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Thursday, 25 April 2013

WORLD WAR


Overall rating 
 
3.5
story 
 
4.0
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3.0



नितिन मिश्रा कृत आर्डर ऑफ़ बेबल (आतंकहर्ता नागराज सीरीज) का तीसरा भाग “वर्ल्ड वार” आपके सामने है! जैसा कि नाम से ज़ाहिर होता है,इस कहानी के सभी पन्ने.. बम के धमाको ,गोलियों की आवाजों और खूनी संघर्षो से ही भरे हुए हैं! हर कोई सिर्फ मार काट में लगा हुआ है !नागराज भी पूरी तरह से रौद्र रूप धारण कर विश्व शान्ति के लिए कृतसंकल्प हो चुका है!
कहानी -

“वर्ल्ड वार” की कहानी अब बहुत तेज़ और रोमांचक मोड़ पर जा पहुंची है यानी बहुत सारे सवालों के चौंकाने वाले जवाब मिलने की उम्मीदें हैं !नागराज के सिर के ऊपर कोई अदृश्य मौत लटक रही है जिसका उसे आभास भी नहीं है! इस विश्व युद्ध को रोकने के लिए कई देशो में भटकता हुआ नागराज आगे पूरे नागद्वीप से भी टकराने की राह पर चल चुका है जिसका अंत अंतिम भाग वीरगति में पता चलेगा!
न्यू वर्ल्ड आर्डर पढ़ चुके पाठक जान चुके हैं की नागराज “आर्डर” खोज चुका है..और अब वो जूझ रहा है..आर्डर खोज लिए जाने के बाद बदल चुके घटनाचक्र को विश्व शान्ति की तरफ मोड़ देने के लिए..लेकिन अब यह सवाल सिर्फ मानवो की रक्षा तक सीमित नहीं है..बल्कि इसके कुछ धागे जुड़े हैं...नागजाति से भी..नागराज का फ़र्ज़ उसे दोराहे पर लाकर खड़ा कर चुका है!
पाठको के लिए सुखद आश्चर्य है शांगो जैसे नागराज के परम मित्र को 20 साल बाद दुबारा देखना! दुबई में रुएबा खातून को भी हरम में जाने से नागराज को बचाना है..जी हाँ वो भी सालो बाद नज़र आई है....इसके अलावा एक पुराने खलनायक विलियम को भी अहम् रोल मिला है..नागद्वीप,पंचनाग ,विसर्पी और नागराज के शरीर में वास करने वाले सभी नाग..सौडांगी,शीतनागकुमार,नागू आदि महत्त्वपूर्ण पात्र भी कहानी में नज़र आते हैं...जो वीरगति में जारी रहेगा!

अभी तक 3 भागो में कहानी किसी रैपिड फायर राउंड की तरह से सिर्फ सवाल पर सवाल छोड़े जा रही है...जिसके जवाब देने के लिए लेखक को कोई जल्दी हो, ऐसा अभी तक नज़र नहीं आता...बहरहाल उम्मीद यही है की अंतिम भाग जवाबों का बही खाता ना बना दिया जाए...क्यूंकि कहानी में जब अधिक सवाल होते हैं तो कुछ के जवाब छूट जाने का खतरा बन जाता है!
लेखक की शैली कहानी को लगातार सवालों के घेरे में जकड़े रखने की है...इन् सवालों से घिरे हुए कहानी के सभी पात्र जिस दिशा में लड़ते जा रहे हैं...उन्हें पूरी तरह से जानने वाले लोग कहानी में ही छुपे हुए हैं जो नज़र आते हुए भी लुप्त हैं...यह देखकर अच्छा लग रहा है की शक के घेरे से कोई भी पात्र अभी तक बाहर नहीं है.

कहानी से जुड़े कई अहम् सवाल जो महत्व रखते हैं और अभी तक अबूझ पहेली बने हुए हैं...राज कॉमिक्स उनपर ध्यान रखे और कहानी की जटिलताएं अंतिम भाग में पूरी तरह से खत्म करे!

आर्टवर्क –

पेंसिल –हेमंत कुमार जी ने वर्ल्ड वार में सचमुच जर्मनी में लड़ी जा रही लड़ाई और असली युद्ध भूमि का एहसास कराया है! एक्शन सीन कमाल के बने हैं! लेकिन कई जगहों पर नागराज को ज्यादा लम्बा दिखाने के चक्कर में साइड इफ़ेक्ट ऐसा हुआ है की नागराज बांस जैसा सीकड़ी नज़र आ रहा है! हेमंत जी से गुजारिश है कि नागराज को पहले आई हुयी कॉमिक्स जैसा हृष्ट-पुष्ट बनाएं..तेज़ हवा में इधर से उधर उड़ते किसी हरे पत्ते जैसा नहीं!

इंकिंग – इसमें ईश्वर आर्ट्स द्वारा राज कॉमिक्स में करी गयी पहली इंकिंग है और आर्टवर्क की पहली कमजोर कड़ी भी! जगदीश जी की तरह वो हेमंत जी की नागराज सीरीज़ के अपने इस पहले काम पर निखार नहीं ला सके! पहले 2 पार्ट्स की तुलना में इंकिंग का स्तर नीचा रह गया है...फिर भी पहले काम की वज़ह से उम्मीद है ईश्वर जी आगे उल्लेखनीय सुधार करेंगे!

