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Wednesday, 1 October 2014

SARV SANGRAM




Review : ‪#‎सर्व_संग्राम‬ (2014)
Genre : Action-Adventure,Sci-Fi,Mytho
लेखक : नितिन मिश्रा
आर्टवर्क : सुशांत पंडा
इंकिंग: विनोद कुमार
रंग: प्रदीप सहरावत,अभिषेक सिंह
शब्दांकन: मंदार गंगेले
मुख्य पात्र : परमाणु,प्रचंडा,तिलिस्मदेव और शक्ति,अडिग एवं युगम!

Ratings :
Story : 3.5/5
Art : 3.5/5

सर्वनायक श्रृंखला का प्रस्तुत तृतीय खंड अपने पहले आये खंडो की तुलना में सर्वथा अधिक रोचक भी दिखाई दे रहा है और गहरा भी! सर्वदमन के अंत तक आप जान चुके थे..कि युगम द्वारा आयोजित प्रतियोगिता में परमाणु और प्रचंडा बराबरी पर थे! इस भाग में उनके इस द्वन्द का फैसला तो होता ही है तथापि कहानी में अभूतपूर्व घटनाचक्र भी दृष्टिगोचर हुए हैं! आइये जानते हैं कि इस किताब में क्या गूड बातें छिपी हुयी हैं!

‪#‎प्रस्तावना‬:अनश्वरेश्वर
यह शुरुआती 9 पन्नों में है...जो बिलकुल ही अलग कालखंडो में दर्शाई कुछ जटिल घटनाओं की सिर्फ सूचना मात्र तक सीमित हिस्से हैं!
द्वापरयुग में घूमता इतिहास ,वर्तमान में गगन,विनाशदूत और ग्रहणों,और 5099 का बूढा ध्रुविष्य अपनी बेटी के साथ चंडकाल से लड़ते नजर आते हैं! कोई डिटेल लेखक नहीं देते इसलिए ये पन्ने कोई ख़ास टिप्पणी योग्य नहीं है!

‪#‎प्रथम_अध्याय‬ : आत्मशत्रु (काल रण)
कहानी पढने का सबसे मुख्य कारण है यह जानना कि परमाणु और प्रचंडा के बीच आखिर जीत किसकी होती है! यहाँ पर देखना दिलचस्प था कि आखिर लेखक किस तरह से इन दोनों को बराबर रख पाते हैं! और इस बारे में हम लेखक को पूरे अंक देते हैं कि वो सभी को संतुष्ट करने में सफल रहे हैं! परमाणु और प्रचंडा अपने आखिरी पड़ाव में जिस तरह से जूझे और सिर्फ 19-20 के अंतर से इस द्वन्द का विजेता सामने आया! यह सिर्फ लड़ाई ना होकर जिस तरह से पुराने घटनाक्रमों के साथ जुडी परिस्थितियां सामने रखते हुए सब कुछ दिखाया जा रहा है, इसको देखते हुए इस पूरे भाग का लेखन प्रशंषा के योग्य है! लेकिन प्रचंडा के अतीत का हिस्सा अभी भी पूरी तरह से खुला नहीं है! हमें इंतज़ार रहेगा कि लेखक उसको पूरी तरह से सामने लायें!

‪#‎तिलिस्मदेव‬ : शक्ति बड़ी अनजानी है...सपना है, सच है, कहानी है...देखो ये पगली...बिल्कुल ना बदली..यह तो वही दीवानी(महक ) है!
‪#‎शक्ति‬- अक्कड़ बक्कड़ बम्बे बो..80-90 पूरे सौ
सौ जन्मों का प्रण जो लूँ...तिलिस्मदेव हो उड़न छु

तिलिस्मदेव और शक्ति के मध्य हुआ द्वन्द अपितु काफी छोटा था..लेकिन सम्पूर्ण कहा जा सकता है! हमें एक आशंका पहले थी कि जिन पाठको को पूर्व काल के नायको के बारे में जानकारी नहीं है..कहीं उनको कहानी समझने में दिक्कत आ सकती है..लेकिन लेखक ने जिस तरह से पुरानी घटनाओं को दोबारा से स्मरण करते हुए यह प्रतियोगिता दिखाई है..वो अद्भुत सोच का परिणाम है! कौन सोच सकता था कि लेखक चंदा के जीवन के स्याह हिस्से को युगों पुराने तिलिस्मदेव के अतीत से जोड़ देंगे! लेकिन यह करके लेखक ने अपनी उच्च कल्पनाशीलता का परिचय दिया है! हमने यह भाग बहुत पसंद किया है! तिलिस्मदेव और शक्ति के बीच की लड़ाई पर हमारी टिप्पणी यही है कि ये पाठको को कुछ हद तक एक तरफ़ा लग सकती है! जहाँ एक पक्ष ने अपना पूरा पराक्रम दिखाया ही नहीं..और मुकाबला बेमेल सा नज़र आने लगा! पर जिस "पेनल्टी" की बात युगम इसके अंत में करता है..वो शायद आगे प्रतियोगिता का भाग्य बदल दे!
अब अगला द्वन्द है शुक्राल और तिरंगा के बीच !

‪#‎शुक्राल‬: मैं खिलाडी तू अनाड़ी
‪#‎तिरंगा‬ : तू कबाड़ी मैं जुगाड़ी

एक बड़ा पाठक वर्ग मानकर चल रहा है कि यह एक बेमेल मुकाबला होने वाला है जिसमे तिरंगा के जीतने के चांस सिर्फ 10 % हैं! हम भी इस सोच से अलग नहीं हैं! और वैसे भी जिस तरह से शुरू के इन 2 द्वंदों का परिणाम आया है..यह भविष्यवाणी बहुत आसान है कि अगला विजेता कौन होने वाला है! परन्तु लेखक इसको किस तरह से पूरी तरह औचित्यपूर्वक दर्शाते हैं..आगे यह देखना दिलचस्प रहेगा!

तो अब तक आपने जान लिया है कि कहानी के मुख्य बिंदु क्या थे...इनके अलावा कुछ अन्य छोटे हिस्से भी चल रहे हैं...जिसमे एक में नया किरदार "नरकपुत्र रक्ष" जुड़ने वाला है! इसको लेकर सबसे ज्यादा उत्सुकता है..क्यूंकि यह एक ऐसा किरदार लग रहा है..जो आत्मघाती भी हो सकता है!

भीमकाय अडिग के बाद यह दूसरा किरदार इस श्रृंखला की खोज कहा जा सकता है! फिलहाल इसकी सिर्फ एक झलक देखने को मिलती है!
असुरलोक में शम्भुक और शुक्राचार्य कुछ नया गुल खिलाने में चक्कर में हैं..लेकिन महामानव के हिस्से को अभी भी अबूझ पहेली बनाकर रखा गया है!

