़ सुथरा प्रयास दिखता है! आपको अनावश्यक रूप से काले किये गए चेहरे नहीं दिखेंगे! विनोद जी की इसी वज़ह से प्रशंसा होती है..कि उनके नाम के साथ जुड़ा भरोसा वो हमेशा बरकरार रखते हैं!
लेकिन जो लोग सुशांत जी के काम की हमेशा सिर्फ आलोचना ही करते रहते हैं.... उन्हें बताना चाहिए कि वर्तमान में दूसरे Option क्या हो सकते हैं? क्या बार-बार जबरदस्ती penciller बदलना सीरीज के लिए सही होगा? हमें ऐसा कोई कदम सही नहीं लगता है!
इस सीरीज का रंग संयोजन पहली बार इतना उम्दा नज़र आ रहा है और इसमें हाथ है शादाब जी का! उनकी वापसी से आर्ट में उल्लखेनीय प्रगति हुई है! इस सीरीज को जिस तरह की Hard Coloring की जरूरत थी..वो इस भाग में नज़र आती है! पेज 10,15,25,36,56,60,68,75,82 के फुल पेज आर्ट्स पर किये गए इफेक्ट्स शानदार हैं! और किसी को आर्ट चाहे जैसा लगा हो...व्यक्तिगत रूप से हम संतुष्ट हैं! यह 100% ना सही पर 75% देखने योग्य है!
सर्वनायक में कई दूसरे आर्टिस्ट्स के द्वारा भी पन्ने बनवाये गए हैं....इसलिए यह एक संयुक्त और सम्पूर्ण आर्टवर्क देती हुयी श्रृंखला है! राज कॉमिक्स को इसको ऐसे ही आगे बढ़ाना चाहिए, वरन सुधार की गुंजाइश अभी भी मौजूद है!

हमने कॉमिक्स को पढना कम से कम उम्मीद से शुरू किया था..पर अंत तक आते आते यह उतनी खराब नहीं लगी जितनी इसके बारे में बातें कहीजा रही थी! असल में गलती पाठको की भी नहीं है...आज तक पाठक सिर्फ अनुपम सिन्हा जी के बनाये Multistarer से ही परिचित थे..जिनमे सभी हीरो एक साथ होते थे..और कहानी एक ही बार में निपट जाती थी...पहली बार उन्हें ऐसी सीरीज पढने को मिल रही है..जिसमे किरदार सिर्फ आते और जाते दिख रहे हैं...कहानी एक इंच भी आगे नहीं बढ़ रही!
देखा जाए तो यह बात सही भी है..कि अब तक पांच मोटे खंड पढने के बाद भी सबकुछ वहीँ का वहीँ दिख रहा है! और परेशानी की बात यही है कि आगे भी इसमें कोई बदलाव होने की संभावना लगभग शून्य है...अरे भाई अभी तो सर्वनायक प्रतियोगिताओं में सिर्फ 3 द्वन्द हो पाए हैं...4-5 द्वन्द बाकी हैं! तो कहानी तो वहीँ रहनी है..युगम के कालरण में सीमित!
कहानी जिस दिशा में बढती जा रही है..हम भी काफी सोचने के बाद कोई आशा की किरण नहीं दे सकते हैं कि आगे सुधार होगा..क्यूंकि कहानी की संरचना ही “ढाक के तीन पात” वाली है!
हाँ बस एक बात कहेंगे कि “सर्वनायक विस्तार” का इंतज़ार करिए! उसके आने के बाद कम से कम इस रुकी हुई कहानी में गायब दिख रहा मनोरंजन जरूर जुड़ेगा!
सर्वनायक का असल में मज़ा लेना चाहते है तो आप कहानी के पूर्वानुमान लगाकर मत पढ़िए! ज्यादातर पाठक यह सोचकर कहानी पढ़ रहे हैं कि उनके पसंदीदा किरदार हर खंड में नज़र आयें...या उनकी कहानी को जल्दी से ख़त्म कर उन्हें साइडबार कर दिया जाए! जैसे एंथोनी के ना दिखने पर रोष व्याप्त है...मगर हमें नहीं लगता है कि यह एक सही रास्ता होगा कि हर हीरो के दिखाए जा रहे प्रकरण को तुरंत के तुरंत निपटा दिया जाए! ऐसी जल्दबाजी अंत में सीरीज के लिए ही हानिकारक होगी!
लेकिन अगर ऐसा हो रहा है कि पाठको को कहानी से शिकायत है तो उनपर ध्यान दिया जाना चाहिए! आखिर कॉमिक्स पाठको के लिए ही लिखी जाती है...उन्ही को पसंद नहीं आएगी तो कॉमिक्स का फायदा आखिर क्या होगा? लेकिन पाठको की बात सुनी जाए इसके लिए कुछ चीज़ें पाठको को भी करनी चाहिए! जिनमे सबसे पहली बात है कि अपनी व्यक्तिगत कटुता और पूर्वाग्रहों को सस्ती आलोचना का जरिया ना बनाएं! कॉमिक्स किसी एक व्यक्ति के लिए नहीं लिखी जाती है..इसलिए उसपर टिप्पणी भी सभी के बारे में ध्यान रखकर करी जानी चाहिए!
जो हो रहा है उसको देखकर लगता है कि पाठको का एक वर्ग नहीं चाहता है कि सर्वनायक सीरीज किसी भी हालत में सफलता पाए...इसके लिए झूठी अफवाहें और दुष्प्रचार का सहारा लेकर छोटी से छोटी बातों को भी बढ़ा चढ़ाकर प्रदर्शित किया जा रहा है जैसे वो अपराध हो!
आर्टवर्क में जब हमने कॉमिक्स उठाई और सुप्रीमा के आर्ट पर नज़र डाली तो देखकर अचम्भा हुआ कि कैसे 2 पैनल की आर्ट को सामने रखकर पूरी कॉमिक्स के आर्ट पर बिना वज़ह ऊँगली उठाई गई!
राज कॉमिक्स से हमें कहना है कि बहुतेरे पाठक कॉमिक्स खरीदने की जगह पायरेसी के द्वारा पढ़ते हैं और फिर हर बात पर हल्ला मचाते हैं....ऐसे फैन सिर्फ नकारात्मकता से भरे हैं और उन पर ध्यान देना ही नहीं चाहिए!
वैसे कॉमिक्स की प्राथमिक समीक्षा यही पर समाप्त होती है! पर हम कुछ बातों का जवाब देने से खुद को रोक नहीं पाए....आगे मन हो तो पढ़ें... ना हो तो ना पढ़ें!
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कहानी पर करी गई कुछ आपतियों पर विस्तृत तथ्य प्रस्तुत हैं...अगर उनपर ईमानदारीपूर्वक विचार करेंगे तो ऊपर की समीक्षा पढने के बाद भी कहानी को लेकर बची खुची छाई धुंध से जरूर पार पा लेंगे!

1- कहानी की शुरुआत में चाँद पर हो रही गगन-विनाशदूत के साथ ग्रहणों की 40 घंटे की मुठभेड़ पर सवाल उठाये गए हैं..कि इतनी लम्बी लड़ाई possible नहीं है! हमारा सवाल है कि क्यूँ Possible नहीं है?
Sci-Fi पढ़ रहे राज कॉमिक्स के पाठक अगर Lunar Calendar and Standard Time (LST) के बारे में नहीं जानते हैं तो इसमें गलती कहानी के लेखक की नहीं है! LST के अनुसार चाँद पर समय पृथ्वी के समय से भिन्न होता है! पृथ्वी पर 12-12 "घंटे" में दिन और रात बंटे होते हैं,वहीँ चाँद पर 15-15 "दिनों" के बराबर एक दिन/रात होता है! 15 दिनों में घंटे हुए 15 X 12 = 180 घंटे का एक दिन और 180 की ही एक रात!
आपके 12 घंटे = चाँद के 180 घंटे!
आपका 1 घंटा- चाँद के 15 घंटे!
चाँद के 45 घंटे हुए आपके 3 घंटे!
यानी 40 घंटे की लड़ाई का मतलब 3 घंटे से भी कम का समय! गगन-विनाशदूत के साथ ग्रहणों की इतनी देर की लड़ाई तो आराम से possible है!