रंग- राज कॉमिक्स के कथ्य अनुसार वर्ल्ड वार में हुए रंगों को फ्लैट कलरिंग की उपाधि दी गयी है...जिससे हम व्यक्तिगत रूप से सहमत नहीं हैं! पहले तो तक्षक के बाद भी लगातार दूसरी कॉमिक्स में इस तरह के स्तरहीन रंगों का उपयोग किया जाना बेहद दुखद है..राज कॉमिक्स का कहना है की यह पाठको की मांग पर किया गया फैसला है....हो सकता है यह कुछ लोगों की राय हो..लेकिन राज कॉमिक्स को अपने बाज़ार में बने हुए नाम और स्तर के मुताबिक़ सोचना चाहिए की आज 2013 में प्रतिस्पर्धा के माहौल में जब कई दूसरे पब्लिकेशन डिजिटल कलरिंग में नए आयाम स्थापित कर रहे हैं...वहां बैकगियर में राज कॉमिक्स 1990 में क्यूँ जा रही है??
वर्ल्ड वार में युद्ध के माहौल में जब जानदार इफेक्ट्स की जरूरत थी वहां निस्तेज से रंगों का उपयोग गया है..अगर पुरानी कॉमिक्स से तुलना करें तो फ्लैट्स में भी हार्ड कलर किया जाता है...जहाँ रंग में शेड्स की जरूरत होती है वहां उपयोग करके वातावरण के हिसाब से आर्टवर्क बनाया जाता है...लेकिन पहले आई तक्षक और अब वर्ल्ड वार में ऐसा कुछ नहीं है...हल्के रंगों का उपयोग और वातावरण का ध्यान ना रखते हुए सिर्फ सफ़ेद पन्नो को रंग दिया गया है!
1990 की बात और थी तब सुविधा नहीं थी...लेकिन आज राज कॉमिक्स जैसी भारत की अग्रणी कॉमिक्स कंपनी अपनी मार्केट वैल्यू को ध्यान में रखते हुए इतने घातक समझौते ना करे और कॉमिक्स में डिजिटल इफेक्ट्स को दोबारा शुरू करवाएं!

इस सीरीज के पहले 2 भाग ”आर्डर ऑफ़ बेबल” और “न्यू वर्ल्ड आर्डर” अपने आप में पूर्ण थे!”वर्ल्ड वार” कहानी के लिहाज़ से अच्छी जा रही है...लेकिन आर्टवर्क डिपार्टमेंट में अलग अलग हिस्सों की कमियां इसे पहले के दोनों भागो से कमतर बना देती है!उम्मीद है राज कॉमिक्स कमियों पर ध्यान देगी! राज कॉमिक्स के भविष्य के प्रति आशावान रहते हुए वर्ल्ड वार पढ़िए और वीरगति का इंतज़ार कीजिये!

RAKHT BEEJ

Overall rating 
 
4.0
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4.0
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4.0



RC ने 3 in 1 multistarrer रक्तबीज बहुत लम्बे समय के बाद रिलीस करी है,इसलिए पाठको की उम्मीदें भी इसके लिए बहुत ऊंची थी !राज कॉमिक्स ने रक्तबीज को डोगा की कॉमिक्स की तरह से प्रचारित किया था,लेकिन यह कॉमिक्स भेड़िया की है!
कवर पर अकेली डोगा की तस्वीर का होना, उसके नाम को पहले लिखा जाना पाठको को भ्रमित कर गया !आश्चर्यजनक रूप से यदि परमाणु का रोल भी देखा जाए तो डोगा से सिर्फ 19-20 का फर्क है !

कहानी को ज्यादा अच्छी तरह से समझने से पहले पाठको को भेड़िया सीरीज की दो पुराणी कॉमिक्स "गजारा " और "मौत मेरे अन्दर " का रसास्वादन करना पड़ेगा!कहानी का मुख्य खलनायक भी भेड़िया सीरीज से ही है ,कहानी का केंद्रबिंदु भी आसाम में रखा गया है!
कहानी पूरी तरह से एक्शन है !परजीवी संक्रमण जो एक के मरने से ख़त्म होने की जगह गुणन करता हुआ अनगिनत समरूप बना लेता है!इसी को रक्तबीज नाम से इंगित किया गया है! इसमें multistarrer कॉमिक्स का पुराना स्वाद मौजूद है!कहानी भी सिंपल भाषा में है,ज्यादा दिमाग नहीं घुमाएगी !