‪#‎सुपर_कमांडो_ध्रुव‬ : कहानी में ध्रुव अभी तक सारी बागडोर खुद संभाले हुए है...और उसकी सूझबूझ से ही पश्चात काल आगे है...वो अपने सह प्रति द्वंदी शुक्राल और संचालक युगम के हर पैंतरे को विफल करता जा रहा है! लेकिन यह देखना और दिलचस्प होगा कि शुक्राल के सामने तिरंगा को उतारने का उसका निर्णय इस बार किस करवट बैठता है...जिससे ध्रुव अपने आपको किसी भी आक्षेप से बचा सके!

‪#‎समयकाल_की_अनभिज्ञता‬ : सर्वनायक में एक चीज़ जिस पर पाठक अभी ध्यान नहीं दे रहे हैं वो है समयकालो की जानकारी की कमी!
यह प्रश्न अभी उत्तर नहीं खोज पाया है कि आखिर तीनो युगों में चल रहा यह सबकुछ एक साथ ही क्यूँ घटित हो रहा है?

युगम जो कर रहा है वो एक अलग मसला हो सकता है..लेकिन
1- इतिहास का अचानक से एकाएक भूतकाल में पहुँच जाना!
2- महामानव जिस समय काल में है उसका उल्लेख ना होना!
3- हरुओं के बारे वो जानकारी जो कभी वर्तमान के किसी नायक को नहीं रही..उसके बारे में गगन और विनाशदूत को पहले से पता होना!
4- हरूओ की सृष्टि देव और असुर से अलग है! वो उन नियमो को नहीं मानती..जो यह दोनों मानती हैं! कोहराम में आया हरु भी सिर्फ एक उर्जा का रूप था..जिसने मानव का शरीर धारण किया था! वो चाहता तो किसी दूसरे पदार्थ से अपना शरीर बना लेता! खैर महामानव के सामने जो हरु दर्शाए गए हैं..वो भी मानव रूप में हैं! या तो यह एक गलती है...या फिर वो मानव कौन थे जिनके शरीर पर हरूओ का कब्ज़ा है..यह लेखक को बताना चाहिए!
5- पेज 66 पर जो महाखलनायको का जमावड़ा लगा हुआ है..उसका समय काल भी नहीं लिखा गया है! त्रिफना सीरीज के बाद हो रही यह घटना वर्तमान में हुई घटना से पहले कब की है यह बताने के साथ साथ यह भी बताया जाना जरूरी था..कि शाकूरा,सपेरा,मिस किलर,वामन,चुम्बा,ध्वनिराज आदि असंख्य विलेन जो या तो कहीं कैद थे..या अपने ग्रहों पर चले गए थे! एक साथ कैसे कहानी में टपका दिए जा रहे हैं!आखिर हम इन सभी घटनाओं को किस तरह से आपस में जोड़े कि वो पहले आई कहानियों से मेल खा सकें?
6 - अंत में महारावण कहता है कि वो वर्तमान पर कब्ज़ा करने आया है! लेकिन यह निर्णय और जानकारी उसको कैसे हो सकती है कि वर्तमान आखिर है क्या? क्यूंकि महारावण के लिए वर्तमान वो है जिसमे उसने जन्म लिया था..यानी की द्वापर युग! अगर वो कालदूत के समय में अब लड़ने आया है तो यह उसके लिए भविष्य है ना की वर्तमान!
7- एक और अच्छा सवाल है..कि यह मान लिया कि महक का प्रेम युगों युगों से चला आ रहा है और कभी सफलता नहीं पा सका...यह भी सही है कि तिलिस्मदेव अमर हैं...तो अगर लेखक का कथन यह है कि चंदा ही महक का पुनर्जनम् है..तो इसका मतलब यही हुआ कि तिलिस्मदेव भी वर्तमान में जरूर कहीं ना कहीं जीवित होंगे! लेखक ने वर्तमान में मौजूद तिलिस्मदेव को क्यूँ उजागर नहीं किया है!

युगांधर से लेकर अब तक की कहानी में सिर्फ सवाल ही सवाल हैं...और उत्तर देने में कोई प्रोग्रेस नहीं हुई है! इसको हम आलोचना तो नहीं कहेंगे..लेकिन सर्वनायक प्रतियोगिता के अतिरिक्त दूसरी तरफ की सभी कहानियों में जो कुछ भी दिखाया जा रहा है या जाता रहेगा...वो उलझाऊ होने के साथ-साथ मूल कहानी से जुड़ा प्रतीत होने के बाद भी जुड़ा नहीं लग रहा है!
हम एक छोटा सा सवाल और करते हैं..कि सर्वनायक प्रतियोगिता में युगम ने सिर्फ कुछ ख़ास नायको को क्यूँ चुना और बाकी को क्यूँ नहीं चुना?
आईपीएल की तर्ज़ पर खेलकूद प्रतियोगिता जो चल रही है वो हमें भी पता है कहानी का मुख्य केंद्र नहीं है...जिस दिन यह प्रतियोगिता ख़त्म हो जायेगी..उसी दिन दूसरी घटनाओं में जो अबूझ पहेलियाँ हैं..वो सतह पर आकर नए प्रश्न खड़े कर देंगी!
खैर सवाल तो हर भाग में 10 नए बन रहे हैं! अगर लेखक कहानी में साथ ही साथ छोटी छोटी बातों में कुछ के उत्तर भी देते जाएं..तो कहानी ज्यादा मजबूत लगने लगेगी!

एक और तार्किक प्रश्न ने जन्म लिया हमारे दिमाग ने...कि अब तो यह कहानी युगांधर से अब तक 4th पार्ट में आ चुकी है...लेकिन क्या किसी ने ध्यान दिया कि हमारे सभी जोशीले सुपर हीरोज़ ने अब तक इतनी लड़ाइयाँ और कसरत कर ली है...लेकिन युगम ने किसी को पानी तक नहीं पूछा...मतलब कम से कम खाने को ही कुछ दे देता...बेचारे भूखे पेट ही लगातार लडे जा रहे हैं.....इस विषय को ख़त्म करने के लिए एक "सर्व लंगर " का भी आयोजन लेखक को करना चाहिए!

‪#‎आर्टवर्क‬ -

सर्व संग्राम में पिछले भागो कि तुलना में मन को मोह लेने वाला आर्टवर्क है...सुशांत जी और विनोद कुमार जी ने साथ में एक बेहतरीन काम देकर वापस श्रृंखला को जीवंत कर दिया है!
अपितु फिर भी यहाँ उतार चड़ाव मौजूद हैं...35वे पन्ने के बाद आर्ट में गिरावट देखने को मिलती है..फिर 50 वे पन्ने से 65 तक वापस पटरी पर आती है...लेकिन 66वे से वापस डूब जाती है....73वे से अंत तक आर्ट वैसा नहीं रहता जैसा शुरुआत में था!
खैर बीच-बीच में दूसरे आर्टिस्ट्स द्वारा बनाये गए पन्ने बहुत आकर्षक बने हैं! रंग संयोजन भी ठीक ठाक है!
सिर्फ सुशांत जी थोडा और समय लगाकर पूरी किताब में एक जैसा ही चित्रांकन बनाये रखें !