2- गगन और विनाशदूत आकाशगंगाओं के खलीफा होने के साथ ही दूसरे खलीफाओ की तुलना में कमजोर है! यह बात खुद विनाशदूत ने दूसरे खलीफाओ को सर्वश्रेठ बताते हुए कही थी (Page-6)! समझने वाली बात यह है कि विभिन्न आकाशगंगाओं का मतलब है, विभिन्न सभ्यताएं और उनमे रहने वाले अनगिनत गूड रहस्य! अगर खलीफा “स्वघोषित” सर्वश्रेठ योध्दा हैं तो इसके पीछे उनकी जानकारियों में कमी है! और यह कमी इसलिए है क्यूंकि उन्हें हर सभ्यता में मौजूद सभी शक्तियों का पता नहीं है! इस बात को तूल देना कि कौन अधिक बड़ा योध्दा है..वाजिब नहीं लगता! यह वही बात हो गई जैसे पृथ्वी पर रहने वाले खुद को ब्रहमांड में सबसे शक्तिशाली घोषित कर दें! लेकिन यह सब बचकाना है! कुछ किरदारों के मुहं से निकली बातों को पूर्ण सत्य की तरह नहीं पढ़ा जाना चाहिए!

3- निगहबानो ने किन परिस्थितियों में खलीफाओं को पृथ्वी की तरफ भेजा है यह अभी दिखाया नहीं गया है..इसलिए इस पर अटकलें लगाना बेकार है! असल में यह पूरा आकाशगंगाओं के खलीफा का concept ही पहली बार नज़र आया है! इसलिए किस आकाशगंगा के बीच कितने प्रकाश वर्ष की दूरी है..यह निर्धारित करना पृथ्वी के नियमो के अनुसार गलत है! हो सकता है कि कुछ आकाशगंगाएं पास हो कुछ दूर...और इनके बीच आवागमन के लिए भी अधिक तेज़ साधन मौजूद हो! ब्रह्माण्ड की हर चीज़ को पृथ्वी के नियमो से जोड़कर नहीं देखा जा सकता! क्यूंकि हमारे वैज्ञानिक भी उतना ही पता कर पाए हैं...जितना उनके telescope की रेंज में आता है! जैसा कि यह सबको पता है कि युगम के द्वारा हर जगह का समय निर्धारित और नियंत्रित रखा जा रहा है...ऐसे में वो किसी को भी एक जगह से दूसरी जगह चुटकी बजाते पहुंचा सकता है....इसलिए इस मुद्दे को आगे के खंडो के लिए छोड़ देना ही श्रेयस्कर है!

4- स्याह समुद्र के अन्दर ऑक्सीजन कितनी थी...यह मापना उस आधार पर गलत है जब आपको पता है कि स्याह समुद्र वर्चुअलाइजेशन वर्ल्ड में बना था! यानी असली नहीं था! लेकिन तिरंगा और शुक्राल के फेफड़ो में ऑक्सीजन का लेवल किस तेज़ी से घटना/बढ़ना चाहिए,यह पृथ्वी पर मौजूद समुद्र के नियमो से नहीं जोड़ा जा सकता..क्यूंकि अगर ऐसा करेंगे तो 10 मिनट से अधिक का समय किसी मनुष्य के पास जीवित रहने हेतु नहीं होगा! जबकि तिरंगा और शुक्राल ने काफी समय तक Combots का मुकाबला किया था! यह बात अभी भी जाने क्यूँ पाठक समझ नहीं पाए कि जो कुछ हो रहा है वो युगम करवा रहा है..सिर्फ उसके माध्यम यह सभी सुपर हीरो बने हुए हैं! वो जहाँ पर चाहे समय को कम ज्यादा करके चीज़ें बदल देता है!
दूसरा कारण यह भी है कि Combots जो कि रक्ष जाति से ही जुड़े हुए थे..उन्हें भी ऑक्सीजन की जरूरत होती...इसलिए स्याह समुद्र में ऑक्सीजन के लिए कोई ना कोई यन्त्र मौजूद रहा होगा..जिसने तिरंगा और शुक्राल को लम्बी सांस लेने में मदद करी! अब वो अगर लड़ाई के दरमियाँ निष्क्रिय हो गया हो..तो हवा की कमी होना स्वाभाविक हो सकता है! लेकिन Sci-fi में हर बारीक चीज़ का विवरण कहानी को बेवज़ह और लम्बा खींच देता है!

5- गर्भ ग्रह में हो रही हलचल अभी सिर्फ शुरूआती दौर में है! अरबों -खरबों की आबादी के साथ कौन सा विलेन किस तरह से अन्दर आया यह बात फिजूल है,वो सभी सुपर विलेन हैं... छिपना और “पकड़ा ना जाना” उनकी एक खूबी में शुमार बात है! महत्वपूर्ण बात सिर्फ इतनी है कि गर्भ ग्रह में उनकी भी मौजूदगी है! ऐसा नहीं है कि हर खंड में हर किरदार को दिखाया ही जाए...पिछले खंड में जहाँ कमांडो फ़ोर्स किसी एक Sector की रक्षा कर रही थी..इस बार "चीता और टीम" किसी दूसरे Sector की! यह चेहरा दिखाओ और भाग जाओ नहीं कहा जायेगा...अगर हर किरदार को Full Length रोल दिया जाने लगेगा तो शायद यह कहानी 100 साल में भी पूरी ना हो!

6- शुक्राल सतयुग का अवश्य है..लेकिन वो एक युग तक सीमित नहीं है...हर युग में पैदा हुआ है और कलियुग के अंत तक भी जिंदा रहेगा! ऐसे में उसको अपने आगे के युगों की जानकारी तो होगी ही...यह बात भी नहीं भूली जानी चाहिए कि वो शुक्र शिष्य है..वही शुक्राचार्य जो कि कलियुग में भी शम्भुक के साथ हैं...शुक्राल के पास ज्ञान की कोई कमी नहीं है! इसलिए उसके गुरु द्रोणाचार्य के बारे में जानकारी होने पर कोई आश्चर्य नहीं किया जा सकता!

7- गुरु द्रोणाचार्य की आत्मा Present में क्यूँ आई..भविष्य में क्यूँ नहीं?
इसका जवाब यह है कि भविष्य में क्या होगा यह किसी ने नहीं देखा है...गुरु द्रोण ने भी नहीं! वो अपनी मानसिक ऊर्जा में वहीँ तक सीमित रह सकते थे..जहाँ तक समय अपनी चाल पर चल रहा है..यानी वर्तमान! अश्वथामा भी वर्तमान में किसी अनजान जगह पर ही है...उसका भविष्य क्या होगा यह निर्धारित करना सही नहीं था...क्यूंकि वो एक पौराणिक पात्र है! यहाँ पर लेखक ने समझ बूझ से सही निर्णय लिया है! आगे वो अश्वथामा को कैसे दिखाते हैं यह आगे की बात है!
दूसरी बात मोक्ष और मोह के बीच सम्बन्ध का है...मोक्ष तो गुरु परशुराम को भी मिल गया..लेकिन वो मोह के बंधन में नहीं पड़े...यह कमजोरी द्रोण में थी और वही दिखाई गई है...कि मोक्ष के बाद भी उनमे मन में मोह के बीज जाग्रत रह गए! यह भी ना समझी जाने वाली कोई बड़ी बात नहीं है!

8- हरु सभ्यता देव सभ्यता से बिलकुल अलग है...वो बडबोले हैं...लेकिन एक बात से इनकार नहीं करा जा सकता है कि वो देव सभ्यता से विपरीत शक्तियों वाले हैं....ऐसे में महामानव से उनका जीत ना पाना कोई बड़ी बात नहीं है...क्यूंकि महामानव भी एक बड़ी शक्ति है जो ज़मीन पर खड़े होकर अन्तरिक्ष की चीजों को हिला सकता है!

9-हजारो साल के बाद में ध्रुव वंश में पानी के अन्दर सांस लेने की शक्ति होना कोई बड़ा अजूबा नहीं है...देव जाति ने यदि ध्रुव के गले में यन्त्र लगाया था...तो उसकी प्रतिकृति बनाकर उसकी आने वाली पीढ़ी भी इस सुविधा को पाने की अधिकारी है! अचरज कैसा?