>भेड़िया >कहानी का मुख्य नायक हमारा जंगल का जल्लाद है!भेड़िया अपनी वही बरसो पुरानी खूंखारता और दुश्मन को फाड़ खाने वाले तेवरों के साथ मौजूद है !यह कहानी उसी वक़्त की झलक देती है जो राज कॉमिक्स का स्वर्णिम काल था!
>परमाणु >परमाणु का कहानी में सशक्त और काबिलेतारीफ काम है!उसे कुछ नयी शक्तियां दी गयी हैं जो काफी काम आई हैं!कहानी में उसके होने की वाज़िब वज़हें भी हैं! एक बात जो थोड़ी अटपटी लग सकती है वो है विनय के रूप में 6 उसका गुंडों की जान ले लेना! ऐसे में उस कसम का कोई मोल बाकी नहीं रहा जो उसने इंसानों को ना मारने की ली है!
>डोगा >डोगा अपने उसी पुराने चिरपरिचित जनूनी, थोड़े सनकी से,overact अंदाज़ में नज़र आता है!इस कहानी में काफी हार्ड लैंग्वेज वाले डायलॉग्स का इस्तेमाल किया गया है!जैसे-माँ की,अन्दर घुसेड दूंगा आदि !
यह नया अनुभव रहेगा!
>प्रोबोट >परमाणु जहाँ होता है वहां यह भी होंगे ही! इन्होने भी अपने हिस्से का काम काफी उम्दा किया है !
>प्रलयंका >प्रलयंका का छोटा सा रोल है! अब वो पहले की तरह ढंकी छुपी सी बहन जैसी नहीं लगती!धीरज जी उसका मेकओवर कर दिया है इस कॉमिक्स में!उसकी ड्रेस में उल्लेखनीय बदलाव हुआ है ,जिसने उसे एक हॉट और सेक्सी लुक दे दिया है!राज कॉमिक्स में ऐसा बदलाव जरूरी था !

आर्टवर्क >
पेंसिल >धीरज वर्मा जी के आकर्षक चित्रों से सजी हुयी कॉमिक्स है! उन्होंने पूरी तन्मयता के साथ इसको चित्रित किया है!डोगा और भेड़िया के कई शानदार एक्शन सीन बने हैं,जैसे-पेज-11,12,15,29,65,70 की झलक काफी है!एक ही चीज़ जिसकी कमी है वो है इंकिंग का ना किया जाना !जिसकी वज़ह से कॉमिक्स में अधूरापन रह गया है!
रंग>भक्त रंजन जी ने कॉमिक्स को सुन्दर तरह से रंगा है!उन्होंने कई तरह के नए प्रयोग रंग-संयोजन में किये हैं,जिनका प्रभाव आर्टवर्क में इंकिंग की कमी को काफी हद तक छुपा लेता है!उनका काम सराहनीय है,उन्हें आगे भी मौके दिए जाने चाहिए !
शब्दांकन में नीरू जी द्वारा कई विशिष्ट प्रयोग किये गए हैं जो कॉमिक्स की सुन्दरता को बढ़ाते हैं !

रक्तबीज एक अच्छी मनोरंजक कॉमिक्स है !इसे ऐसा तो नहीं कहा जा सकता है कि इसको पढने के बाद पाठको के दिमाग में कई दिनों तक घूमती रहेगी,लेकिन एक अच्छी 3 इन 1 जॉइंट एडवेंचर को देखने-पढने लायक सबकुछ इसमें मौजूद है!

*प्रश्न >कहानी में गरुडा का भी एक छोटा का रोल है! रक्तबीज में वो अपने पंखो का उपयोग कर रहा है !हुडदंग कॉमिक्स में गरुडा के पंखो के नष्ट होने के बाद यदि किसी कॉमिक्स में उसके पंख पुनः उत्पन्न हो गए हैं तो सही है..लेकिन उस कॉमिक्स का नाम पेज के नीचे इंगित करा जाना चाहिए था,और यदि ऐसा नहीं हुआ है तो इसको स्पष्ट किया जाना चाहिए!