अंत में कॉमिक्स का मनोरंजनात्मक पक्ष :

‪#‎हास्य_पक्ष‬:
वैसे यह कहानी हास्य बोध के लिए नहीं है..लेकिन लेखक ने अपनी तरफ से बीच बीच में कई जगह हास्य का पुट दिया है..युगम जब पेज 44 पर अपने फिल्मों के प्रति प्रेम का प्रदर्शन करता है..तो उसपर परमाणु का कटाक्ष ठहाके लगाने को मजबूर कर देता है!
ऐसे ही युगम द्वारा शुक्राल के ऊपर अवधि को लेकर किये कटाक्ष पर शुक्राल का झेंप जाना और आर्टिस्ट द्वारा दोनों के भावो का सुंदर चित्रण मजेदार है!
ऐसे कई दूसरे पल भी कहानी की सुन्दरता बढाते हैं!

#सर्व_संग्राम में आपको सबसे अधिक मज़ा आर्टवर्क देखने में ही आएगा! इसका तात्पर्य यह नहीं है कि इससे बेहतर नहीं मिल सकेगा...बल्कि यह है कि पहले से आपको बेहतर काम मिला है..इस बात कि ख़ुशी आप महसूस कर सकेंगे!

कहानी के बारे में हमारा यही कहना है कि यह महा श्रृंखला जरूर है..लेकिन अपने मूल से अभी भी अलग है..कोई भी कहानी एक तरफ से शुरू होती है..और एक दूसरी तरफ जाकर खत्म हो जाती है! यह कहानी अब तक ना तो शुरू हुई है और ना जल्दी ख़त्म होने वाली है!
इसमें हो यह रहा है..कि अलग अलग समय में हो रही घटनाओ को एक साथ जोड़कर दिखाया गया है! कहानी वर्तमान में चलती है..और बाकी दोनों काल उसके साथ जुड़ते हैं! यहाँ किसी तरह का कोई नियम मौजूद नहीं है! जैसे चाहे कहानी को चलाया जा रहा है!
पाठको को ख़ुशी यह है कि उन्हें सालो बाद अपने-अपने प्रिय पात्र दोबारा से देखने को मिल रहे हैं! अगर वो एक बार उन पात्रो की आखिरी कहानी और अब दोबारा दिखाई जा रही कहानी के बीच लिंक जोड़ना शुरू करें तो उनके लिए भी हितकर होगा और श्रृंखला के लिए भी!
कहा जाता है कि कहानी को पढने में दिमाग नहीं लगाना चाहिए! बिलकुल सही बात है...कोई भी कॉमिक्स मनोरंजन के लिए पढ़ी जाती है! लेकिन सर्वनायक जैसी कोई भी विस्तृत कहानी को लिखना भी हंसी खेल नहीं है..लेखक ने बहुत मेहनत से इस कहानी को सोचा और लिखा है..उनके प्रयास को पूरा आदर दिया जाना चाहिए! अगर वो आप पाठको के लिए इतना दिमाग लगाकर गूड से गूड तथ्यों पर बारीकी से काम कर सकते हैं..तो उन्ही तथ्यों को आप लोग भी अपने अपने स्तर पर जांचकर संतुष्ट जरूर हों..क्यूंकि यही वक़्त है जब आप चीज़ें बता सकते है,उनपर ध्यान दिला सकते हैं...जो कहानी का अंत आते आते सुलझाई जा सकती हैं. बाकी के प्रश्न-उत्तर तो आगे भी चलते रहेंगे! फिलहाल इस कहानी का लुत्फ़ उठाइये!


Friday, 27 June 2014

SARVDAMAN

कॉमिक रिव्यूः सर्वदमन
मुख्य पात्र: परमाणु,प्रचंडा,
युगम,अडिग
राइटर-आर्टिस्ट- नितिन मिश्रा/धीरज वर्मा
लम्बाई : 94 पन्ने

कहानी:4/5
आर्टवर्क-3/5

जैसा कि हमने सर्वयुगम की समीक्षा में कहा था..कि कहानी शुरूआती हिचकोले खाती हुई अपने अंतिम अध्याय पर जाकर स्थिर हुयी है...तो कहानी वही से आगे बढती है...जिसका पहला पन्ना है-

प्रस्तावना-मुर्दों का मसीहा-
इस अध्याय में दिखते है....प्रेत अंकल वाले इरी के "डिस्ट्रीक्ट की गुफा में हुल्लड़" मचाते सधम...जिसको रोकने में लगे एंथोनी पर पड़ती है, "काउंट" ड्रेकुला की लात!(जो की ताज़ा ताज़ा आया है सभी सिग्नल तोड़-ताड़ के...नर्क वाली गर्लफ्रेंड छोड़ छाड़ के) 2 पन्ने शुरू में 2 पन्ने अंत में.. अध्याय खत्म

प्रथम अध्याय-प्रथम पराजय-

कहानी सर्वयुगम में जहाँ भोकाल-नागराज के द्वंद पर रुकी थी..वहीँ से आगे बढती है...क्यूंकि
"भोकाल का कवच गुलाबी...नागराज की चड्डी गुलाबी!
मैं भी गुलाबी....तू भी गुलाबी...ग्रह भी गुलाबी..गुलाबी यह कहर!!
ऊपर से एक-दूसरे को कूटने और दिल से मोहब्बत के नगमे गुनगुना रहे और एक दूसरे को पटका-पटकी में हराने की जद्दोजहद में एक नायक को विजय मिल ही गयी!
यह भाग पूर्वकाल और पश्चात काल के वीरों के बीच के आपसी मतभेदों को खुलकर सामने लाता है!सभी एक दूसरे से असहमत दिखते हैं!(मैं परेशान..परेशान...परेशान...रंजिशे हैं जवां)
इसी भाग में परमाणु और प्रचंडा के बीच 5 चरण लम्बी प्रतियोगिता भी शुरू होती है!