10- अंतिम पन्ने में भेड़िया पुत्र "भेडाक्ष" की झलक दिखी है..वो कौन है? क्या है? किस समय काल का प्राणी है? सच्चा है या झूठा है? अभी कुछ भी बताया नहीं गया है....ऐसे में सिर्फ "भेडाक्ष" नाम से उसको आलोचना का पात्र बना दिया जाना अभी सही नहीं है! "भेडाक्ष" कॉमिक्स में इस नाम का एक बहरूपिया जरूर था....पर इसका मतलब यह नहीं है कि यह "भेडाक्ष" वही है! भेड़िया वंश में आगे बहुत सारे भेड़िया के पोते के पडपोते पैदा होंगे.... अगर उसमे से यह कोई एक है तो बात ख़त्म हो जानी चाहिए...वैसे भी नाम में क्या रखा है..XYZ कुछ भी मान लें...आगे की कहानी में उसके origin पर ध्यान दें!

सर्वनायक के साथ पाठक जुड नहीं पा रहे हैं तो इसमें कमियां दोनों तरफ से हैं!
सबसे पहले कि ना तो एक कॉमिक्स को लिखने में जल्दबाजी करी जाती है..और ना उसके बारे में विचार रखने में जल्दबाजी करी जानी चाहिए! ऐसा कई दफा देखा गया है कि पहले जो विचार दे दिया जाता है..समय के साथ उसमे बदलाव हो जाते हैं! ऐसा इसलिए होता है क्यूंकि पहले जो जानकारी और तथ्य सही लगते हैं..वो बाद में गलत निकलते हैं!
राज कॉमिक्स अति आत्मविश्वास में इसका प्रचार करती रही हीरो vs हीरो के रूप में! पाठक इसी सोच में डूबे रहे पर कहानी में कई Sub-stories जोड़ दिए जाने से पाठक कहानी के साथ तालमेल नहीं बैठा पा रहे हैं! लेखक यहाँ पर एक गलती कर रहे है सस्पेंस को जरूरत से ज्यादा लम्बा खींचकर! यह बात पाठको को डरा रही है कि कहीं आगे जाकर उनके सवालों के जवाब नहीं मिले तो इस सीरीज का कोई औचित्य नहीं बचेगा! इस डर में वो छोटी-छोटी बातों को भी शंका की नज़र से देखते जा रहे हैं...कि फलां कहानी क्यूँ जोड़ दी गई या पहले भाग में जो हीरो दिखाया था इस भाग में क्यूँ गायब है?
लेखक को हमारा सुझाव है कि सबसे पहले तो हर खंड के हर अध्याय में जो कुछ घटित हो रहा है उसका समय, काल और जगह को भी mention करें! गैरजरूरी रहस्य बनाने से कोई लाभ अब तक तो मिला नहीं! दूसरी चीज़ कहानी में जो किरदार जुड जाते हैं..वो कैसे जुड़े?... यह भी विस्तार से उसी समय बता दिया जाए...जैसे एंथोनी और सधम का इरी की गुफा में आना,पहले महामानव फिर हरु और अब इस भाग में गलालागीचा का अचानक से ना जाने कैसे प्रकट होना!
इन बातों पर ध्यान देकर लेखक काफी हद तक सर्वनायक सीरीज के हो रहे विरोध को कम कर सकते हैं! असली चीज़ है ईमानदारीपूर्वक अपना काम करते जाना!
सर्वनायक श्रृंखला अपने पांचवे पड़ाव पर पहुँच चुकी है! सभी ने पढ़ भी ली है और अब वक़्त है..विचारोत्तेजक दृष्टिकोण को अपनाने का! यह सिर्फ पाठको के लिए नहीं राज कॉमिक्स के लिए भी जरूरी है..कि वो इस संभावनाशील कृति के साथ पूरा न्याय करें!

Tuesday, 28 January 2014

SARVYUGAM

सर्वयुगम के द्वारा सर्वनायक की मुख्य शुरुआत आपके हाथो में पहुँच चुकी है! युगांधर के बाद सर्वयुगम को पाने का ज्यादा इंतज़ार तो नहीं करना पड़ा लेकिन इस छोटे से समय में ही मन निरंतर उद्देलित बना रहा कि कैसी होगी सर्वयुगम?कौन कौन किरदार होंगे?कैसे कहानी की शुरुआत होगी? भूत-वर्तमान काल के नायकों का आमना-सामना किस प्रकार होगा? युगम कौन है? क्या पाठकों के सबसे पसंदीदा नायक को कहानी में वज़नदार काम मिला होगा? सवालों की लिस्ट बहुत लम्बी है..तो अब वक़्त है जवाबो को पाने का! इतनी बड़ी श्रंखला के अंत तक पहुंचना अभी किसी पाठक के लिए मुमकिन नहीं है..कहानी को चलने दिया जाना चाहिए और ध्यान कहानी में हो रही घटनाओं और हलचलों पर केन्द्रित करिए! इसमें लेखक ने भी सहायता करी है-सभी भागों को अलग-अलग खण्डों में विभाजित करके! जिससे समीक्षा करना आसान बन गया है!

*प्रस्तावना-उत्

पत्ति सूत्रधार
यह सर्वयुगम का पहला और छोटा सा खंड है! इसमें ज्यादा कुछ नहीं है..सिर्फ इतना पता चलता है कि कॉमिक्स में “अडिग” भी मौजूद है!

*प्रथम अध्याय –गर्भ ग्रह
कहानी की मुख्य शुरुआत इस अध्याय से हुई है! वर्तमान में धरती पर अन्तरिक्ष से एस्टेरोइड बेल्ट्स का आक्रमण हो गया है! वज़ह और किसकी कारस्तानी है..यह अभी किसी को नहीं पता...पता सिर्फ इतना है कि 8 घंटे में धरती का नामो निशाँ मिल जाएगा!
ब्रह्माण्ड रक्षको को तब गर्भ गृह के बारे में वैज्ञानिक बताते हैं...जो कुछ ऐसा है- कि पृथ्वी के “आंतरिक कोर” के ऊपर एक ऐसा गर्भ गृह बना दिया गया है..जिसमे पूरी पृथ्वी की जनसँख्या समा सकती है!
सवाल उठा- किसने बनाई ? जवाब आया- अकेले परमाणु और शक्ति ने प्रोबोट और वैज्ञानिकों के साथ मिलकर!
प्रोबोट एक रोबोट है...उसके अन्दर जितना ज्ञान है...वो प्रोफेसर कमल कुमार वर्मा का तब का ज्ञान है...जब वो कोमा में चले गए थे..रोबोट में तर्क शक्ति नहीं होती है..कमांड्स पर काम करता है....पर प्रोबोट के मामले में सब उल्टा चलाया जा रहा है!
अनुपम सिन्हा जी ने “कोलाहल” में एक चीज़ दिखाई थी कि परमाणु ने एक ऐसा एंटी लावा सूट पहना जो 30 मिनट तक लावे की गर्मी को सहने के बाद गल जाएगा! पॉवर दी गई मगर conditions apply* के टैग के साथ! यह चीज़ मुमकिन भी थी और मानी भी जा सकती है!
मगर सर्वयुगम में लेखक ने परमाणु को एक ऐसा सूट दिया है..जिसपर कोई conditions apply* नहीं करती हैं...यह “विशेष सूट” कुछ नहीं मांगता है..ना कोई कूलिंग डिवाइस,ना कोई ऐसा प्रतिरोध जिससे यह दिनों..महीनो तक बिना जले या गले टिक गया है!
RC में पहले वैज्ञानिक सिद्धांतो का आदर होता था...बच्चे कॉमिक्स पढ़कर विज्ञान के करीब आते थे...लेकिन अब रोहित शेट्टी की फिल्मों की तरह विज्ञान का मखौल उड़ाया जा रहा है! पृथ्वी के “आंतरिक कोर” तक जाने के लिए क्या तकनीक चाहिए इसके लिए सभी पाठको को एक फिल्म THE CORE जरूर देखनी चाहिए! वरना सर्वयुगम वाली तकनीक उन्हें भ्रमित कर देगी!
शायद यही तक लेखक रुक जाते तो बात संभल जाती...मगर अगले ही पैनल में एक नयी पॉवर बताई गई...Ultra Cold Atoms ! इनकी विशेषता है कि यह लावे तक को ठंडा करने की ताकत रखते हैं! ख़ास बात यह कि इन atoms की सक्रियता को लेकर भी कोई समय सीमा या condition नहीं है...एक बार शक्ति के बनाये धातु के गर्डर पर चढ़ा दिए तो ज़िन्दगी भर चलते रहेंगे!
तो यह थी गर्भ गृह के साथ इस कहानी की खोखली नींव!
इधर सुपर कमांडो ध्रुव दिल्ली से हिमालय की कंदराओं में बैठे समाधी लगाये किरीगी को मानसिक संपर्क कर रहा है?????
नयी पॉवर वाला ध्रुव?
आज मानसिक संपर्क कर रहा है...कल मानसिक विस्फोट करेगा? सीरियसली परमाणु कि जग प्रसिद्ध बर्बादी के बाद अब ध्रुव का ही नंबर लगा दिख रहा है....specials और showstopper की छिछालेदार के बाद अब लगने लगा है अनुपम जी के हाथो में ही ध्रुव सुरक्षित है...वही उसको पुराना रूप दे सकते हैं!
मसीहा पागलखाने से भागकर तो आ गया..पर दण्ड कहाँ से लाया? कृपया आगे के भागो में जरूर बताएं!
उपरोक्त बातों को कॉमिक्स में पढ़कर जिन पाठको को भरपूर मनोरंजन प्राप्त हुआ हो...वो आनंद लें...बाकी आइये द्वितीय अध्याय पर