TAKSHAK


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2.5
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तो आखिरकार लम्बे इंतज़ार के बाद तक्षक हाथो में आ ही गयी!मकबरा पढने के बाद से ही इसका बहुत इंतज़ार किया जा रहा था! मकबरा ने जो समां बाँधा था,उसकी समाप्ति कैसे होगी,इसको जानने की बड़ी उत्सुक्ता मन में थी!
>कहानी>
तक्षक के अन्दर इतने अनुत्तरित सवाल हैं,जिनकी वज़ह से कहानी पूरी तरह से स्पष्ट ही नहीं हो पाई है! इसका पहला भाग मकबरा निसंदेह बहुत अच्छी तरह से लिखा गया था,लेकिन यह भाग अनावश्यक रूप से भूतकाल और भविष्यकाल के बीच की 3 लड़ाइयाँ दिखाने में खींचा गया!अगर लड़ाइयों की जगह कहानी को साफ़ करने पर ध्यान दिया जाता तो कॉमिक्स दिमाग का मनोरंजन करने के लायक बन जाती !
>पहली बात की इस कहानी मुख्य सूत्रधार विषंधर है,लेकिन वो किसी आम सैनिक की तरह थोड़े समय लड़ने के अलावा कुछ कर ही नहीं पाया!वो सिर्फ एक आशावादी कायर की तरह लगा जो समय के साथ चल रहा है!
>तुतन खामन कहानी में खलनायक जरूर नज़र आता है,लेकिन आश्चर्यजनक रूप से उसके लिए सहानुभूति की एक भावना जन्म लेती है!
>गगन और विनाशदूत के हिस्से में सहायको वाले काम ही आये हैं,जिनका उल्लेख जरूरी नहीं !
>मोंटी और ताहिरा "तक्षक " में ना भी होते तो कहानी की सेहत पर कोई ज्यादा फर्क नहीं पड़ता,क्यूंकि भूतकाल-भविष्यकाल के बीच के गडबडाए संतुलन का सीक्वेंस इतना मजबूत नहीं था कि कहानी पर प्रभाव डाल सके!
अनुत्तरित सवाल:-
1-मकबरा के पेज 70 फ्रेम-3 में उल्लेख करी गयी "मृत्यु पुस्तिका" के बारे में आगे कोई बात ही नहीं हुई कि तुतन को उसकी क्या जरूरत थी ?
2-जब वर्तमान का तुतन खामन भूतकाल में चला गया था,तो भूतकाल का असली तुतन कहाँ गया,उसे क्यूँ नहीं दिखाया गया,जबकि वर्तमान और भूतकाल के 2 विषंधर मौजूद थे ?
3-विषंधर ने मकबरा में नेताज़र की ममी को कैसे जिंदा कर लिया ?
4-तुतन को तक्षक होने की प्रतीक शक्ति "नागरत्न" की प्राप्ति कैसी हुयी,इसकी कहानी तो दिखाई ही नहीं गयी!इसे अगर नज़रंदाज़ भी कर दिया जाए तो वर्तमान में नागराज के पास नागरत्न कैसे आया ,यह पूरा मामला ही गोल कर दिया गया!जबकि नागराज खुद शुरू से यह कहता रहा था की उसे खुद नहीं मालूम की वो तक्षक क्यूँ है या है भी या नहीं ?
5-तुतन की शक्ति का एक बड़ा प्रतीक उसकी सवारी "एपेप",जो की खुद सूर्य देवता रॉ को निगलने की शक्ति रखता था और निगल भी जाता,उसे सिर्फ 5 सेकंड पहले तक लडखडाता,कांपता हुआ नागराज अचानक से सिर्फ सर्प रस्सी से नीचे लाकर कमजोरी की हालत में भी सिर्फ 1 बार में चीर कर फाड़ देता है!इससे बड़ी overhype और क्या हो सकती है! 1 सेकंड को यह नरक नाशक नागराज नहीं बल्कि अनुपम जी का महानगर वाला नागराज लगने लगा था!यह नागराज को जिताने के लिए दिखाया गया कमजोर एक्शन सीन था जो बिलकुल भी हज़म नहीं होता!(पेज-57,58)
6-अब देखिये तुतन का इच्छाधारी रूप,जिसके अन्दर समस्त पृथ्वी के सभी 100% इच्छाधारी सर्पो की शक्ति थी,वो ऐसे इच्छाधारी नागराज से लड़ रहा था,जिसके अन्दर सिर्फ उसके अपने शरीर के कुछ हज़ारो की संख्या वाले इच्छाधारी सर्पो की सीमित शक्ति थी!यह एक बेमेल लड़ाई थी,जिसमे साफ़ दिख रहा है की तुतन का पलड़ा भारी है!अगर यह लड़ाई लम्बी खीची जाती और धीरे धीरे तुतन की हार होती तो समझ आता लेकिन सिर्फ 2 फ्रेम यानी 1 मिनट से भी छोटी लड़ाई में तुतन को लेखक ने हारा हुआ घोषित कर दिया!वो क्यूँ हारा ?इसका कोई जवाब नहीं दिया गया!(पेज-61,62)
7-अगर विषंधर के पास हमेशा से एमेन्टा दंड था जो कि " प्राण ले भी सकता है और दे भी सकता है",तो वो खुद ही तुतन को जिंदा कर सकता था!उसने ऐसा क्यूँ नहीं किया?
8- एमेन्टा दंड विषंधर की शक्ति थी!उसे तभी गायब हो जाना चाहिए था जब भूतकाल में विषंधर समय द्वार में समा गया था,अंत में ऐसा चित्रों में कहीं नहीं दिखाया गया,कि एमेन्टा दंड भी सबके साथ ही वर्तमान में वापस आ गया हो ,लेकिन अंत में अचानक से एमेन्टा दंड को नगीना ने तुतन के खात्मे के लिए कहाँ से निकाल लिया,इसका भी कोई जवाब नहीं है!इसके बाद तुतन के मरते ही खुद ही एमेन्टा दंड और देश्रेट अचानक क्यूँ गायब हो गए,यह भी पता नहीं चला!(पेज-66,72)

आर्टवर्क>
जैसी कहानी है वैसा ही आर्टवर्क भी है!जिस बात का डर था वही हो रहा है!काम का अत्यधिक बोझ कह लीजिये या समर्पण में कमी,जो भी वज़ह रही हो,हेमंत और जगदीश जी पर कुछ असर दिखने लगा है!
मकबरा से तक्षक के आर्टवर्क की तुलना करी जाए तो बहुत ज्यादा गिरावट साफ़ देखी जा सकती है!नागराज की कॉमिक्स के आर्टवर्क का जो स्तर होना चाहिए,वो तक्षक में नज़र नहीं आता!बैक ग्राउंड्स पर ध्यान नहीं दिया गया है!मकबरा में जिस तरह का प्रभाव था तक्षक में ऐसा बिलकुल नहीं दिखता!इसे सिर्फ कामचलाऊ की संज्ञा दी जा सकती है!
रंगों में सिर्फ फ्लैट कलर्स हुए हैं,क्यूंकि आर्टवर्क में ही कमियां हैं,इसलिए कलरिंग पर प्रतिक्रिया देने का कोई लाभ नहीं है!