द्वितीय अध्याय-मृत्यु से परे(भाग-1)
20 पन्नो का यह अध्याय अडिग पर केन्द्रित है....जिसमे वो पिछले भाग का अपना काम यानी..पाषाण राक्षसों से लड़ रहा है...जिसके बाद विस्तृत ब्रह्माण्ड रक्षक उससे द्वंद करते हैं!
कुछ नए सुपर विलेन भी इस भाग से कहानी में जुड़ते हैं!(जो की जीने लगे हैं पहले से ज्यादा)

द्वितीय अध्याय-मृत्यु से परे(भाग-2)
3 पन्नो का यह अध्याय महामानव के लिए है...जो बहुत रहस्यमयी वातावरण में नज़र आया है!
तृतीय अध्याय-पंच तत्व परमाणु-
30 पन्नो के इस अध्याय में परमाणु और प्रचंडा के बीच 3 प्रतियोगिता होती हैं...और विजेता के बारे में जानने के लिए यह भी कम पड़ गया है...अब इन दोनों में "धतिंग नाच" करने का मौका किसको मिलेगा इसके लिए आपको अगले अंक का इंतज़ार करना पड़ेगा!

परिशिष्ट अध्याय-
1 पन्ने के इस अध्याय में पता चलता है..कि भोकाल के मित्रो और भेड़िया के दुश्मनों के बीच लड़ाई शुरू होने वाली है! (क्यूंकि बरबादियाँ...मीठी लगे आज़ादियाँ)

इस पूरी कॉमिक्स में मुख्य बात परमाणु और प्रचंडा के बीच लड़ाई को दिखाना है...लेखक द्वारा दोनों को यथासंभव बराबर का मौका दिया गया...दोनों की कमियां और खूबियाँ सामने रखी गई! कई जगह युगम के असली मकसद की झलक दिखती महसूस होती है...कि यह सभी प्रतियोगिताएं सिर्फ अपना युग बचाने के लिए नहीं अपितु इनका मकसद कुछ और भी है! ध्रुव,नागराज और बाकी नायको के हिस्से में थोडा बहुत ही काम आया है...जो काफी था!

इसके बावजूद यह अभी से नज़र आने लगा है कि पूरी सर्वनायक प्रतियोगिता पहले से फिक्स है...जैसा कि शुक्राल और ध्रुव को अंदेशा है!(लोचा ऐ उल्फत हो गया)..पर यह फ़िक्सर है कौन यह अभी धुंधला है(खुदा खैर है)...जहाँ इस कहानी को पूर्णतया ईमानदार और सिरियस तरह से दिखाया जाना चाहिए...वहां पेज-28 जैसे दृश्य मिलते है...जो कि हास्य हिंडोला स्टाइल में कहानी का मज़ा किरकिरा करते हैं! यह विश्वास के काबिल बात नहीं है कि परमाणु और शक्ति जो की लगभग 15 से ऊपर 2 इन 1 और मल्टीस्टारर में नज़र आ चुके हैं....वो एक दूसरे को अपनी शक्तियों से प्रहार करके अवगत करना चाहते हैं!(खामखाँ) Sugar Daddy बना नागराज अपना एकल निर्णय सुना देता है...और टीम का सबसे कमजोर हीरो तिरंगा सबसे पहले सहमत हो जाता है! (जबरदस्त कॉमेडी)
कहने का तात्पर्य यह है कि सभी हीरोज़ के आपसी व्यवहार में पहले आई कहानियों को देखते हुए सरलीकृत दिखाए...ना की बनावटीपन!

कहानी कुछ प्रश्न छोड़ जाती है...जो शायद आगे पता चले इसलिए फिलहाल उनपर बात करना बेकार है! बात दोबारा कहानी के पात्रो पर लाई जाए!
परमाणु को आयरन मैन की तरह voice Activated Perforater-16 सूट मिलना..और body एक्सपेंशन पॉवर का दोबारा प्रयोग सिद्ध करता है..कि नितिन जी ने पहले पावर्स दे दी हैं..वो भी परमाणु की उन् कहानियों में जो कभी पब्लिश नहीं हुयी और बताया पाठको को बाद में है...यह उनकी लेखन शैली की एक नकारात्मक बात है! अगर देखा जाए तो आयरन मैन की तर्ज़ पर परमाणु को शक्तियां बांटी जा रही हैं...लेकिन यह भुलाया जा रहा है कि "परमाणु" विज्ञान की शक्तियों पर आधारित हीरो है..और विज्ञान की एक सीमा रेखा तय होती है..जिसको पार करा जाए तो वो पराविज्ञान कहलाता है...और कमोबेश परमाणु उसी रास्ते पर चलता नज़र आ रहा है!
आप कैसे इस बात पर भरोसा दिला सकते हैं...कि परमाणु एक छोटी सी पुडिया में पहले Perforater-16 जैसा ऐसा सूट रखे हुए आया है...जो expand करने पर पूरे शरीर को इतनी मोटी परतों में घेर लेता है..जो धरती के कठोर घर्षण के साथ-साथ उस गुरुत्व बल का वेग भी झेल जाएगा जो सतह से नीचे जाने पर लगता है!
इसके बाद दोबारा परमाणु ऐसी ही एक और पुडिया में से Anti-Lava Suit भी निकालता है...जो दोबारा expand करने पर लावे की गर्मी झेल जाता है...वो भी तब जबकि परमाणु ने अपने सिर,पेट और जांघो को नहीं ढका है!
कुल मिलाकर कहा जा सकता है...कि प्रचंडा के सामने परमाणु तिनके के समान ही था...मगर बेईमानी भरी शक्तियों का दोहन करके वो मुकाबले में खड़ा नज़र आता है!(क्यूंकि मम्मी को नहीं है पता)

महामानव को 2 पन्ने इस भाग में देना कहानी में कोई प्रभाव नहीं छोड़ता..(वो यही कह पाया कि इस 2 पन्नो की सुनसान रात में हम...हवन भी कैसे करेंगे)
उसको आगे के भाग में बड़े स्तर पर लाया जाना चाहिए था!

कहानी में एक्शन काफी है..इसलिए इवेंट्स कम हैं! जिस वज़ह से शायद लेखक में कई किरदारों को बीच बीच में फिट किया है! लेकिन इसकी वज़ह से कहानी की रफ़्तार पर बहुत असर पड़ता है...आप पढ़ते हुए हर चीज़ का पूरा मज़ा नहीं ले पाते...क्यूंकि जैसे ही एक जगह पर मज़ा आने लगता है..वहां पर दूसरे इवेंट को शुरू कर दिया जाता है.
उदाहरण के लिए-
1-परमाणु-प्रचंडा की प्रथम लड़ाई जो 38वे पन्ने पर ख़त्म होती है...उसका निष्कर्ष आपको 63वे पन्ने पर मिलता है..बीच में बड़ा लम्बा गैप है!
2-अडिग और किरीगी की लड़ाई भी एक USP बन सकती थी..जो अधूरी रह गई!