* द्वितीय अध्याय-पूर्वजों
की धरती (प्रथम भाग)
विशेषता-इस भाग में स्वर्ग हेतु वाला मुद्दा ही चल रहा है...योध्धा को धकमानघन की प्राप्ति कैसे हुई और शुक्राल के साथ कैसे युगम ने उसको उठाया!

* द्वितीय अध्याय-पूर्वजों
की धरती (द्वितीय भाग)
विशेषता-इस भाग में भेड़िया और गरुडा के साथ अतिक्रूर और शूतान का अधूरा और अनसुलझा टकराव है...और भेड़िया का युगम द्वारा अपहरण!

*तृतीय अध्याय-क्षुद्र ग्रहों का आक्रमण
विशेषता- इस भाग में ध्रुव अपने साथियों के साथ कुछ अच्छे रणनीति पूर्ण कार्य करता नज़र आया है...तिरंगा को भी एक मैनेज़र का रोल मिला है...जो रणनीतिकार बना हुआ है!
कहानी अच्छी भली चल रही थी..कि अचानक से परमाणु ने दोबारा नयी पॉवर निकाल ली-मॉलिक्यूलर एक्सपेंशन ----इसका काम है परमाणु को वामन अवतार दे देना!
यह कब मिली..क्यूँ मिली और कैसे मिली? यह उल्लेखित नहीं करा गया है...परमाणु को नागराज के बड़े शरीर की बराबरी करनी थी तो कर ली!
परमाणु के इस झटके से पाठक अभी उबर भी नहीं पाए थे...कि नागराज बोल पड़ा “मैं अपनी इच्छाशक्ति से ब्लैक होल” बनाऊंगा!
क्या कहा जाए? शायद अगले भाग में यह दोनों परमाणु और नागराज नया ब्रह्माण्ड ही बना देंगे!
तो यहाँ तक इन “असंभव”,”एवें ही”,”कुछ भी” जैसे कारनामो से अपने प्रिय सुपर हीरोज़ को जीतते देखकर अपना सिर धुन रहे पाठको को अंतिम अध्याय अपने पास बुला लेता है!

*चतुर्थ अध्याय- युगम क्षेत्र
यह अंतिम अध्याय ना होता तो यह कॉमिक्स कंपकंपा कर बिखर गई होती..यही एकमात्र हिस्सा ऐसा है...जो कहानी को वापस ट्रैक पर लाकर पाठको को राहत देगा!
युगम का किरदार बहुत प्रभावशाली है! वो सुसंस्कृत है...महान ज्ञाता और अपराजित भी!
इस भाग में सभी नायको और युगम के बीच में बहुत अच्छे तर्क और सवाल होते हैं!
सर्वयुगम का अंत होता है...भोकाल और नागराज के बीच प्रतिस्पर्धा की शुरुआत के साथ!
युगम धरित्री अस्य:

आप सभी ने सर्वयुगम का एक संछिप्त सारांश पढ़ लिया..अब बात लेखन की! नितिन मिश्रा जी ने जो काम “तक्षक” नाम की महत्वहीन कॉमिक्स में किया था वही सर्वयुगम में भी दोहराया है! एक्शन सीक्वेंस में किसको,कैसे जीतना है,कैसे काम करवाने हैं...इसपर मेहनत और जोर नज़र नहीं आता है! कागज़ी बातों में सभी किरदार बहुत अच्छे संवाद बोल रहे हैं....लेकिन ज़मीनी लड़ाई में उल जलूल प्रयोग हो रहे हैं...कौन कैसे जीत रहा है..कैसे हार रहा है.. कौन कब आया...पिटकर कहाँ गया...जिंदा है की मर गया..इसके बीच में ना सामंजस्य है..और ना ठोस आधार!
इस बात को दृष्टिगत रखते हुए राज कॉमिक्स से निवेदन है कि सर्वनायक सीरीज की वृहद और विस्तृत कथावस्तु को देखते हुए आगे के भागों में श्री अनुपम सिन्हा,तरुण कुमार वाही,विवेक मोहन,और खुद संजय गुप्ता जी एक्शन सीक्वेंस में रचनात्मक सहयोग दें जिससे ऊपर लिखी गई कमियों को यथासंभव दूर करके सर्वनायक को सफल बनाया जाए!

सर्वयुगम की गति ऐसी है-शुरूआती 4 पन्ने बहुत तेज़ी से चलते हैं...फिर संवाद...उसके बाद पेज 19 से ज़मीनी कार्य आरम्भ जो भागा दौड़ी में इस युग से उस युग तक चलते जा रहे हैं...पूरी तरह से एक्शन! अंत में पेज 70 से एक बार फिर संवाद जो अंत तक चलता है!

कहानी-2.5/5
आर्टवर्क-2.5/5

धीरज वर्मा जी का आर्टवर्क सर्वयुगम में है! लेकिन वो धीरज जी नहीं..जो कभी लड़ाके,तुरुपचाल,
मैं हूँ भेडिया या मर्द और मुर्दा के लिए जाने जाते थे! यह बात सच है...कि सर्वयुगम के आर्टवर्क का स्तर वैसा कतई नहीं है..जैसी हर पाठक उम्मीद कर रहा था!
आर्टवर्क का सारा कमाल इसके कलर इफेक्ट्स में छुपा हुआ है...
वरना गौर से देखेंगे तो इसमें rough out lining work के अलावा कुछ नहीं है! पेंसिल की detailngs तो दूर फिनिशिंग तक नहीं हुयी है!
उदहारण के तौर पर देखिये नागराज को जिसके शरीर से जालीदार शल्क गायब हैं...सतयुग में आइये योध्धा के आर्ट पर-सूखी घास के तिनको के समान आर्ट में से कई लाइन्स बाहर निकलती जा रही हैं! परमाणु के ऊपर तो इतने पेंसिल स्ट्रोक्स किये गए हैं...कि उसकी पीली पोशाक मकड़ी के जालों से ढकी नज़र आ रही है!
ऐसा आर्टवर्क इंकिंग के बिना कहीं भी नहीं ठहरने वाला! अब यह राज कॉमिक्स के ऊपर है कि वो कितना वक़्त लगाएगी इस चीज़ पर ध्यान देने में..क्यूंकि धीरज जी के साथ उसका भी नाम खराब हो रहा है!
सर्वयुगम के आर्टवर्क को इसके इफेक्ट्स ने बचा लिया है..जिस स्तर का आर्ट बना है....उसके लिए इफ़ेक्ट आर्टिस्ट्स को पूरे अंक दिए जा सकते हैं..उनकी मेहनत के बिना यह कॉमिक्स पार नहीं लग पाती!
शब्दांकन नीरू जी का है!