कॉमिक्स में परेशानी यह है की लम्बे एक्शन सीन्स के नीचे कहानी की कमियों को छुपाने की कोशिश करी गयी लगती है!कहानी का अंत बड़ी जल्दबाजी में हुआ है!
यह एक अच्छी 2 पार्ट सीरिज़ बन सकती थी लेकिन ऐसा हो नहीं पाया,जो की दुःख और चिंता की बात है!राज कॉमिक्स का अंतिम भाग में जल्दबाज़ी करना यहाँ भी जारी रहा!
नरक नाशक नागराज की अगली टक्कर कौटिल्य नागमणि से है,यह टक्कर यादगार रहेगी या नहीं यह भविष्य के गर्भ में है,इन गलतियों से सीख लेकर आगे का लम्बा समय अभी भी बाकी है!ताकि पाठको को कालजयी कहानियां मिल सकें!
शुभम 


SPECIALS


Overall rating 
 
2.5
story 
 
2.5
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2.5



क्या यह कॉमिक्स सचमुच SPECIAL category में शामिल होने लायक है ?...यह एक बड़ा सवाल है ..जिसका उत्तर पढने वालो को ही खोजना पड़ेगा.

कहानी>>>
अगर कहानी पर ध्यान दिया जाए तो यह राजनगर की रातों में 3 अलग रात में घटी घटनाओं पर घूमती है ..यानी सिर्फ रात है दिन गायब .
कहानी जहाँ से शुरू होती है ...वो बहुत पुराना सा घिसा पिटा sequence है ...जिसकी झलक पहले आई HUM HONGE KAAMYAAB में देखी जा चुकी है .....कहानी का केंद्रबिंदु है ....एक अनाथालय और इस अनाथालय की ख़ास बात यह है ..की इसका सारा खर्चा सालो से ध्रुव उठा रहे हैं ...यहाँ एक सुंदर सी caretaker भी है .."सितारा " जो यह भेद पहली बार खोलती है की ध्रुव "Being Human" भी हैं! .
यहाँ रहने वाला हर बच्चा SPECIAL है..इस स्पेशल होने के पीछे क्या राज़ है..यह कहानी में पढियेगा..... इसके बाद कहानी क्यूंकि सिर्फ 3 रात की है इसलिए घटनाक्रम बहुत तेज़ी से भागना शुरू होता है ....अनाथालय जल्दी ही भूत -प्रेतों का अड्डा बना नज़र आता है ..भूत आ रहे हैं ...जिन्न आ रहे हैं ...ध्रुव यहाँ से वहां भाग रहा है ...यह इतनी भागमभाग क्यूँ हो रही थी ...यह समझाने के लिए लेखक ने Page-48 से Page 56 यानी 8 page बड़े विस्तार और आराम से खर्च किये हैं .....और इसके बाद के आखिरी 5 pages ध्रुव भैया ने हँसते हुए अपनी दिमाग की बत्ती जलाकर "बड़े आराम से " ऐसे ठीक किया है सबकुछ जैसे या तो वो Amul Macho के नए brand Ambassador हो ..या लेखक ने कहानी की एक copy उन्हें पहले ही दे दी हो ..की भैया तुम हीरो हो ..तुम्हे सब पहले से पता होना चाहिए .

अब रोल्स की बात करी जाए
ध्रुव को लेकर इतनी सतही कहानी क्यूँ लिखी और पास करी गयी वो RC जाने ...लेकिन यह कहानी ध्रुव के लायक नहीं थी ...ध्रुव के crime fight की यह शैली नहीं है ...परेशानी भूत प्रेतों और तंत्र के इस्तेमाल से नहीं आई है ...ऐसा पहले हो चुका है कई बार ...परेशानी आई है ..कहानी के कथानक और treatment से ...जो बहुत ज्यादा कमजोर है .

वू-डू के लिए यह कहानी प्राणघातक साबित हुयी है ....उसकी वापसी ऐसी टटपूंजिया तरीके से कराई जायेगी कभी सोचा ना था ..कहानी में उसके होने का कोई मतलब ना था ..और जो मतलब बताया गया है ..उसने दुखी कर दिया ..कहानी खोलना नहीं चाहते ..पर सवाल बहुत सारे हैं .
वू-डू जैसे पुराने शातिर खलनायक का क्रियाकर्म हो गया इस रोल में .

एक और भाईसाहब हैं ..."किशोर" ...यह हर कहानी में एक ही रोल में नज़र आते हैं ....पहली बार इनकी किताब तो ध्रुव ने जलाकर हाथ सेक लिए थे ...अब इन्हें शायद "जल निगम " में नौकरी मिल गयी है ...कुछ नया करते ही नहीं ...और जो करते हैं वो बताने की जरूरत नहीं है .

अनाथालय की caretaker सितारा का काम कहानी में अच्छा है .