वैसे कहानी के Dialogues बहुत शानदार लिखे गये हैं...युगम ने माहौल को हल्का फुल्का बनाये रखा...वहीँ परमाणु ने भी उसके साथ अच्छे शब्द बांटें!...कहानी अब रफ़्तार पकड़ चुकी है...लेकिन अच्छा होता कि प्रचंडा-परमाणु संग्राम का पटाछेप इसी भाग में कर दिया जाता!
4 प्रतियोगिताएं जो अब तक हुई हैं...वो काफी असरकारक थी..बेहतरीन जगहों का चुनाव लेखक ने किया...शानदार तरह से दोनों ने अपनी जोर आजमाइश करी!
 
आर्टवर्क-

सर्वयुगम की तुलना में सर्वदमन का आर्ट थोडा सुधरा जरूर है...लेकिन इसमें धीरज जी का कोई विशेष प्रयास नहीं है...उनका काम पहले की तरह ही है!.. इसको विश्व स्तरीय आर्ट नहीं कहा जा सकता जिसकी उम्मीद हर कोई कर रहा था! सिर्फ किरदारों और बैकग्राउंड की आउटलाइनिंग करी गयी है..बाकी काम और मेहनत करी है...colorist भक्त रंजन जी ने...जिन्होंने यथा संभव पेंसिलिंग को संभाला है...खैर इतना तय हो गया कि बिना इंकिंग का आर्ट धीरज जी को सूट नहीं करता है! उम्मीद है आगे सुशांत जी शायद इस सीरीज को नयी ऊर्जा देंगे !
अगर इस कॉमिक्स का कोई चित्रकार है तो वो भक्त रंजन हैं! नीरू जी का शब्दांकन है!
सर्वदमन में आपको दमनकारी आर्ट तो नहीं मिलेगा..और ना ही कहानी में कोई असाधारण चीज़ मौजूद है...सिवाय परमाणु और प्रचंडा की लड़ाई और कुछ भूले-बिसरे किरदारों की मुहं दिखाई के अलावा! इस बीच के हिस्से को कहानी के साथ चलने दीजिये!
अगले अंक के इंतज़ार में इतिश्री!

Tuesday, 28 January 2014

SARVYUGAM

सर्वयुगम के द्वारा सर्वनायक की मुख्य शुरुआत आपके हाथो में पहुँच चुकी है! युगांधर के बाद सर्वयुगम को पाने का ज्यादा इंतज़ार तो नहीं करना पड़ा लेकिन इस छोटे से समय में ही मन निरंतर उद्देलित बना रहा कि कैसी होगी सर्वयुगम?कौन कौन किरदार होंगे?कैसे कहानी की शुरुआत होगी? भूत-वर्तमान काल के नायकों का आमना-सामना किस प्रकार होगा? युगम कौन है? क्या पाठकों के सबसे पसंदीदा नायक को कहानी में वज़नदार काम मिला होगा? सवालों की लिस्ट बहुत लम्बी है..तो अब वक़्त है जवाबो को पाने का! इतनी बड़ी श्रंखला के अंत तक पहुंचना अभी किसी पाठक के लिए मुमकिन नहीं है..कहानी को चलने दिया जाना चाहिए और ध्यान कहानी में हो रही घटनाओं और हलचलों पर केन्द्रित करिए! इसमें लेखक ने भी सहायता करी है-सभी भागों को अलग-अलग खण्डों में विभाजित करके! जिससे समीक्षा करना आसान बन गया है!

*प्रस्तावना-उत्

पत्ति सूत्रधार
यह सर्वयुगम का पहला और छोटा सा खंड है! इसमें ज्यादा कुछ नहीं है..सिर्फ इतना पता चलता है कि कॉमिक्स में “अडिग” भी मौजूद है!

*प्रथम अध्याय –गर्भ ग्रह
कहानी की मुख्य शुरुआत इस अध्याय से हुई है! वर्तमान में धरती पर अन्तरिक्ष से एस्टेरोइड बेल्ट्स का आक्रमण हो गया है! वज़ह और किसकी कारस्तानी है..यह अभी किसी को नहीं पता...पता सिर्फ इतना है कि 8 घंटे में धरती का नामो निशाँ मिल जाएगा!
ब्रह्माण्ड रक्षको को तब गर्भ गृह के बारे में वैज्ञानिक बताते हैं...जो कुछ ऐसा है- कि पृथ्वी के “आंतरिक कोर” के ऊपर एक ऐसा गर्भ गृह बना दिया गया है..जिसमे पूरी पृथ्वी की जनसँख्या समा सकती है!
सवाल उठा- किसने बनाई ? जवाब आया- अकेले परमाणु और शक्ति ने प्रोबोट और वैज्ञानिकों के साथ मिलकर!
प्रोबोट एक रोबोट है...उसके अन्दर जितना ज्ञान है...वो प्रोफेसर कमल कुमार वर्मा का तब का ज्ञान है...जब वो कोमा में चले गए थे..रोबोट में तर्क शक्ति नहीं होती है..कमांड्स पर काम करता है....पर प्रोबोट के मामले में सब उल्टा चलाया जा रहा है!
अनुपम सिन्हा जी ने “कोलाहल” में एक चीज़ दिखाई थी कि परमाणु ने एक ऐसा एंटी लावा सूट पहना जो 30 मिनट तक लावे की गर्मी को सहने के बाद गल जाएगा! पॉवर दी गई मगर conditions apply* के टैग के साथ! यह चीज़ मुमकिन भी थी और मानी भी जा सकती है!
मगर सर्वयुगम में लेखक ने परमाणु को एक ऐसा सूट दिया है..जिसपर कोई conditions apply* नहीं करती हैं...यह “विशेष सूट” कुछ नहीं मांगता है..ना कोई कूलिंग डिवाइस,ना कोई ऐसा प्रतिरोध जिससे यह दिनों..महीनो तक बिना जले या गले टिक गया है!
RC में पहले वैज्ञानिक सिद्धांतो का आदर होता था...बच्चे कॉमिक्स पढ़कर विज्ञान के करीब आते थे...लेकिन अब रोहित शेट्टी की फिल्मों की तरह विज्ञान का मखौल उड़ाया जा रहा है! पृथ्वी के “आंतरिक कोर” तक जाने के लिए क्या तकनीक चाहिए इसके लिए सभी पाठको को एक फिल्म THE CORE जरूर देखनी चाहिए! वरना सर्वयुगम वाली तकनीक उन्हें भ्रमित कर देगी!
शायद यही तक लेखक रुक जाते तो बात संभल जाती...मगर अगले ही पैनल में एक नयी पॉवर बताई गई...Ultra Cold Atoms ! इनकी विशेषता है कि यह लावे तक को ठंडा करने की ताकत रखते हैं! ख़ास बात यह कि इन atoms की सक्रियता को लेकर भी कोई समय सीमा या condition नहीं है...एक बार शक्ति के बनाये धातु के गर्डर पर चढ़ा दिए तो ज़िन्दगी भर चलते रहेंगे!
तो यह थी गर्भ गृह के साथ इस कहानी की खोखली नींव!
इधर सुपर कमांडो ध्रुव दिल्ली से हिमालय की कंदराओं में बैठे समाधी लगाये किरीगी को मानसिक संपर्क कर रहा है?????
नयी पॉवर वाला ध्रुव?
आज मानसिक संपर्क कर रहा है...कल मानसिक विस्फोट करेगा? सीरियसली परमाणु कि जग प्रसिद्ध बर्बादी के बाद अब ध्रुव का ही नंबर लगा दिख रहा है....specials और showstopper की छिछालेदार के बाद अब लगने लगा है अनुपम जी के हाथो में ही ध्रुव सुरक्षित है...वही उसको पुराना रूप दे सकते हैं!
मसीहा पागलखाने से भागकर तो आ गया..पर दण्ड कहाँ से लाया? कृपया आगे के भागो में जरूर बताएं!
उपरोक्त बातों को कॉमिक्स में पढ़कर जिन पाठको को भरपूर मनोरंजन प्राप्त हुआ हो...वो आनंद लें...बाकी आइये द्वितीय अध्याय पर