कॉमिक्स के मजबूत पक्ष-
*सिर्फ कॉमिक्स का चतुर्थ अध्याय
कॉमिक्स के कमजोर पक्ष-
*अनगिनत (उपरोक्त लिखित हैं)टिप्पणी- अति सुधार व उपचारात्मक सोच और काम की आवश्यकता!

overall सर्वयुगम अपने पिछले भाग युगांधर की आधी प्रतिष्ठा भी बचा नहीं पाई है! यह दुःख का विषय है कि इतनी बड़ी और इंतज़ार वाली कॉमिक्स के अन्दर ऐसा हुआ! राज कॉमिक्स आगे के भागो में ज्यादा सूक्ष्म दृष्टि से मेहनत करे!

Tuesday, 1 October 2013

NEGATIVES

Review- “निगेटिव्स”

राज कॉमिक्स ने आखिरकार अपने 26 वर्ष लम्बे सफ़र की 160 पेजों की सबसे लम्बी कॉमिक्स “निगेटिव्स” पाठको के समक्ष प्रस्तुत कर दी है! अपने प्रथम विज्ञापन(जो अंत तक प्रथम ही रहा) के छपने के बाद से ही हर राज कॉमिक्स प्रेमी इसे अपने कलेक्शन की शोभा बनाने के लिए बेसब्री से इंतज़ार करता रहा है! “निगेटिव्स” वैसे तो किसी भी दूसरी मल्टी स्टारर कॉमिक जैसी ही लग सकती है,लेकिन सिर्फ पन्नों की संख्या की वज़ह से इससे आसमान छूती उम्मीदें पैदा हो गई, उम्मीदों का बोझ जरूर राज कॉमिक्स की तरफ भी बढ़ा और वो उम्मीदें कितने लोगों के लिए सफल बनी, कितनो के लिए नहीं..यह प्रश्न प्रासंगिक हो भी सकता है और नहीं भी!
इस कॉमिक्स की समीक्षा लिखना भी बहुत टेढ़ी खीर साबित हो गई...एक अकेली इतनी बड़ी कॉमिक्स जो कि अनुपम जी के हाथ से बनी है, यह अनुभव हमारे लिए भी पहला ही रहा! तो चलिए “निगेटिव्स” पर नज़र डालते हैं कहानी से...

कहानी-

अनुपम जी एक महान लेखक हैं,इसमें कोई शक नहीं है! उन्होंने पाठको को एक से बढ़कर एक कालजयी रचनाओं से मनोरंजन प्रदान किया है! मल्टी स्टारर लिखने में अभी भी इंडस्ट्री में उनसे ज्यादा सक्षम लेखक फिलहाल कोई दूसरा नहीं है! लेकिन कायदे से देखा जाए तो “निगेटिव्स” एक “शुद्ध मल्टी स्टारर” नहीं है! 160 पेजों की इस कॉमिक्स का सार इतना सा है कि इसमें सिर्फ 5 हीरो हैं (नागराज,ध्रुव,डोगा,तिरंगा,परमाणु) 2 मुख्य सहायक लड़कियां (चंडिका,लोरी) इक्का-दुक्का सहायक पात्र और CF के कुछ कैडेट्स! जमीन के नीचे एक तलक्षेत्र और अंतरिक्ष में 5 सैटेलाइट्स! यही सब आपस में गुथम गुत्था होकर पेज भरते रहे! अगर हम कहें कि 4 लाइन की कहानी में पेज दर पेज एक्शन डालते हुए एक महा कॉमिक्स बन गयी है..यही इस कॉमिक्स की मोटाई का राज़ है...तो गलत नहीं रहेगा! इस कॉमिक्स को जितने पृष्ठ और हाइप मिली, इसके अन्दर उतना करिश्मा नहीं मिल पाया! इसकी वज़ह तलाशने के लिए शुरुआत पात्रो के रोल्स से करना सही होगा!

तिरंगा-
सबसे पहले तिरंगा का नाम चौंका गया होगा,लेकिन यह “सुखद” आश्चर्य रहा है कि “निगेटिव्स” की कहानी के हर बिंदु पर तिरंगा की छाप जरूर बनी है! लेकिन कहानी में एक बेहतर रोल मिलने के बाद भी कवर पर उसका नाम लिखा होने और प्रथम पन्ने पर जगह मिलने की गुंजाइश बनती थी! शुरुआत में लोरी के साथ टक्कर हो या डोगा के साथ कहानी के अंतिम क्षणों में प्रभावशाली ढंग से स्कीम को पूरा करना,तिरंगा के गुम हो चुके किरदार को इस कॉमिक्स से काफी फायदा मिलेगा!

नागराज-
राज कॉमिक्स के सबसे शक्तिशाली हीरो नागराज “निगेटिव्स” में बहुत अलग तरह से प्रस्तुत हुए हैं! इनकी एंट्री कहानी के 61वे पन्ने पर एक दमदार संवाद के साथ होती है! लेकिन जल्द ही यह कहानी में जगह-जगह खलनायक बने नज़र आने लगते हैं! इनकी अपार शक्तियां अब कहानी के ऊपर प्रभाव डालने लगी हैं.क्यूंकि खलनायक और इनके बीच किसी सीधी जंग होने पर कोई रोमांच नहीं बनता !अब यह बात हर पढने वाले को पहले से पता है कि असीमित शक्तियों वाले शरीर के अन्दर से कोई ना कोई नया अजूबा प्रकट होकर नागराज को जिता देगा! इसलिए सिर्फ इंतज़ार रहता है कि महानगर के नए नागराज का उबाऊ और Unrealistic एक्शन जल्दी पूरा हो जिससे नागराज अपनी पीठ खुद ठोक सके! और कहानी का ट्रैक बदले!
नागराज के इस नए रूप की वज़ह से अब खलनायको के पास करने को कुछ बचा नहीं है! वो आते हैं और बुरी तरह से पिटने के अलावा कुछ कर नहीं सकते...यह एक बड़ा कारण बनता जा रहा है कि सालो पहले बने खलनायकों की तुलना में आज बनाये जा रहे नए खलनायक उतने पोपुलर नहीं हो पाते! क्यूंकि जितनी मेहनत से वो कुछ नया सोचते हैं..उन्हें हराने में उतनी मेहनत नागराज को नहीं लग रही क्यूंकि वो उन्हें आसानी से हरा देता है!कॉमिक दर कॉमिक यही होता आ रहा है! उदाहरण के लिए अंधमान जैसा ताकतवर पात्र जब नागराज पर हावी हो चुका था, तभी नागराज ने सबको आश्चर्य में डालते हुए यामिनी को अंपने शरीर में जज्ब कर लिया!
यामिनी जो सिर्फ काली ऊर्जा भरी एक इंसान थी,आज तक नागराज सिर्फ इच्छाधारी सर्पो को ही अपने शरीर में स्थान दे पाने की शक्ति रखता था..पर अब इंसान भी इस फेहरिस्त में जुड़ चुके हैं! हम मानते हैं कि यह बात छोटी सी लग रही है..लेकिन इसका दूरगामी प्रभाव यह पड़ेगा कि नागराज के पास अब हमेशा एक तरीका रहेगा कि “इच्छाधारी सर्पो के अलावा” भी वो किसी भी दूसरे शक्तिशाली इंसान के साथ जुड़ सकता है..और अपनी शक्ति बढ़ा सकता है! फलस्वरूप उसके जीतने के लिए एक और शक्ति दे दी गयी है!
जब खलनायक को मौका ही नहीं मिलेगा कुछ हासिल करने के लिए तो हर कहानी में उसकी उपस्थिति का महत्व नगण्य बन जाएगा!
एक समय था कि राज कॉमिक्स द्वारा इसी चीज़ को कम करने के लिए नागराज के पास से उसकी इच्छाधारी शक्ति को तिलांजलि दे दी गयी थी! जो उसकी अपनी असली शक्ति थी! आज नागराज एक दुर्घटना में मिली शक्तियों के सहारे लगभग ईश्वर बन चुका है! बहरहाल अब यह शक्तियां कब तक रहेंगी,यह सोचने का वक़्त आ गया है और उन्हें हटाने या कमी लाने का भी!