हाँ तो अब बात इस भटकी हुई कहानी के भटके हुए मुख्य विलेन की ...जैसा हमने बताया की वू-डू का होना -ना होना एक बराबर था ..तो मुख्य विलेन कोई और है ...जिसकी बड़े ही आराम से Macho Man SCD से हार हो जाती है ....कहानी समाप्त


आर्टवर्क>>

बिलकुल नए आर्टिस्ट सुनील पासवान जी का आर्टवर्क है ....और inking भी मुख्यत: उनकी ही है ..सागर थापा जी ने काफी कम pages को इंक किया है!
आर्टवर्क के मामले में भी यह कॉमिक्स निहायत ही कमजोर साबित हुई है ...जिसे पूरी तरह से खारिज तो नहीं किया जा सकता ...लेकिन इसमें बहुत भारी कमियां हैं ...तो कुछ points पर अच्छाईयां भी हैं .
ध्रुव पूरी कॉमिक्स में खराब बना है ...पत्थर जैसी शक्ल और उसके भाव ,motions...उसके famous Hair style की बहुत भद्द पीटी गयी है ..और बॉडी को कई जगह ऐसा चपटा बनाया गया है ..जैसे कोई road roller ऊपर से गुजर गया हो ..जैसे -page- 12,16,22,36 आदि को देखा जा सकता है ....ध्रुव की ऐसी हालत दिल दुखाने वाली रही ...उसके action scenes..running scenes भी बहुत खराब बने हैं .
ध्रुव के चेहरे पर इतने ज्यादा experiments शायद ही कभी देखने को मिले हैं ....ऐसा लगता है पूरे bollywood aur cricket teams के लोगों के चेहरे हर नए frame में SCD पर आजमाए गए हैं .
Page-48>>Frame-1-Vivek Oberoi
Page-48>>Frame-4-Akshay Kumar
Page-51>>Frame-2-Reitesh Deshmukh
Page-55>>Frame-1-Mahela Jayawardena
भैया और नहीं लिखा जा रहा ...जिसे जो मिल जाए ..खोज लेना .

अब बाकी कॉमिक्स का आर्ट वर्क >>
हैलोविन के बच्चे ,वू-डू ,सितारा और बाकी सभी रोल्स ठीक ठाक बने हैं ..लेकिन वह भी हर पेज में अलग ही नज़र आते हैं ..तारीफ में कसीदे पढने लायक नहीं हैं .

एक और बात .... पूरी कहानी में ऐसा feel नहीं आया की वो राज नगर में सबकुछ हो रहा है ...राज नगर एक समुद्र किनारे बसी city है ....और इसमें Hallowin दिखाने के लिए बड़े बड़े Cross...छोटी पहाड़ियों के बीच wheat farms..और घर रुपी Huts ऐसे लगते हैं ...जैसे Mexico के किसी गाँव में कहानी चल रही है!

रंग(शादाब सिद्दीकी ) और शब्दांकन(मंदार गंगेले) जी का काम है..रंग-सज्जा में कुछ ज्यादा कहने लायक नहीं है..पुराने कामो की तुलना में यहाँ ज्यादा variety नहीं है!


...story+artwork के मामले में यह बहुत सतही ,कमजोर लेखन , बचकानी सी ,और साधारण से भी नीचे कही जा सकने वाली कॉमिक है ..अब क्यूंकि ध्रुव की कॉमिक्स है ...अपना collection 100% रखने के लिए लेनी पड़ेगी ..लेकिन मनोरंजन लायक material इसमें नहीं है ...2 बार पढके तीसरी बार शायद ही कोई पढना चाहे .

अंत में Specials को पढ़कर और आर्ट वर्क का जायका लेकर आप भी आँखें गीली कर सकते हैं ,लेकिन वो आंसू ख़ुशी के होंगे या गम के ..वो आपके ऊपर है .

DOGA DIARIES-3


Overall rating 
 
4.0
story 
 
4.0
artwork 
 
4.0

 

DOGA DIARIES-3

CASE 1-SHIKAAR(story-6/10....Artwork-9/10)
Writer-SUDEEP MENON
Artist-LALIT KUMAR SHARMA...INKING-JAGDISH KUMAR

CASE 2-ANSHAN(story-9/10....Artwork-8/10)
Writer-T.K. WAHI-ANURAG KUMAR SINGH
Artist-SUSHANT PANDA...INKING-SAGAR THAPA

CASE 3-BAAUNTI(story-8/10....Artwork-5/10)
Writer-T.K. WAHI-ANURAG KUMAR SINGH
Artist-HARSHWARDHAN KADAM

CASE 4-TAMANCHA(story-8/10....Artwork-8/10)
Writer-T.K. WAHI-ANURAG KUMAR SINGH
Artist-SUSHANT PANDA

CASE 5-PEHCHAAN(story-7/10....Artwork-9/10)
Writer-SUDEEP MENON
Artist-PRADEEP YADAV...INKING-VINOD KUMAR

CASE 6-EXTREME JUSTICE(story-6/10....Artwork-8/10)
Writer-SUDEEP MENON
Artist-ISHAAN TRIVEDI

CASE 7-HAPPY NEW YEAR(story-9/10....Artwork-10/10)
Writer-SUDEEP MENON
Artist-DILDEEP SINGH...INKING-VINOD KUMAR