* द्वितीय अध्याय-पूर्वजों
की धरती (प्रथम भाग)
विशेषता-इस भाग में स्वर्ग हेतु वाला मुद्दा ही चल रहा है...योध्धा को धकमानघन की प्राप्ति कैसे हुई और शुक्राल के साथ कैसे युगम ने उसको उठाया!

* द्वितीय अध्याय-पूर्वजों
की धरती (द्वितीय भाग)
विशेषता-इस भाग में भेड़िया और गरुडा के साथ अतिक्रूर और शूतान का अधूरा और अनसुलझा टकराव है...और भेड़िया का युगम द्वारा अपहरण!

*तृतीय अध्याय-क्षुद्र ग्रहों का आक्रमण
विशेषता- इस भाग में ध्रुव अपने साथियों के साथ कुछ अच्छे रणनीति पूर्ण कार्य करता नज़र आया है...तिरंगा को भी एक मैनेज़र का रोल मिला है...जो रणनीतिकार बना हुआ है!
कहानी अच्छी भली चल रही थी..कि अचानक से परमाणु ने दोबारा नयी पॉवर निकाल ली-मॉलिक्यूलर एक्सपेंशन ----इसका काम है परमाणु को वामन अवतार दे देना!
यह कब मिली..क्यूँ मिली और कैसे मिली? यह उल्लेखित नहीं करा गया है...परमाणु को नागराज के बड़े शरीर की बराबरी करनी थी तो कर ली!
परमाणु के इस झटके से पाठक अभी उबर भी नहीं पाए थे...कि नागराज बोल पड़ा “मैं अपनी इच्छाशक्ति से ब्लैक होल” बनाऊंगा!
क्या कहा जाए? शायद अगले भाग में यह दोनों परमाणु और नागराज नया ब्रह्माण्ड ही बना देंगे!
तो यहाँ तक इन “असंभव”,”एवें ही”,”कुछ भी” जैसे कारनामो से अपने प्रिय सुपर हीरोज़ को जीतते देखकर अपना सिर धुन रहे पाठको को अंतिम अध्याय अपने पास बुला लेता है!

*चतुर्थ अध्याय- युगम क्षेत्र
यह अंतिम अध्याय ना होता तो यह कॉमिक्स कंपकंपा कर बिखर गई होती..यही एकमात्र हिस्सा ऐसा है...जो कहानी को वापस ट्रैक पर लाकर पाठको को राहत देगा!
युगम का किरदार बहुत प्रभावशाली है! वो सुसंस्कृत है...महान ज्ञाता और अपराजित भी!
इस भाग में सभी नायको और युगम के बीच में बहुत अच्छे तर्क और सवाल होते हैं!
सर्वयुगम का अंत होता है...भोकाल और नागराज के बीच प्रतिस्पर्धा की शुरुआत के साथ!
युगम धरित्री अस्य:

आप सभी ने सर्वयुगम का एक संछिप्त सारांश पढ़ लिया..अब बात लेखन की! नितिन मिश्रा जी ने जो काम “तक्षक” नाम की महत्वहीन कॉमिक्स में किया था वही सर्वयुगम में भी दोहराया है! एक्शन सीक्वेंस में किसको,कैसे जीतना है,कैसे काम करवाने हैं...इसपर मेहनत और जोर नज़र नहीं आता है! कागज़ी बातों में सभी किरदार बहुत अच्छे संवाद बोल रहे हैं....लेकिन ज़मीनी लड़ाई में उल जलूल प्रयोग हो रहे हैं...कौन कैसे जीत रहा है..कैसे हार रहा है.. कौन कब आया...पिटकर कहाँ गया...जिंदा है की मर गया..इसके बीच में ना सामंजस्य है..और ना ठोस आधार!
इस बात को दृष्टिगत रखते हुए राज कॉमिक्स से निवेदन है कि सर्वनायक सीरीज की वृहद और विस्तृत कथावस्तु को देखते हुए आगे के भागों में श्री अनुपम सिन्हा,तरुण कुमार वाही,विवेक मोहन,और खुद संजय गुप्ता जी एक्शन सीक्वेंस में रचनात्मक सहयोग दें जिससे ऊपर लिखी गई कमियों को यथासंभव दूर करके सर्वनायक को सफल बनाया जाए!

सर्वयुगम की गति ऐसी है-शुरूआती 4 पन्ने बहुत तेज़ी से चलते हैं...फिर संवाद...उसके बाद पेज 19 से ज़मीनी कार्य आरम्भ जो भागा दौड़ी में इस युग से उस युग तक चलते जा रहे हैं...पूरी तरह से एक्शन! अंत में पेज 70 से एक बार फिर संवाद जो अंत तक चलता है!