परमाणु-
पेज-97 परमाणु की एंट्री कराता है! शुरू में तेवर ऐसे थे कि यह अकेले दम पर सारी बाजियां पलटकर रख देंगे..पाठक को उत्सुकता बनती है कि शायद परमाणु कुछ जलवा बिखेरने वाला है...लेकिन जल्द ही यह तिरंगा से पिटे,फिर ध्रुव और चंडिका से पिटे, जब भी कुछ करने के लिए बाकी हीरोज के पीछे से आगे निकले जैसे (पेज-124) हाथ मलते रहे! पॉवर लाइन तोड़ डाली(पेज-130) जो काम ना आई, और अंत में किसी तरह मरते मरते बचे(कैसे बचे यह दिखाया नहीं गया)! अब हास्यस्पद बात यह कि पेज-155 पर लोरी सबको बताती है कि पेज-152 पर बुरी तरह घायल,शरीर से धुंआ निकलते परमाणु का इलाज़ वेदाचार्य कर रहे हैं, यह वो वेदाचार्य थे,जो पेज-151 पर खुद अपना इलाज़ करने के हालत में नहीं रहे थे! लेकिन सिर्फ 3-4 मिनट बाद ही कॉमिक के अंतिम पन्ने पर परमाणु एक दम तंदुरुस्त उड़ता नज़र आ जाता है! कहानी में इन कमियों पर ध्यान दिया जाना चाहिए,जो चीज़ों को विरोधाभासी बनाती हैं!

डोगा-
डोगा की एंट्री कहानी के पेज-35 पर होती हैं! सुखद बात लगती है कि डोगा ने अन्य हीरोज़ की तुलना में शांत और एकाग्रचित रहते हुए अपने फ़र्ज़ को यथासंभव निभाया है! डोगा के बारे में पाठको की राय रहती है कि वो बोलता ज्यादा है और दिमाग से कम काम लेता है! परन्तु जहाँ अन्य हीरो स्थिति के मुताबिक खुद को ढाल नहीं पा रहे थे,वहीँ डोगा ने हर बार सही वक़्त पर सही निर्णय लेकर वाह वाही लूटी है! हमें कहते जरा शंका नहीं है,कि रोल चाहे बड़ा हो या छोटा,उसका सही इस्तेमाल इस पूरी कॉमिक्स में सिर्फ डोगा का ही हुआ है,बाकी सभी के रोल में कुछ ना कुछ झोल रह गए!

सुपर कमांडो ध्रुव-
अनुपम जी की कहानी में ध्रुव 70 पेजों तक नज़र ना आये,यह पहली बार हुआ है! क्यूंकि ध्रुव तब आता है,जब नागराज,डोगा,तिरंगा “निगेटिव्स” के हाथो कठपुतली बन चुके थे! लेकिन जैसे ही ध्रुव कहानी में आता है,अंधियारी कहानी में रौशनी आ जाती है तथा सुपर हीरोज के जीतने की संभावनाएं वापस जिंदा हो जाती हैं! कहानी का अंतिम हथोडा ध्रुव के हाथो से ही चलवाया गया है!(यह अलग बात है कि उस हथोड़े के लोहे में जंग लगे होने की संभावना भी रख दी गई)
ध्रुव के किरदार की महत्ता क्या है,यह इस कॉमिक्स को पढ़कर हर कोई जान लेगा,कि कोई भी मल्टी कॉमिक उसके बिना क्यूँ नहीं लिखी जा सकती!

लोरी-
लोरी की वज़ह से ही कहानी शुरू होती है!तिरंगा से शुरू में एक फाइट सीक्वेंस के बाद उसका रोल थोडा ही है..जो मार्ग दर्शक की तरह बीच बीच में आता रहता है!

चंडिका-
चंडिका को कहानी में एक लम्बा रोल मिला है! ध्रुव के साथ लगे रहकर मदद करती रही! कहानी में कुछ हलके फुल्के मजाकिया संवाद उसके हिस्से आये हैं!
परन्तु चंडिका को हर बार कहानी में जोड़ने के लिए वही घिसा पिटा तरीका कि सैटेलाइट्स को बनाने में श्वेता का भी हाथ था! एक हमला और श्वेता वापस राजनगर जाने वाले विमान में! क्यूंकि अब यही लगने लगा है कि राजनगर में जब भी कुछ होगा चंडिका ऐसे ही जोड़ दी जायेगी!
तीसरी बार यह आईडिया इस्तेमाल हुआ है! राज नगर में अब ऐसा लगता है कोई और साइड करैक्टर इस लायक बचा ही नहीं या इस लायक ही नहीं रहा कि उसको कॉमिक्स में जगह दी जा सके! कृपया इस तरीके को आगे की कहानियों में जबरदस्ती बार-बार उपयोग ना किया जाए, क्यूंकि आगे किसी कहानी में अगर चौथी बार यही चीज़ नज़र आई..फिर तो समझा जा सकता है,कि यह अनजाने में नहीं हो रहा! हमारा सुझाव सिर्फ इतना है,कि भूले-बिसरे किरदारों के लिए भी कुछ सोचा जाता रहे और लेखक दूसरे आप्शन पर भी विचार करें!

“निगेटिव्स”-
निगेटिव्स की प्रजाति इतनी लम्बी कहानी में कहीं पर भी अपनी एक वृहद छाप नहीं छोड़ सकी! जिस तरह की भयंकरता,आक्रमण की शक्ति,यामिनी में पृथ्वी जीतने की इच्छाशक्ति दिखनी चाहिए थी,वो नदारद थी! सबकुछ इस तरह चल रहा था जैसे अंत क्या होगा सबको पहले से पता है! वहीँ इतनी सारी कॉमिक्स में साथ आ चुके ब्रह्माण्ड रक्षक होने का दावा करते सुपर हीरोज के बीच भी सामंजस्य और स्थिति को लेकर गंभीरता भापने की समझ नज़र नहीं आयीं! जिससे कहानी की छवि पर नकारात्मक असर पड़ता रहा!

# कहानी के अंतर्विरोध #
कई जगह कहानी में स्थिति और हीरोज के काम करने के तरीके देखकर ताज्जुब होता है कि क्या सच में यह हीरो इससे पहले हज़ारो लड़ाइयाँ लड़ चुके हैं..फिर भी ऐसी बातें हो रही है? इसका उदाहरण देना भी जरूरी है-
1-यामिनी नागराज को बताती है कि पृथ्वी के अन्दर से इसका हर भाग आपस में जुडा हुआ है! (पेज-89)वो यह भी बताती है कि निगेटिव्स सांस नहीं लेते हैं! और तलक्षेत्र में नाम मात्र की आक्सीजन है! इसके बाद भी नागराज (पेज-128) पर बोलता नज़र आ रहा है कि एक मिनट से कम समय में वो पूरे तलक्षेत्र को विष फुंकार से भरकर सबको खत्म कर देगा! और इसका डेमो उसने कुछ समय दिखाया भी,लेकिन इतनी फुंकार को फूंकने के लिए वो हवा कहाँ से ला रहा था?यह अनुत्तरित सवाल छोड़ दिया गया!