CASE 8-AASAAN SHIKAAR(story-9/10....Artwork-7/10)
Writer-ANURAG KUMAR SINGH
Artist-MAYUR SEKIA


Total-
story points- 62/80
Artwork points-64/80

Doga Diaries-1 pichli 2 diaries ki tulna mein normal rahi hai...combined format ki yeh short stories alag alag rate ke layak hain..kyunki kuch stories achchi lagti hain toh kuch nahin!
collection ke hisab se doga premiyo ke paas yeh diaries bhi jaroor honi chahiye!
RC ko aage bhi aisi diaries ko nikaalte rehna chahiye! inhe aur jyada real stories aur artworks dene chahiye..aur risks se gujarna chahiye..chahe story ho ya artwork..samjhaute naa karein.


MAKBARA




Overall rating 
 
4.5
story 
 
4.5
artwork 
 
4.5

मकबरा.......लेखक नितिन मिश्रा द्वारा लिखित यह कहानी का पहला भाग है! नरक नाशक नागराज........ के साथ इसमें विनाशदूत,गगन,ताहिरा और मोंटी जैसे राज कॉमिक्स के आकाश से विलुप्त हो चुके हीरोज को नवजीवन देने की कोशिश की गयी है!
मकबरा जैसे विषय पर सोचते ही दिमाग में अक्स उभरता है,प्राचीन मिस्त्र सभ्यता का..लेकिन फिलहाल मकबरा की कहानी भारत(थार मरुस्थल)में ही बुनी हुई नज़र आ रही है!
पुरातत्व खोजो से जुड़े एक छात्र दल पर हुए पराशक्ति हमले में R.I.P के involvement के बाद नागराज का आगमन कहानी में हो जाता है! एक जांच अभियान कब अचानक से दुनिया को नरक बनने से बचाने की कवायद में तब्दील हो जाता है..वह लेखक की खूबसूरती से बुनी कहानी में पता ही नहीं चलता!

कहानी में roles की बात करी जाए तो नितिन जी ने सभी के साथ पूरा न्याय किया है ..नागराज के आभामंडल में दूसरे हीरोज़ के दब जाने जैसी बात नहीं दिखती ...गगन -विनाशदूत की टीम आज भी उतनी ही परफेक्ट लगी है ..जितनी पहले थी .
ताहिरा को कहानी में cool minded..तेज़ दिमाग दिखाया गया है ...परिस्थिति के हिसाब से सही हथियारों का इस्तेमाल करते देखना रोमांचकारी अनुभव रहा ..अपने हिस्से के portions में उसका involvement front में रहा ...ऐसा कहीं भी नहीं हुआ ...जैसे वो सिर्फ show piece की तरह side में खड़ी दिखी हो ...यह plus point रहा !
मोंटी का role इस तूफानी एक्शन में भी हलकी -फुल्की मुस्कान लाने में सफल रहा है !
कहानी में मुख्य खलनायक कौन होगा ..इसमें अभी संदेह की बहुत सी गुंजाईश हैं ..क्यूंकि तुतन खामन ,अनूबीस के अलावा भी आगे नगीना ,विषंधर से लेकर कालदूत या शायद नागद्वीप का involvement अगले पार्ट में हो सकता है !

Artwork-
हेमंत कुमार जी ने पिछली कई कॉमिक्स की तरह एक बार फिर से अपनी उँगलियों का जादू मकबरा में बिखेरा है ...नरक नाशक नागराज पर उनका काम पहले भी मृत्युजीवी आदि में देखा और बहुत पसंद किया जा चुका है ... गगन -विनाश्दूत आदि को भी उसी सहजता से बनाकर उन्होंने खुद को कॉमिक आर्ट की अग्रीम पंक्ति के आर्टिस्ट्स में शुमार कर लिया है !हर character पर वो एक सामान अधिकार रखते हैं !
जगदीश कुमार जी की इंकिंग के बिना artwork की बात अधूरी रह जायेगी ! किसी भी आर्टिस्ट के मेहनत से बने चित्रों को उसी खूबसूरती से उभारना जगदीश जी की खासियत रही है ! WTS से लेकर अब नरक नाशक नागराज पर भी उन्होंने शानदार काम जारी रखा है !हेमंत जी के साथ भी उनकी जोड़ी ..... कई सफलताएं आगे भी देती रहेगी !

Color Effects-
इसमें कोई शक नहीं है की शादाब सिद्दीकी जी इस वक़्त राज कॉमिक्स में सबसे उम्दा colorist में स्थान रखते हैं ..उनकी खासियत यह है की कहानी के माहौल के हिसाब से वो अपने काम को आसानी से ढाल लेते हैं ..मृत्युजीवी और OOB series का भुलाया ना जा सकने वाला काम मकबरा में भी जारी है ...मकबरा dark tone story होने के बाद भी कहीं ऐसी नहीं लगती ...की उसमे light effects को जरूरत के मुताबिक उपयोग ना हुआ हो ..Effects पर अगर गौर किया जाए तो ..आसमान में बदलते रंग ,मकबरे के अन्दर रौशनी और shadows का तालमेल ,रेट के बवंडरो में आये बदलाव ,RIP के हथियारों को इस्तेमाल करते वक़्त हुए effects देखने लायक रहे हैं ...Good work!