कहानी-2.5/5
आर्टवर्क-2.5/5

धीरज वर्मा जी का आर्टवर्क सर्वयुगम में है! लेकिन वो धीरज जी नहीं..जो कभी लड़ाके,तुरुपचाल,
मैं हूँ भेडिया या मर्द और मुर्दा के लिए जाने जाते थे! यह बात सच है...कि सर्वयुगम के आर्टवर्क का स्तर वैसा कतई नहीं है..जैसी हर पाठक उम्मीद कर रहा था!
आर्टवर्क का सारा कमाल इसके कलर इफेक्ट्स में छुपा हुआ है...
वरना गौर से देखेंगे तो इसमें rough out lining work के अलावा कुछ नहीं है! पेंसिल की detailngs तो दूर फिनिशिंग तक नहीं हुयी है!
उदहारण के तौर पर देखिये नागराज को जिसके शरीर से जालीदार शल्क गायब हैं...सतयुग में आइये योध्धा के आर्ट पर-सूखी घास के तिनको के समान आर्ट में से कई लाइन्स बाहर निकलती जा रही हैं! परमाणु के ऊपर तो इतने पेंसिल स्ट्रोक्स किये गए हैं...कि उसकी पीली पोशाक मकड़ी के जालों से ढकी नज़र आ रही है!
ऐसा आर्टवर्क इंकिंग के बिना कहीं भी नहीं ठहरने वाला! अब यह राज कॉमिक्स के ऊपर है कि वो कितना वक़्त लगाएगी इस चीज़ पर ध्यान देने में..क्यूंकि धीरज जी के साथ उसका भी नाम खराब हो रहा है!
सर्वयुगम के आर्टवर्क को इसके इफेक्ट्स ने बचा लिया है..जिस स्तर का आर्ट बना है....उसके लिए इफ़ेक्ट आर्टिस्ट्स को पूरे अंक दिए जा सकते हैं..उनकी मेहनत के बिना यह कॉमिक्स पार नहीं लग पाती!
शब्दांकन नीरू जी का है!

कॉमिक्स के मजबूत पक्ष-
*सिर्फ कॉमिक्स का चतुर्थ अध्याय
कॉमिक्स के कमजोर पक्ष-
*अनगिनत (उपरोक्त लिखित हैं)टिप्पणी- अति सुधार व उपचारात्मक सोच और काम की आवश्यकता!

overall सर्वयुगम अपने पिछले भाग युगांधर की आधी प्रतिष्ठा भी बचा नहीं पाई है! यह दुःख का विषय है कि इतनी बड़ी और इंतज़ार वाली कॉमिक्स के अन्दर ऐसा हुआ! राज कॉमिक्स आगे के भागो में ज्यादा सूक्ष्म दृष्टि से मेहनत करे!

Tuesday, 1 October 2013

YUGANDHAR

Review- “युगांधर”

“सर्वनायक” श्रृंखला का “आधार खंड” “युगांधर” आपके समक्ष प्रस्तुत है! एक कालजयी रचना की यात्रा के प्रथम पड़ाव को पढना अपने आप में जरूरी भी होता है और रोमांचक भी! आगे के चाहे कितने ही खंड क्यूँ न पढने को मिलें,लेकिन प्रथम और अंतिम खंडो का महत्त्व अलग ही होता है!
नाम से जाहिर है कि यह युगों की सीमाएं लांघ कर लिखी गई कहानी है! युग साल की तरह नहीं होते हैं,जो पृथ्वी के सूर्य का एक चक्कर, एक बार में लगाने पर पूरा हो जाता है,युग होते हैं,अनंत सालो का एक मिश्रण,जिसमे एक बार में एक सभ्यता,संस्कृति बनतीहै,बिगडती है,बदलती है और याद रखी जाती हैं! इसलिए कहानी को अगर पढना है,तो सोचना भी उसी तरह से होगा,ताकि कहानी में डूबा जा सके!

कथा-
“युगांधर” को लिखा है नितिन मिश्रा और तरुण कुमार वाही जी की कलमों ने! शुरुआत एक अच्छे और सही अंदाज़ में प्रस्तावना पृष्ठों से हुई है,जिसमे इस भाग के 4 पात्रों युगम,योध्धा,भोकाल एवं अडिग का संक्षिप्त परिचय मिलता है! इसके बाद का एक पृष्ठ भूतकाल v भविष्यकाल के महा योध्धाओ को दिखाया गया है!
युगांधर की कथा मुख्यतः दो राह पर चलती है!
प्रथम है-दिति पुत्र योध्धा की कहानी जो स्वर्ग हेतु प्रतियोगिता के आरम्भ पर ठहरी हुई थी! वहीँ से आगे बढती है!
दूसरी-महाबली भोकाल की,जो अपने असली पिता की खोज में एक दुर्गम यात्रा पर निकला है! यानी पहले पाठको को “धिक्कार” व “अंतर्द्वंद” पढनी बहुत जरूरी है!
इसके बाद कुछ दूसरे महानायकों को थोडा स्थान कहानी में मिला है!

*भोकाल-
शवमित्र को साथ लिए हुए “भोकाल-शक्ति” का असली अधिकारी साबित होने के बाद भोकाल टकरा गया है साक्षात मौत के परकालो से! यहाँ जीतते ही वो युगम के चंगुल में खुद को घिरा पायेगा! परन्तु यह तो होना ही था ,इसलिए यह महत्वपूर्ण नहीं है!
पाठको के लिए महत्वपूर्ण है भोकाल की उत्पत्ति के पीछे का सच उजागर होना,जो उन्हें आश्चर्यचकित और भौचक्का करके रख देगा! जो कई नए रहस्योदघाटन खुद में समेटे हुए है! लेखको के द्वारा भोकाल की उत्पत्ति के घटनाक्रम बदलने के साथ कई नए तथ्य जोड़े गए हैं!पाठको को भोकाल के जीवन से जुडी कई जरूरी जानकारियाँ यह कॉमिक्स देती है!

*योध्धा-
मुख्यतः “युगांधर” में कहानी स्वर्ग हेतु प्रतियोगिता में दैत्यों और देवताओं के अपनी-अपनी तरह से प्रतियोगिता की शर्तें पूरी करके जीतने की लालसा पर केन्द्रित है,जिससे स्वर्ग की स्थापना के योग्य उम्मीदवार का चयन हो सके! यह भाग अपने पिछले भागों (आरम्भ,सूर्यांश,सृष्टि,स्वर्ग पात्र) से जुडा होने के कारण तभी समझ आएगा जब पहले घटित हो चुके घटनाक्रम का पूरा ज्ञान पाठक को हो,वरना नहीं!
स्वर्ग हेतु प्रतियोगिता में भाग ना लेने पाने की मजबूरी के चलते योध्धा को कॉमिक्स में मुश्किल से सिर्फ 7-8 पन्नों की जगह मिली है! युगांधर में उसका होना फिलहाल नगण्य था! कहानी उसके चारो ओर नहीं घूमती! परन्तु पाठको को दैत्य-देवताओं के बीच आँख मिचोली लगातार होते षड़यंत्र पढने में मज़ा आएगा,खासकर “राहू प्रकरण” उन्हें आनंदित करने की क्षमता रखता है!
यहाँ एक चीज़ रेखांकित कर दें कि योध्धा अभी भी युगम के चंगुल से बाहर है!

पेज-68 शुक्राल को समर्पित किया गया है! उसका रोल छोटा सा होने के बावजूद भी रहस्यों की आंधियां छोड़कर चला गया है!