2-तिरंगा को “वकील भारत” के रूप में गुजरात सरकार, दिल्ली की सरकार से परामर्श करके कांडा के समुद्री इलाके के पास के शहर में पकडे गए एक गार्ड को कानूनी सहायता देने के लिए भेजती है!(क्यूंकि यह सब दिल्ली में नहीं हो सकता,क्यूंकि गार्ड भागकर गुजरात से दिल्ली तक का सफ़र तय करने से रहा)!
यह सबकुछ सिर्फ कुछ घंटे में दोनों सरकारें तय करती हैं, कि देश के नामी गिरामी वकीलों की जगह ”भारत” जैसे एक नए वकील को इस अति गोपनीय काम के लिए चुना जाता है! उम्मीद है “भारत” विमान से ही गुजरात आया होगा! इन् सभी कामो को पूरा होने में कुछ वक़्त लगता है..जो सिर्फ कुछ घंटे का तो नहीं हो सकता! बहरहाल कहानी में यही दिखाया गया है, कि यह सब कुछ घंटे में ही हुआ है...क्यूंकि “वकील भारत” लोरी के लाये कानूनी ऑर्डर्स को यही बोलकर खारिज कर देता है,कि ऐसे ऑर्डर्स इतने कम समय में मिलना नामुमकिन है! इन दोनों विरोधाभासी बातों में निष्कर्ष यह बनता है कि जो चीज़ लोरी के लिए नामुमकिन थी वो भारत के लिए 100 % मुमकिन थी!
एक और हास्यास्पद चीज़ कि जो गार्ड अन्तर्राष्ट्रीय स्तर के मामले की सुरक्षा में तैनात है,पुलिस 2 दिन उसका नाम तक नहीं जान पाई,जबकि शिप लगभग तुरंत वापस पोर्ट पर आ गया था! इसके लिए शिप पर पूछताछ और खुद तफ्तीश करने से ज्यादा उपयुक्त पुलिस को बाहर से एक नए वकील की सेवा लेना लगा!
3-पेज-15 पर तिरंगा के ऊपर लोरी खंड-किरणों का वार करती है! तिरंगा ने अपने न्याय स्तम्भ से तंत्र वार को सोखा और वापस लोरी पर कर डाला! इसकी वज़ह बताई गयी,कि “यह 100 करोड़ भारतवासियों के विश्वास की शक्ति थी!”
हम भी मानते हैं,विश्वास की शक्ति में बहुत ताकत होती है लेकिन वो तब होती है,जब 100 करोड़ लोग उसी समय किसी चीज़ के लिए प्रार्थना कर रहे हो! ना तो ऐसा कहीं हुआ,ना होगा! यहाँ तिरंगा लोरी से भिड़ा हुआ है यह 100 करोड़ लोग जानते ही कहाँ हैं कि वो दुआ करके शक्ति दे दें?? अब इस देश में 100 करोड़ लोग तिरंगा के नाम की माला सुबह शाम कब से जपने लगे हैं,कि तिरंगा को पहले से पता था कि वो लोरी को हरा सकता है?? और अगर यह शक्ति इतनी आसानी से तिरंगा जैसे आम आदमी के पास है,जो तंत्र वार को सोख कर वापस पलटा रही है,तो पाठको को ध्यान रखना चाहिए कि न्याय स्तम्भ उस भेड़िया-मुख कमर पट्टिका के बराबर काम करता है,जो एक ईश्वरीय वरदान है!
हर जगह यही दिखाया जाता है कि विज्ञान, तंत्र की शक्ति को नहीं मानता है! परन्तु अगर तिरंगा जैसे आम नागरिक ने किसी खास विज्ञान के द्वारा अपने न्याय दण्ड को ईश्वरीय वरदान के समकक्ष बना लिया है,तो यह अभूतपूर्व चीज़ है! जो अब इस प्रसंग में दिखा देने के बाद राज कॉमिक्स को किसी नए विशेषांक में पाठको के सामने प्रस्तुत करनी की पड़ेगी!
लोरी को तिरंगा से भागना तो था ही,लेकिन इसके लिए लेखक ने एक हास्यास्पद स्थिती पैदा कर दी! ऐसी बातों से ख़ास तौर पर तिरंगा जैसे रियल हीरो के सन्दर्भ में बचा जाना चाहिए,जो अति-शक्तियां नहीं रखता है! क्यूंकि अगर तिरंगा जैसा आम पात्र भी तंत्र शक्तियों को इतनी आसानी से ठेंगा दिखाता नज़र आता रहेगा,तो शक्तिशाली पात्र तो शायद तंत्र को हँसते हँसते झेल लिया करेंगे!

4-विज्ञान में एक टर्म आता है “Adaptation” या अनुकूलन
लेखक ने तलक्षेत्र की जनसँख्या को इसी टर्म से परिभाषित किया है, कि अनुकूलन के फलस्वरूप सदियों के लम्बे सफ़र को तय करके निगेटिव्स की प्रजाति अस्तित्व में आई थी! इसमें जन्मजात निगेटिव्स भी हैं,जैसे यामिनी जो वहां के राजा की बेटी थी! यानी निगेटिव्स का बनना वंशानुगत लक्षणों पर भी आधारित चीज़ है! अनुकूलन कहता है कि एक बार कोई प्रजाति अपने मूल विकास में बदलाव के दौर से गुजर कर बदल गई,तो अपनी मूल अवस्था में दोबारा एक दम से नहीं आ सकती! यह आसानी से समझने वाली चीज़ है कि जो बदलाव सदियों में आये वो कुछ मिनट में U-Turn नहीं ले सकते!
लेकिन अचानक से कहानी के अंत में निगेटिव्स को एक बैक्टीरिया का किया धरा बताकर उसको एंटीबायोटिक्स के द्वारा कुछ मिनट में ठीक करवा देना लेखक की कलम के अलावा कहीं से मुमकिन नहीं है!
इसके पीछे भी कई कारण हैं...
@एंटीबायोटिक्स किसी भी बैक्टीरिया पर तभी असर कर पाते हैं,जब उन्हें ख़ास उन्ही बैक्टीरिया का खात्मा करने के लिए बनाया जाता है! जो एंटीबायोटिक्स यहाँ प्रयुक्त हुए थे..वो ख़ास सैटेलाइट्स के अन्दर के बैक्टीरिया को मारने के लिए ही बने थे! उनसे दुनिया के किसी और बैक्टीरिया को ख़त्म करने के उम्मीद नहीं करी जा सकती! यहाँ जो बैक्टीरिया निगेटिव्स को बना रहे हैं,उसके बारे में पृथ्वी के वैज्ञानिकों को जानकारी ही नहीं है,तो वो उनके लिए कोई एंटीबायोटिक्स बनाना तो क्या सोच भी नहीं सकते थे,कि यह माना जा सके कि चमत्कार हो गया था!
@ बैक्टीरिया के अन्दर म्युटेशन की क्षमता बहुत अच्छी होती है...अगर बैक्टीरिया म्युटेशन में पारंगत है..यानी अनूकूलन के सिद्धांत बहुत अच्छी तरह से पालन करता है..जैसा कि तलक्षेत्र में हो रहा था..तो उस परिस्थति में म्युटेशन सहायता करता है बैक्टीरिया को खुद को बचाए रखने में!
एंटीबायोटिक्स की क्रियाविधि ऐसी होती है,कि किसी ख़ास बैक्टीरिया के खिलाफ सिर्फ उसके कल्चर से निकालकर बनाया गया एंटीबायोटिक्स ही उसको ख़त्म करने में सक्षम होता है..इसके अलावा बैक्टीरिया एक बार सामना होने के बाद किसी ख़ास एंटीबायोटिक्स के खिलाफ प्रतिरोधक क्षमता विकसित कर लेते हैं! इसलिए कोई एक ही तरह का एंटीबायोटिक्स हर तरह की बीमारी में इस्तेमाल नहीं किया जा सकता!
एक और गौर करने वाली बात है कि एंटीबायोटिक्स को भी बैक्टीरिया पर अपना प्रभाव दिखाने के लिए समय की जरूरत होती है,कोई एंटीबायोटिक्स कुछ मिनट्स में इतना जबरदस्त प्रभाव नहीं डाल सकता है,कि अनुकूलन के द्वारा बदले शरीर को वापस ठीक कर दे! और एक बहुत बड़े क्षेत्रफल में फैले तलक्षेत्र से बैक्टीरिया साफ़ कर दें!
(लेकिन यह सबकुछ लेखक के द्वारा मुमकिन किया गया है! यह पढने वालो के ऊपर है कि जो निगेटिव्स की उत्पत्ति और उनके अंत का तरीका कॉमिक्स में दिखाया गया है,वो उससे सहमत हो सकते हैं या नहीं!)
कहानी में जब तक अनूकूलन था.. निगेटिव्स और तलक्षेत्र की कहानी सही जा रही थी..लेकिन कहानी के अंत में बैक्टीरिया के इस्तेमाल ने सुपर हीरोज को तो जितवा दिया..मगर कहानी के सबसे महत्वपूर्ण हिस्से को कमजोर कर दिया!
इस कॉमिक्स की सभी खूबी यह हैं-
1-पाठको को 160 पेज पहली बार एक सिंगल कॉमिक्स में मिलना!
2-पाठको को आर्टवर्क में सालों बाद अनुपम जी के साथ विनोद कुमार की का जबरदस्त काम मिलना!
3-कॉमिक्स में ग्लॉसी पेपर के साथ उम्दा कलरिंग!
4-(सिर्फ एक्शन पसंद करने वाले पाठको के लिए) जो पाठक कहानी के उतार चढ़ाव,मनोरंजन वगैरह पक्षों से ज्यादा एक्शन को महत्त्व देते हैं,उनके लिए यह कॉमिक्स एक हॉट केक की तरह है!
इस कॉमिक्स की कमियां यह हैं-
1-करीब 160 पेज होने के बाद भी कहानी में एक्शन पक्ष को इतना ज्यादा महत्त्व दे देने के कारण ,कहानी का मनोरंजन पक्ष बर्बाद हो जाना!
2-कहानी में पात्रो को दिखने के तरीके में संवाद वाले पक्ष में गंभीरता की कमी होना,जिससे किरदारों का कहानी के लिए कम...अपितु खुद लिए काम करते दिखना दृष्टि गोचर होने लगता है!
3-बिलकुल नए खलनायक होने और एक रहस्यमयी जगह का माहौल होने के बावजूद भी उनका जरा भी उपयोग कहानी में ना होना अपितु सिर्फ खानापूर्ति लायक ही जगह दिया जाना!
4-कहानी में घटी हुई कुछ घटनाओं में कमियां छोड़ दिया जाना!