Calligraphy-
याद नहीं आ रहा है ..की राज कॉमिक्स में calligraphy पर इतनी मेहनत कभी हुयी हो ..जितनी मंदर गंगेले जी के काम सँभालने के बाद दिखी है !उन्होंने अपने Ideas से इसे खानापूर्ति की जगह एक आर्ट की तरह इस्तेमाल कर दिया है ! सिर्फ Caption Boxes में dialogues डालने तक यह सीमित नहीं है ..बल्कि चलती गोलियों ,चीखते जीवों ,गिरती चट्टानों आदि जिस भी मौके पर जोरदार आवाज़ की जरूरत हुयी है ..वहां खूबसूरत इस्तेमाल इस तकनीक का हुआ है ! RC में आया यह बदलाव सुखद परिघटना से कम नहीं है !
RC से निवेदन है की कॉमिक covers के अभी आ रहे normal fonts पर भी बदलते वक़्त के हिसाब से changes लाइए !

P.S-इस कहानी को ज्यादा अच्छी तरह से जानने-समझने के लिए राज 20-20 series की सौडांगी और पंचनाग को भी पहले जरूर पढ़ें ..कुछ किरदारों और घटनाओं के बारे में अधिक जानकारी मिल सकेगी !

पाठको को यह series जरूर खरीदनी चाहिए ! 

SHOW STOPPER


Overall rating 
 
4.5
story 
 
4.5
artwork 
 
4.5


शो स्टॉपर सभी ध्रुव प्रेमियों के लिए नितिन मिश्रा जी का उपहार है ..पिछले लम्बे समय से जो खालीपन ध्रुव की कहानियां महसूस करा रही थी ..वो भरने में शो स्टॉपर सफल रही है !
इसमें आपको मिलेगा वही पुराना मासूम सा प्यारा ध्रुव जो कलाबाजियां करता था ...जानवरों से बातें करता था ..भावुक था और उसमे कोई कृत्रिम चीज़ नहीं थी !
सबसे पहले यह साफ़ कर देते हैं की यह कहानी किसी भूत भविष्य ...समय यात्रा या फिर double role जैसी किसी चीज़ से जुडी हुई नहीं है ..यह वास्तविक "present " की कहानी है ...यह घटनाक्रम ध्रुव के 2 पुराने villains के षड़यंत्र की उपज है !
लेकिन किस तरह उनकी इस कारगुजारी ने भी ध्रुव की ज़िन्दगी के एक अनजाने पहलू को सभी के सामने खोलकर रख दिया ..उसे पढ़कर सभी भावुक जरूर हो जायेंगे !
यह कहानी है भावनाओं की ..Emotions...जो किसी भी इंसान की ज़िन्दगी में होने बहुत जरूरी हैं ..चाहे वो superhero ही क्यूँ ना हो ..यही भावनाएं उसे मशीन बनने से बचाए रख सकती हैं !
इस कहानी में कल्पना से अलग यथार्थ के धरातल पर अगर कुछ है तो वो है रिचा यानी blackcat !इस कहानी के बाद उसके fans की संख्या में और बढ़ोतरी जरूर देखी जायेगी ..क्यूंकि उसे और अच्छी तरह से जानने और समझने का मौका यह कहानी देती है !
रिचा के character का इस कहानी से development हुआ है !
Jupiter circus कहानी का केंद्र बिंदु है ..यह ध्रुव की पुरानी simple storyline वाली stories से जुडी हुई कहानी है ...इसमें dramatic conditions काफी हैं जिसमे action भी साथ -साथ parallel चलता जाता है!

Artwork-
Artwork बहुत खूबसूरत बना है ....ध्रुव पर काम करना हेमंत जी के लिए किसी चुनौती से कम नहीं है ...ध्रुव के चेहरे से लेकर हर body angle पर ध्रुव fans की नज़रें रहती हैं ..उनपर यह दबाव भी रहता है ..की अनुपम जी के ध्रुव से उनका ध्रुव 19 ना रह जाए ! 2 artists की बीच की तुलना यह कभी ठीक नहीं होती है...क्यूंकि इसमें दोनों के काम की मौलिकता पर प्रश्नचिन्ह लगने का खतरा हो जाता है ! हेमंत जी का काम ध्रुव पर अभी तक बहुत बढ़िया रहा है ..जो अलग होने के बाद भी स्वीकार्य है !
हेमंत जी को इस बार विनोद जी की इंकिंग का बहुत सकारात्मक साथ मिला है! हेमंत जी की इस कॉमिक में की गयी यादगार मेहनत को निखारकर लाने में विनोद जी जैसे senior artist ने भी कोई कसर बाकी नहीं रखी है!

मोहन प्रभु जी ने कहानी की theme के हिसाब से ideal effects दिए हैं!

मंदार गंगेले जी तो अब calligraphy एक्सपर्ट हो गए हैं...उनका काम भी खूबसूरत है!

शो स्टॉपर जरूर लीजिये...यह किसी तोहफे से कम नहीं है ध्रुव fans के लिए.