पेज-70-77 तक तिलिस्मदेव,अश्वराज,गोजो,प्रचंडा अपने समय में लड़ते लड़ते युगम के सामने पहुँच चुके हैं!

तो पाठक समझ सकते हैं कि कहानी में कम जगह में ज्यादा से ज्यादा चीज़ें दिखाई गयी हैं!
कहानी यहाँ पर ठहरी सी लगती है..पर यह तूफ़ान से पहले की शान्ति जैसा था! कॉमिक्स का तीसरा हीरो और राज कॉमिक्स में पर्दापर्ण कर रहे श्राहू दानव “कुमार अडिग” एक स्त्री की अस्मिता की रक्षा करते हुए अवतरित होते हैं! अडिग एक तूफ़ान की तरह लगता है,ऐसी एंट्री शायद कम ही हीरो कर पाए हैं!

फिलहाल कहानी रुक चुकी है एक ऐसे मोड़ पर,जो अगले भाग का लम्बा इंतज़ार और ज्यादा कष्टकारी बना देती है!
कहानी में अभी भी बहुत कुछ ऐसा है,जो कि लेखक के द्वारा खोला नहीं गया है, खासकर भोकाल वाली कहानी अभी भी काफी रहस्य खुद में बचाए हुए है!इसलिए आगे के अंको का इंतज़ार सभी को करना ही पड़ेगा! योध्धा वाली कहानी तो शायद अभी काफी लम्बा समय और ले सकती है,और यही कुछ अडिग के लिए लग रहा है!

“युगांधर” के बारे में पाठकों को यह ध्यान देना बहुत जरूरी है,कि यह कॉमिक्स बहुत लम्बे समय और मेहनत के बाद बनी है! पहले यह जहाँ सिर्फ भोकाल प्रकरण तक सीमित थी,जिसमे बाद में “स्वर्ग हेतु” नामक कहानी को जोड़ा गया,फिर समावेश हुआ अडिग का और तब यह सर्वनायक का आधार बनकर आपके हाथो में पहुंची है!

“युगांधर” बाकी मल्टी स्टारर की तरह नार्मल कहानी नहीं है,जिसमे एक ही कहानी में कई हीरो किसी एक लक्ष्य के लिए साथ होते है! बल्कि फिलहाल यहाँ हाल-फिलहाल कोई भी नायक एक दूसरे के बारे में जानता ही नहीं है!
“पाठको को सिर्फ यह ध्यान रखना है, कि कई अलग अलग कालों के अलग घटनाक्रमों को खलनायक के द्वारा एक ही साथ दिखाना इसका मुख्य सूत्र है!”

कथा-4.5/5
चित्रांकन-4/5

ललित सिंह और नितिन मिश्रा जी “युगांधर” के चित्रकार हैं! मुख्यतः काम नितिन जी का है!
प्राचीन,पौराणिक कहानियां होने के कारण नितिन जी को साधारण पेंसिलिंग के बाद भी 2 चीज़ों का फायदा मिल गया है!
पहली चीज़ कॉमिक्स में कलरिस्टों द्वारा दिए गए उम्दा कलरिंग इफेक्ट्स! जिन्होंने आर्ट की कमियां छुपाने में मदद करी!
दूसरी चीज़ कहानी की मांग ही चूँकि बदसूरत चेहरे और भद्दे शरीर वाले दैत्य,दानव थे, इसलिए उनके भावहीन चेहरे और शरीर, जैसे भी बने, कहानी में फिट आ गए! बचे खुचे पहाड़,अंतरिक्ष आदि इफेक्ट्स पर निर्भर होने के कारण ज्यादातर चीज़ें संयोग से सही बैठ गयीं हैं! नितिन जी को आर्टवर्क पर थोडा और ध्यान देना चाहिए! आर्ट में जहाँ भी मूर्ती जैसे भावहीन और पत्थर की तरह शरीर के आकार नज़र आते हैं,वो नितिन जी का काम है! कॉमिक्स के अंत के लगभग सभी पन्ने जिसमे अडिग प्रकरण के अलावा तिलिस्मदेव,अश्वराज,गोजो,प्रचंडा जुड़े हैं वो सभी नितिन जी के हैं! वहीँ भोकाल प्रकरण के शुरूआती पन्ने ललित जी के हैं! बीच में कहानी की जरूरत के अनुसार आर्टवर्क स्विच करता रहता है! इसलिए अंतिम तथ्य यही है की आर्टवर्क एक जैसा नहीं मिलता है!
ललित सिंह भी अपने “गुरु भोकाल” जैसे स्मरणीय काम की छटा दोबारा पाठको को नहीं दे पाए! उनके द्वारा भी सिर्फ संतोषजनक और इफेक्ट्स पर निर्भर आर्टवर्क मिला है! फिर भी दिलीप कदम जी के बाद वो भोकाल के आर्टवर्क के लिए अब भी सबसे बेहतर चुनाव हैं!

कलरिंग इफेक्ट्स-
अपनी कहानी के बाद यह कॉमिक्स अगर याद किये जाने लायक है तो वो है इसके कलरिंग इफेक्ट्स! जो की भक्त रंजन व अभिषेक सिंह के द्वारा किये गए हैं!
प्राचीन,पौराणिक कथाओ के आर्टवर्क को जीवित बना देना आसान काम नहीं है! जिस तरह से दोनों ने हर फ्रेम में मेहनत करी है,वो अभिभूत करने वाली है!
पेज-10,14 के आकाश व अंतरिक्ष देखिये या पेज-67! हर जगह जीवंतता का एहसास नज़र हटने नहीं देता है! यह पाठको को पूरी कॉमिक्स में देखने को मिलेगा!

नीरू जी के शब्दांकन के बिना बात अधूरी रह जायेगी! शब्द ही कहानी को समझाते हैं और जहाँ बात नहीं होती,वहां वातावरण में मौजूद दूसरी आवाज़ें सहायक बनती हैं! यहाँ पर कैलिग्राफर की ज़िम्मेदारी बढ़ जाती है कि कैसे वोह हर दृश्य को पढने वाले को समझा पायेगा! पेज-9,10 इस चीज़ का सटीक उदाहरण दिखाते हैं!
पूरी कहानी बहुत सुंदर तरीकों से शब्दांकित हुई है!

टिप्पणी- “युगांधर” एक उत्कृष्ट कॉमिक्स है! इसमें एक जानदार कहानी है,चित्रांकन साधारण है,लेकिन उसको असाधारण बनाने की ताकत रखने वाले कलरिंग इफेक्ट्स हैं,जिन्हें शब्दांकन का भरपूर सहारा मिला है! यह प्राचीन कथा प्रेमियों के लिए संकलित करने योग्य विशेषांक है! कुल मिलाकर सर्वनायक की शुभ शुरुआत हुई है!