कथा-3/5
चित्रांकन-5/5

पेंसिल-
यह कॉमिक्स अनुपम सिन्हा जी ने पेंसिल करी है और उनके काम के बारे में हर कॉमिक्स प्रेमी बचपन से जानता है कि वो हमेशा अपना 100% देते हैं!
इस पूरी कॉमिक्स के 90% से भी ज्यादा पन्नों में सिर्फ एक्शन सीन हैं! एक्शन के मास्टर अनुपम जी हमेशा से रहे हैं,यहाँ भी उन्होंने हर एंगल से एक्शन को उकेरा है! डोगा के एक्शन सीन सबसे ज्यादा अच्छे बने हैं,जब वो ट्रेन वाले सीक्वेंस में आता है! उसके अलावा ध्रुव और डोगा की भिडंत के सीन्स दमदार हैं!
परछाइयों को किरदारों के साथ चिपके हुए चलते दिखाने में जो रोमांच का अनुभव आना चाहिए..वो पैदा करने में अनुपम जी सफल रहे हैं!

इंकिंग-विनोद कुमार
किसी भी पाठक की अनुपम जी के पेंसिल पर विनोद जी की इंकिंग देखने से बड़ी तमन्ना नहीं हो सकती है,जो इस कॉमिक्स में पूरी होती है! इस जोड़ी ने एक दशक से भी लम्बे समय तक सैकड़ो बेहतरीन कॉमिक्स पाठको को दी हैं! सिर्फ विनोद जी का नाम होने की वज़ह से इस कॉमिक्स का मूल्य देते समय किसी को भी कोई हिचकिचाहट महसूस नहीं होगी!

इस कॉमिक्स में जलजला के वक़्त जैसा आर्ट मिला है! वही पुराना ध्रुव जो हर कॉमिक प्रेमी अपने बचपन से देखता आ रहा है! वही साफ़ सुथरे चेहरे, जो पहचान थे कभी राज कॉमिक्स के स्वर्णिम काल की!
आज के वक़्त में आर्टवर्क प्रयोगधर्मी ज्यादा हो गया है! हर नया आर्टिस्ट अपने तरह से चीजों को बनाने और उन्हें सही साबित करने की होड़ में जुटा है! जिससे चेहरा सही नहीं बनता,वो उसको किसी अँधेरे कोने में खड़ा करके काला कर देता है! निगेटिव्स खुद में एक ब्लैक आर्टवर्क स्टोरी है! अगर अनुपम-विनोद जी चाहते तो इसको भी जबरदस्ती आजकल के आर्टिस्ट्स जैसा काली लीपा पोती करके पेश कर देते! आखिर क्या जरूरत थी, उन्हें इतनी ज्यादा मेहनत करके हम पाठको को देने की?
इसका उत्तर यह है कि अनुपम-विनोद जी अपने काम से बहुत प्यार करते हैं! यह उनकी आत्मा है और अनुभव हमेशा आगे रहता है! नयी पीढ़ी के आर्टिस्टस को इस कॉमिक्स को देखकर समझना चाहिये कि पाठको को क्या चाहिए और क्या नहीं!

रंग संयोजन-
कलरिंग इफेक्ट्स “अभिषेक सिंह” के द्वारा किये गए हैं! इतनी बड़ी कॉमिक्स का अपने करियर की शुरुआत में ही मिलना एक बहुत बड़ी उपलब्धि कही जा सकती है! उन्होंने भी इस बात को समझते हुए सराहनीय काम किया है!
लोरी-तिरंगा,डोगा की ट्रेन साइड नेगेटिव्स से भिडंत में अच्छे इफेक्ट्स हैं!
इस कॉमिक्स की कलरिंग से 10 साल पहले की कलरिंग वाला एहसास होता है! यहाँ हल्के इफेक्ट्स के साथ हार्ड कलर्स हैं! ग्लॉसी पेज होने से भी इफेक्ट्स का पूरा मज़ा मिल रहा है! सिर्फ अंधमान की ड्रेस को ज्यादा हाईलाइट टोन में होना चाहिए था,आखिर वो एक मुख्य और नया पात्र था! बहरहाल ओवरआल काम बढ़िया है!

शब्दांकन-
कॉमिक्स में 2 कैलिग्राफर हैं-नीरू और मंदार गंगेले जी! कौन सी जगह किनका काम है यह तो बता पाना संभव नहीं है! संवादों में यह कहानी काफी लम्बी है! सबको बोलने के लिए काफी कुछ मिला है! एक्शन और संवाद साथ साथ चलते ही रहते हैं!
कॉमिक्स में “नेगेटिव्स” के द्वारा कहे गए संवादों को काले bubbles में दिखाया गया है,जो टेढ़े मेढ़े और सुंदर दिखते हैं! इन bubbles की बाहरी पर्त पर भी अलग रंगों के इफ़ेक्ट स्ट्रोक्स देखने को मिलते हैं,जो पहले किसी कॉमिक्स में नहीं दिखा है!
अनुपम जी के लेखन पर यही टिप्पणी है कि वो कॉमिक्स में अभी भी सबसे अच्छे आइडियाज लाते हैं,लेकिन अब कहीं ना कहीं,उन आइडियाज का पूरी तरह से उपयोग नहीं हो पा रहा है! पहले आई नागराज है ना,आदम,काल कराल अपने विज्ञापन में जिस तरह का रोमांच बना चुकी थी..कॉमिक्स में वो बात नहीं बन पाई, “नेगेटिव्स” भी इस चीज़ से कुछ अलग नहीं है! “नागराज के बाद” वाली सीरीज के उपरान्त सिर्फ एक "हेड्रोन सीरीज" ऐसी थी जिसमे मज़ा आया था! उन्हें मनोरंजन वाले पक्ष के साथ किरदारों का चुनाव और उनको सही तरह से rotataion के अंतर्गत लाते रहना चाहिए!

अंत में यही कहना है कि निगेटिव्स को हर कॉमिक प्रेमी के कलेक्शन की शोभा जरूर बनना चाहिए! सालो पहले पढने को मिल चुकी कई मल्टी स्टारर के समकक्ष ना होने के कारण कहानी अति साधारण जरूर लगती है,जिसमे मनोरंजन के तत्वों की सतत कमी है,लेकिन ग्लॉसी पेपर पर अनुपम जी-विनोद कुमार जी के सजीव चित्रांकन की वज़ह से इसको देखने में आँखें सुकून का अनुभव करती हैं!
अंधमान,यामिनी और तलक्षेत्र को आगे दोबारा एक नए भयानक अंदाज़ और गंभीर कहानी में देखने की इच्छा जरूर रहेगी!

Thursday, 25 April 2013

I SPY


Overall rating 
4.5
story 
4.5
artwork 
4.5

Story bahut Entertaining hai....Kahani Full pace ke saath aage badhti hai...achchi baat yeh hai...ki Alag Alag Links ko kahani mein rotate karke kahani ko baandhe rakha gaya hai.
Tiranga Comics mein Dumdaar bhoomika mein hai...End mein taaliyan ussi ke hisse mein jaati hain...Comeback role mein woh badhiya laga hai.
Nagraj ka role jyaada Action mein hi chala gaya hai.

Writer ne kahani ke Dialogue bahut Jordaar likhe hain.

Hemant ji Artwork bahut badhiya hai...aur Sagar Thapa ne utni hi badhiya Inking bhi kari hai....Agar woh consistent achcha karte jaayein toh bahut aage jaayenge.

Overall I-Spy ek Thrilling Entertaining comics hai...Must read.